न किसी की ऒख का नूर हूं
न किसी की ऒख का नूर हूं
न किसी की ऒख का नूर हूं
न किसी के दिल का करार हूं,
जो किसी के काम न आ सके
मै वो एक मुश्ते-गुबार हूं ---१.
मेरा रंग रूप बिगड गया
मेरा यार मुझसे बिछड गया
जो चमन खिजॉ से उजड गया
मै उसी की फस्ले बहार हूं ---२
पा-ए-फातहा कोई आये क्यो
कोई चार फूल चढाये क्यो
कोई आ के शम्मा जलाये क्यू
(जफर अश्क कोई बहाये क्यु)
मै तो बेकसी का मजार हूं ---३
मै नही हूं नग्मा-ए-जॉफिजा
मुझेम सुन के कोई करेगा क्या
मै बडे विरोग (विरॉन) की हूं सदा
मै बडे दुखों की पुकार हूं ---४
न तो मै किसी का हबीब हूं
न तो मै किसी का रकीब हूं
जो बिगड गया वो नसीब हूं
जो उजड गया वो दयार हूं ---५
मिसळपाव
फिरता फिरता तो त्याच्या साम्राज्यातील पुर्व-समुद्रकिनारी पुद्दुचेरी या व्यापारी बंदरावर आला. तिथे त्याच्या नजरेस अतिशय सुंदर वास्तु पडली. त्याची वास्तुकला अन त्यावर असणारे कोरीवकाम पाहून तो थक्क झाला.