बदसुरत न बना हकीकत
कविता, लेख, कथा कितीही उत्कृष्ट असोत, जीवनाला हुबेहूब कोणीच रेखाटू शकत नाही. अगदी सिद्धहस्त लेखक देखील.
बुरबुराते शरारती झरनों की मासुमियत
या खिलखीलाती हरीयाली की तबस्सुम
समिंदर तरन्नुम गाता, फिरभी गुमसुम
बदसुरत न बना फिजूल, गझलोमें ढाल इन्हे |
झुर्रीयोमें दबी सुष्क आंखें, खोजती शबाब
शगाफोंसे लदा चरगाह, ताकते फ़व्वार--------------------*शगाफे-cracks *चरगाह-field
दर्यामे आवाराह कश्ती, तलाश साहिल की
बदसुरत न बना फिजूल, गझलोमें ढाल इन्हे |
मिसळपाव