| काव्य |
वारी |
राजेश घासकडवी |
| काव्य |
विकांताची करमणूक . |
रामदास |
| काव्य |
आज अचानक तुझी आठवण का यावी |
अनिरुद्ध अभ्यंकर |
| काव्य |
एका स्थळात लिहिली, वीडंबने हि दोन |
राजेश घासकडवी |
| काव्य |
एका स्थळात लिहिली, जी धोरणे अनेक |
केशवसुमार |
| काव्य |
एका स्थळात लिहिली, जी धोरणे सुरेख |
केसुरंगा |
| काव्य |
मी न माझा……… |
निरन्जन वहालेकर |
| काव्य |
कव्वाली : अशी ग कशी सोडूनी जाते तू मला |
पाषाणभेद |
| काव्य |
शून्य |
sur_nair |
| काव्य |
स्वप्नी माझ्या आलीस तू |
पाषाणभेद |
| काव्य |
सीमालढागीतः भिऊ नको मराठी जना |
पाषाणभेद |
| काव्य |
काही राहीलेले |
पंचम |
| काव्य |
गाणी |
क्रान्ति |
| काव्य |
सद्गुरू माउली |
सागरलहरी |
| काव्य |
टंकेल वीडंबक जैं न काहीं |
धनंजय |
| काव्य |
पुन्हा एकदा |
jaypal |
| काव्य |
मीरा म्हणे ........... |
झुम्बर |
| काव्य |
(हळूहळू हा तापच झाला स्वैपाक अन्) |
राजेश घासकडवी |
| काव्य |
महाराष्ट्र कर्नाटक सीमावादावरील गीत : उठ रे मराठी गड्या तू चल सीमेवर |
पाषाणभेद |
| काव्य |
निवडुंग........ |
निरन्जन वहालेकर |
| काव्य |
अतरंग ... |
विशाल कुलकर्णी |
| काव्य |
शिशिर ऋतू का आला हेमंत सरून |
पाषाणभेद |
| काव्य |
जीवन-मृत्यू! |
राघव |
| काव्य |
(अत्रंग) |
अडगळ |
| काव्य |
हळूहळू हा तापच झाले संपादन... |
केशवसुमार |
| काव्य |
अंतरंग |
jaypal |
| काव्य |
काय बोलणे |
सागरलहरी |
| काव्य |
शेतकरी गीत : काळ्या काळ्या मातीमधी पिकलंया सोनं |
पाषाणभेद |
| काव्य |
हळूहळू हा व्यापच झाले संपादन... |
केशवसुमार |
| काव्य |
शॄंगार |
राजेश घासकडवी |