जुनाच पण सदाबहार खेळ !! इच्छुकांनी सहभागी व्हावे......
मेरे मेहबूब कयामत होगी....
आज रुसवा तेरी गलियोमे मोहब्बत होगी...
मे री न ज रे तो गि ला क र ती है....
तेरे दिल को भी सनम तुझसे शिकायत होगी....
पुढचे अक्षर "ग"....
मामय्या केरो केरो केरो मामा
दुनिया माने बुरा तो गोली मारो
डर के जीना है कोई जीना यारो गोली मारो
यारो पे सदा जान करो फिदा
दुश्मन को ये बता दो दुष्मनी है क्या
गली गली मे फिरता है तू क्यू बनके बंजारा
आ मेरे दिल मे बस जा मेरे आशिक आवारा
तेरा प्यार तो एक सोने का पिंजरा हो शहेज़ादी
मुझको अपने जान से प्यारी है अपनी आज़ादी
कितना प्यारा तुझे रब ने बनाया दिल करे देखता रहूं
ओ कितना सोना तुझे रब ने बनाया दिल करे देखता रहूं
तू है पागल तू है जोकर तू है दिलबर जानी
सबसे प्यारा मेरा यारा राजा हिन्दुस्तानी
रामजी की निकली सवारी, रामजी की लीला है न्यारी न्यारी
एक तरफ लक्षमण एक तरफ सीता, बीच मे जगत के पालनहारी
रामजी की निकली सवारी, रामजी की लीला है न्यारी न्यारी
कभी किताबोंमे फूल रखना
कभी दरख्खोंपे नाम लिखना
हमे भी याद आज तक वो
नझर से हर्फ-ए-सलाम लिखना
वो चांद चेहरे वो बेहती बाते
सुलगते दिन थे मेहकती राते
वो छोटे छोटे कागजोंपर
मोहोब्बतों के पयाम लिखना
अर्जुन (१९८५)
कैसे बताउ मै तुम्हे मेरे लिये तुम कौन (वजुद)
गली गली मे फिरता है तू क्यू
दे दी हमे आझादी बिना खड्ग बिना धाल
गाणी रिपीट होतायत. जवळ जवळ
लाल लाल होठो पे गोरी किसका
सुरुवात वेगळी आहे.
स्वारी
ओ.पी.नय्यर
चुकलं वाटत !ल वरुन ओ पी घ्या.
ओपी बी - ओपीभक्त
हम बे़खुदीमे तुमको पुकारे चले गये
यारी हय विमान मेरा यार मेरी
यारी है इमान मेरा झालय
गाता रहे मेरा दिल....
यारो दोस्ती (के के)
कश्मीरकि कली
कितना प्यारा तुझे रब ने बनाया
नूरी नूरी
रामजी की निकली सवारी, रामजी
रामा रामा गजब हुई गवा रे
रोना कभी नही रोना, चाहे टूट
ना ना ना ना
गुमसुम हो क्यूं (गायकः शान)
नील गगनमे उडते बादल आ आ आ
खुदा भी आसमाँ से जब ज़मीं पर
संपादक महोदय
संपादक महोदय
गर तुम भुला न दोगे
छू मतर (ओपी )
नैना बरसे रिमझिम रिमझिम
नया दौर(१९५७ ओपी-फिल्म फेअर)
रोते रोते हसना सीखो, हसते
झाले की नाही मोदक करून खाऊन ?
तू मेरा मै तेरी दुनिया जले तो
लेले लेले लेले मजा ले
लारा लप्पा लारा लप्पा, लाई
१२ बजे (ओपि)
ना तो कारवा की तलाश है, ना तो
एक मुसाफिर एक हसिना ओ.पि.
यारी है इमान मेरा यार मेरी
चला मी जिंकलो... खेळल्याबद्दल
अरे वा, अस कसं?
कभी तू छलिया लगता है
है अपना दिल तो आवारा
गा मेरे मन गा, गा मेरे मन गा
ऊप्स.सॉरी.....
हे घ्या
गुलाम अलींची एक अप्रतिम गझल
कहना ही क्या,