(चकणा )
उमाकांत काणेकर यांचे गीत असलेली , शोभा गुर्टू यांच्या आवाजातील एक अप्रतिम गझल ' उघड्या पुन्हा जहाल्या, जखमा उरातल्या ' याचे हे विडंबन त्यांची माफी मागून
--------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------
मिळता पुन्हा सगळा चकणा बशीतला
दिसती मम डोळ्यांना मदिरा पेल्यातल्या
घेऊ कशी नुसती घशात जळजळे
सुरवात करताना, चकल्या पुढातल्या
निघता वलय ओठी, हळुवार सिगारचे
मिळतात त्या अजुनी शेंगा भाजलेल्या
पिऊनिया उरावी, ती भुक लागलेली
तू विसरलास होत्या नोटा खिशातल्या
----------------------