मराठी साहित्य, संस्कृती आणि लेखनाचे व्यासपीठ

चला अंताक्षरी खेळूया....

माम्लेदारचा पन्खा · · जे न देखे रवी...
लेखनविषय:
काव्यरस
जुनाच पण सदाबहार खेळ !! इच्छुकांनी सहभागी व्हावे...... मेरे मेहबूब कयामत होगी.... आज रुसवा तेरी गलियोमे मोहब्बत होगी... मे री न ज रे तो गि ला क र ती है.... तेरे दिल को भी सनम तुझसे शिकायत होगी.... पुढचे अक्षर "ग"....

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दुर्गविहारी 21/09/2015 - 19:22
भुला नही देना जी भुला नही देना जमाना खराब हॅ जमाना खराब हॅ

अनिरुद्ध प्रभू 27/04/2016 - 23:14
ना कजरे की धार, ना मोतियों के हार ना कोई किया सिंगार, फिर भी कितनी सुंदर हो मन में प्यार भरा, और तन में प्यार भरा जीवन में प्यार भरा, तुम तो मेरे प्रियवर हो ह घ्या..... (अंताक्षरी प्रेमी) अनिरुद्ध