जुनाच पण सदाबहार खेळ !! इच्छुकांनी सहभागी व्हावे......
मेरे मेहबूब कयामत होगी....
आज रुसवा तेरी गलियोमे मोहब्बत होगी...
मे री न ज रे तो गि ला क र ती है....
तेरे दिल को भी सनम तुझसे शिकायत होगी....
पुढचे अक्षर "ग"....
काव्यरस
| लेखनविषय: |
|---|
वाचने
111698
प्रतिक्रिया
457
मिसळपाव
प्रतिक्रिया
नि मैं समझ गयी नि मैं समझ गयी
In reply to नी मै समझ गई by नीलमोहर
इश्क़ हुआ, कैसे हुआ
आ चल के तुझे मैं लेके चलूँ,
लो आ गयी उनकी याद, वो नहीं
ये शाम मस्तानी मदहोश किये जाय
ये रेशमी जुल्फें, ये शरबती
ये जो मुहब्बत है ये उनका है
भ घेतो
रात और दिन दिया जले, मेरे मन
हम छोड चले है महफिल को
ना कजरे की धार, ना मोतियों के
ना तुम बेवफा हो, ना हम बेवफा
हमने घर छोडा है रसमो को छोडा
यशोमति मैय्या से पूछे नंदलाला
ये तो सच है की भगवान है
हम इंतज़ार करेंगे
ए ज़िंदगी गले लगा ले
गाता रहे मेरा दिल, तू ही मेरी
तसवीर तेरी दिल में, जिस दिन
मैंने तेरे लिए ही सात रंग के
नैनो मे बदरा छाए, बिजलीसी
एक था गुल और एक थी बुलबुल
थोड़ा है थोड़े की ज़रूरत है
है अगर दुश्मन जमाना गम नही गम
होठों से छू लो तुम
दो दिल मिल रहे है मगर छुपके
येसुदासचे अप्रतिम गाणे
तुतूत्तु तूत्तुतारा
तुम्हे अपना बनाने कि कसम खाई
है अपना दिल तो आवारा
गैरों पे करम, अपनों पे सितम
रहे ना रहे हम
मेरी जिंदगी मै अजनबी का
हाए रे हाए
हाय रे हाय.... हाय
In reply to हाए रे हाए by Gayatri Muley
नूर ए खुदा ~~~
ये लडका हाये अल्ला कैसा है
जब वी मेट
है ना बोलो बोलो
होटोंपे बस तेरा नाम है
अर्जुन (१९८५)
कैसे बताउ मै तुम्हे मेरे लिये तुम कौन (वजुद)
गली गली मे फिरता है तू क्यू
दे दी हमे आझादी बिना खड्ग बिना धाल
गाणी रिपीट होतायत. जवळ जवळ
लाल लाल होठो पे गोरी किसका
सुरुवात वेगळी आहे.
In reply to लाल लाल होठो पे गोरी किसका by भिंगरी
स्वारी
In reply to सुरुवात वेगळी आहे. by प्यारे१
ओ.पी.नय्यर
चुकलं वाटत !ल वरुन ओ पी घ्या.
ओपी बी - ओपीभक्त
हम बे़खुदीमे तुमको पुकारे चले गये
यारी हय विमान मेरा यार मेरी
यारी है इमान मेरा झालय
In reply to यारी हय विमान मेरा यार मेरी by द-बाहुबली
गाता रहे मेरा दिल....
यारो दोस्ती (के के)
कश्मीरकि कली
कितना प्यारा तुझे रब ने बनाया
नूरी नूरी
रामजी की निकली सवारी, रामजी
रामा रामा गजब हुई गवा रे
रोना कभी नही रोना, चाहे टूट
ना ना ना ना
गुमसुम हो क्यूं (गायकः शान)
नील गगनमे उडते बादल आ आ आ
खुदा भी आसमाँ से जब ज़मीं पर
संपादक महोदय
संपादक महोदय
गर तुम भुला न दोगे
छू मतर (ओपी )
नैना बरसे रिमझिम रिमझिम
नया दौर(१९५७ ओपी-फिल्म फेअर)
रोते रोते हसना सीखो, हसते
झाले की नाही मोदक करून खाऊन ?
तू मेरा मै तेरी दुनिया जले तो
लेले लेले लेले मजा ले
लारा लप्पा लारा लप्पा, लाई
१२ बजे (ओपि)
ना तो कारवा की तलाश है, ना तो
एक मुसाफिर एक हसिना ओ.पि.
यारी है इमान मेरा यार मेरी
चला मी जिंकलो... खेळल्याबद्दल
अरे वा, अस कसं?
कभी तू छलिया लगता है
है अपना दिल तो आवारा
गा मेरे मन गा, गा मेरे मन गा
ऊप्स.सॉरी.....
हे घ्या
गुलाम अलींची एक अप्रतिम गझल
कहना ही क्या,