मला अश्या ठिकाणी भूतांची भीती वाटते. काळोखात बाहेर येउन बघितलं तर लांब लांब पर्यंत कोणीच नव्हते. अश्या वेळेस तर मला चारी बाजूनी भूतेच दिसू लागतात. मनाला माहिती आहे कि, भूत भीत काही नसतं. पण अशी वेळ आली कि चांगलीच फाटते. दिवसा मी सिद्ध करू शकतो कि, भूत भीत काही नसते. पण अश्या शांत रात्री एकटे असताना.... सिद्ध करायचे तर बाजूलाच राहिले. विचार करूनच भीती वाटते. तंबू लावल्या नंतर जे मी स्लीपिंग बैग मध्ये घुसलो. सकाळ होई पर्यंत डोळे उघडलेच नाही. आज 70 किलोमीटर सायकल चालवली.
दिवस सतरावा
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| फोतूला च्या तिथे लावलेला तम्बु |
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| फोतूला कडे |
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| फोतुला जास्त लाम्ब नाहि |
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| रस्त्यामधे भेटलेले मोटारसायकल वाले |
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| बौद्ध खारबू गांव |
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| नामिकला जानारा रस्ता |
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| समोर नामिकला आहे. |
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| आजच नामिकलापण पार केला. एका दिवसात दोन घाट |
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| मुलबेक मधे ह्याच गेस्ट हाउस मधे थाबलो होतो. |
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| माझी खोली |
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| लाइट गेली म्हणुन मेनबत्ती लावुन जेवन केले. कैण्डल लाइट डिनर!! |
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मिसळपाव


































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अचाट!
+१११११११११११
In reply to अचाट! by एस
मस्त. हा भागही आवडला.
आवडला हा भाग.
निव्वळ अप्रतीम. सगळे लेख