| काव्य |
तू तेव्हा तशी ... |
विश्वेश |
| काव्य |
बेत |
विश्वेश |
| काव्य |
प्रेमाचा "निसर्ग" |
निमिष सोनार |
| काव्य |
लीला केली विश्वंभरे .... |
सागरलहरी |
| काव्य |
उत्सव ...! |
विशाल कुलकर्णी |
| काव्य |
ओझी |
क्रान्ति |
| काव्य |
आठवण |
प्रभो |
| काव्य |
ती -२ |
केशवसुमार |
| काव्य |
प्रेम काव्य संग्रह |
निमिष सोनार |
| काव्य |
(ती) |
चतुरंग |
| काव्य |
ती |
क्रान्ति |
| काव्य |
रान वाट |
सागरलहरी |
| काव्य |
करतो अजून आशा.... |
सागरलहरी |
| काव्य |
परी |
सागरलहरी |
| काव्य |
अश्वत्थ |
सागरलहरी |
| काव्य |
पूर्वीगत पण आता कोणी हिणवत नाही |
चेतन |
| काव्य |
व्यथा |
विनायक प्रभू |
| काव्य |
काही कविता. |
रामदास |
| काव्य |
पूर्वीगत पण आता काही करवत नाही |
केशवसुमार |
| काव्य |
पूर्वीगत पण आता काही लिहिवत नाही |
अनिरुद्ध अभ्यंकर |
| काव्य |
संकल्पः नव्या युगाचा |
नरेंद्र गोळे |
| काव्य |
उषा.. |
प्राजु |
| काव्य |
व्यसन...! |
विशाल कुलकर्णी |
| काव्य |
गोरी गोरी पान (विडंबन) |
JAGOMOHANPYARE |
| काव्य |
"निरोप नवव्या वर्षाचा, स्वागत नव्या वर्षाचे..." |
निमिष सोनार |
| काव्य |
मिसळपाव करता करता |
JAGOMOHANPYARE |
| काव्य |
बंदोबस्त-२ |
केशवसुमार |
| काव्य |
गीत रामायण- बाबुजी आणि गदिमांचे |
पुष्कराज |
| काव्य |
बंदोबस्त |
विनायक प्रभू |
| काव्य |
मागणे |
पद्मश्री चित्रे |