चला अंताक्षरी खेळूया....
लेखनविषय:
काव्यरस
जुनाच पण सदाबहार खेळ !! इच्छुकांनी सहभागी व्हावे......
मेरे मेहबूब कयामत होगी....
आज रुसवा तेरी गलियोमे मोहब्बत होगी...
मे री न ज रे तो गि ला क र ती है....
तेरे दिल को भी सनम तुझसे शिकायत होगी....
पुढचे अक्षर "ग"....
वाचने
110781
वाचनखूण
प्रतिक्रिया
457
ना बोले तुम न मैने कुछ कहा
मगर न जाने ऐसा क्यों लगा
लगन (अनंतवेळा म्हणून झाल्यावर) लग गई है, कैसी लगन लगी
ग
गोरी तेरी आखें कहे
रात भर सोयी नही
चदां देखे चुपके कही
और तारे जानते है सभी
भुला नही देना जी भुला नही देना
जमाना खराब हॅ जमाना खराब हॅ
होले होले चलो मेरे साजना
हम भी पिछे है तुम्हारे, जरा होले होले चलो मेरे साजना------
हा ४५६ वा प्रतिसाद म्हणजे.. समद्या मिपाकरांना मिळुन ४५६ युनीक गाणीही अजुन जमली नाहीतनाहीत... छ्या...
ना कजरे की धार, ना मोतियों के हार
ना कोई किया सिंगार, फिर भी कितनी सुंदर हो
मन में प्यार भरा, और तन में प्यार भरा
जीवन में प्यार भरा, तुम तो मेरे प्रियवर हो
ह घ्या.....
(अंताक्षरी प्रेमी)
अनिरुद्ध
ना बोले तुम न मैने कुछ कहा