नजरोंको चुराकर वो...
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नजरोंको चुराकर वो,इस तौर से चलते हैं
कुछ हमभी मचलते हैं,कुछ वो भी मचलते हैं
मुमकिन है महोब्बतभी,गर चांद वो ला दो तो
ये चांदके 'टुकडे' तो,बगियामें टहलते हैं
जुगनूंकी तरह यादें..हमको यूं जलाती है
शम्मोंको बुझाकर हम,पुरजोर पिघलते हैं