| काव्य |
देऊनी स्वप्ने विझल्या गात्री |
विजुभाऊ |
| काव्य |
" बघ तुला माझी आठवण येते का ? " |
सुहास.. |
| काव्य |
अक्षय धन |
निरन्जन वहालेकर |
| काव्य |
कुंडलीने घात केला |
गंगाधर मुटे |
| काव्य |
रानवाटा शोधतांना |
पाषाणभेद |
| काव्य |
जेजूरी गडावर नांदे मल्हारी |
पाषाणभेद |
| काव्य |
हा दारूच्या 'फुल'पात्रांचा दोष असावा |
केशवसुमार |
| काव्य |
गण: वंदन करीतो गजाननास |
पाषाणभेद |
| काव्य |
सामर्थ्यवान |
चिंगुसविकॄतजोशी |
| काव्य |
लख्ख |
अर्धवट |
| काव्य |
हा आयटिच्या सर्व मुलांचा दोष असावा |
केशवसुमार |
| काव्य |
(चटेपटेरी चड्डीचा हा दोष असावा) |
राजेश घासकडवी |
| काव्य |
वाटते बोलायचे राहून गेले |
डॉ.कैलास |
| काव्य |
शेवटी |
डॉ.कैलास |
| काव्य |
हा शब्दांच्या गुणसुत्रांचा दोष असावा |
अनिरुद्ध अभ्यंकर |
| काव्य |
आभाळमाया |
दत्ता काळे |
| काव्य |
पाऊस... |
वैभव देशमुख |
| काव्य |
तरंग |
अवलिया |
| काव्य |
अधुरा चंद्र |
रुपेश कुलकर्णी |
| काव्य |
माझे मन सुखाच्या मागे धावत असता.. |
संजयशिवाजीरावगडगे |
| काव्य |
मावळतीला रंग शोधणारा ढग मी... |
फ्रॅक्चर बंड्या |
| काव्य |
जीव तुझा कासावीस ... |
वैभव देशमुख |
| काव्य |
एकटीच होते बरी मी एकटीच होते खरी |
झुम्बर |
| काव्य |
(बघ त्याची आठवण येते का?) |
अडगळ |
| काव्य |
चला दोस्तहो सैपाकावर खर्डू काही ! |
केशवसुमार |
| काव्य |
दुरावा |
ऋषिकेश |
| काव्य |
निस्सिम प्रेम |
चिंगुसविकॄतजोशी |
| काव्य |
अहंकार |
दिलीपकुमार |
| काव्य |
“ घेतला वसा षंढतेचा ” |
निरन्जन वहालेकर |
| काव्य |
धागा धागा अखंड दळूया |
केसुरंगा |