| काव्य |
बुधवारची कविता : (खवट) |
llपुण्याचे पेशवेll |
| काव्य |
<सवयीने मंद > |
विजुभाऊ |
| काव्य |
सात .... |
विशाल कुलकर्णी |
| काव्य |
रात्र मिलनाची ... ! |
विशाल कुलकर्णी |
| काव्य |
कधीतरी |
नेहमी आनंदी |
| काव्य |
(सवयीने मंद) |
३_१४ विक्षिप्त अदिती |
| काव्य |
निरंजन |
दमनक |
| काव्य |
जगलो जरी मी खुप. |
टुकुल |
| काव्य |
[मूल ते मा़झेच होते] |
अमृतांजन |
| काव्य |
ते झाड़ तोडले कोणी ? |
सागरलहरी |
| काव्य |
कान्हा तुझ्या मुरलीचा, साज असा छळतो रे, |
सागरलहरी |
| काव्य |
फूल ते माझे न होते.... |
सागरलहरी |
| काव्य |
काळ......... |
चन्द्रशेखर गोखले |
| काव्य |
<शेवट> |
ऋषिकेश |
| काव्य |
वेडा |
फ्रॅक्चर बंड्या |
| काव्य |
(ते जीवच वेडे होते) |
चेतन |
| काव्य |
त्यात काय मोठंसं...? |
विशाल कुलकर्णी |
| काव्य |
ते जीवच वेडे होते |
क्रान्ति |
| काव्य |
(शेवट) |
केशवसुमार |
| काव्य |
शेवट |
बेसनलाडू |
| काव्य |
एक मुक्तक. |
रामदास |
| काव्य |
(अवांतर) |
३_१४ विक्षिप्त अदिती |
| काव्य |
मत्सर ... |
विशाल कुलकर्णी |
| काव्य |
बुधवारची कविता: (टारोबा तुज शहीद केले) |
llपुण्याचे पेशवेll |
| काव्य |
कविते, तुज शोधित आले |
क्रान्ति |
| काव्य |
खंत..... |
उदय सप्रे |
| काव्य |
<पुन्हा ती भेटली तेव्हा.> |
विजुभाऊ |
| काव्य |
पुन्हा ती भेटली तेव्हा.. |
ज्ञानेश... |
| काव्य |
[गणिती सुत्रे] |
अमृतांजन |
| काव्य |
ठेव |
क्रान्ति |