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Submitted by माम्लेदारचा पन्खा on Sun, 09/13/2015 - 15:59
जुनाच पण सदाबहार खेळ !! इच्छुकांनी सहभागी व्हावे...... मेरे मेहबूब कयामत होगी.... आज रुसवा तेरी गलियोमे मोहब्बत होगी... मे री न ज रे तो गि ला क र ती है.... तेरे दिल को भी सनम तुझसे शिकायत होगी.... पुढचे अक्षर "ग"....

Submitted by गॅरी ट्रुमन on Wed, 09/16/2015 - 17:55

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अर्जुन (१९८५)

मामय्या केरो केरो केरो मामा दुनिया माने बुरा तो गोली मारो डर के जीना है कोई जीना यारो गोली मारो यारो पे सदा जान करो फिदा दुश्मन को ये बता दो दुष्मनी है क्या
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Submitted by नया है वह on Wed, 09/16/2015 - 18:06

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कैसे बताउ मै तुम्हे मेरे लिये तुम कौन (वजुद)

कैसे बताउ मै तुम्हे मेरे लिये तुम कौन हो कैसे कैसे बताउ मै तुम्हे तुम धडकन क गीत हो जीवन क तुम संगीत हो तुम जिंदगी तुम बंदगी
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Submitted by पद्मावति on Wed, 09/16/2015 - 19:32

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गली गली मे फिरता है तू क्यू

गली गली मे फिरता है तू क्यू बनके बंजारा आ मेरे दिल मे बस जा मेरे आशिक आवारा तेरा प्यार तो एक सोने का पिंजरा हो शहेज़ादी मुझको अपने जान से प्यारी है अपनी आज़ादी
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Submitted by दुर्गविहारी on Wed, 09/16/2015 - 20:02

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दे दी हमे आझादी बिना खड्ग बिना धाल

दे दी हमे आझादी बिना खड्ग बिना धाल साबरमती के सन्त तुने कर दिया कमाल
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Submitted by पीके on Wed, 09/16/2015 - 22:35

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गाणी रिपीट होतायत. जवळ जवळ

गाणी रिपीट होतायत. जवळ जवळ १५० तरी रिपीट झालीत .संमं, रिपीट गाणी उडवता येतात का बघा आणि धागा लहान करा...एक चांगलं कलेक्शन तयार होइल...
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Submitted by भिंगरी on Wed, 09/16/2015 - 23:08

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लाल लाल होठो पे गोरी किसका

लाल लाल होठो पे गोरी किसका नाम है
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Submitted by प्यारे१ on गुरुवार, 09/17/2015 - 00:29

In reply to लाल लाल होठो पे गोरी किसका by भिंगरी

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सुरुवात वेगळी आहे.

सुरुवात वेगळी आहे. काली काली आंखोमें गोर गोरे गालोंमे लंबे लंबे बालोंमे गोरी किसका नाम है वगैरे चोरस आहे.
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Submitted by भिंगरी on Fri, 09/18/2015 - 00:13

In reply to सुरुवात वेगळी आहे. by प्यारे१

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स्वारी

स्वारी
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Submitted by दिवाकर कुलकर्णी on गुरुवार, 09/17/2015 - 03:14

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ओ.पी.नय्यर

कोणत्याहि अक्शरावरील ओ पी चं गाणंदेवीू शकतो. हे घ्या र वरील. रात भरका है महिमा अंधेरा किसके रोके रुका है सवेरा पुन्हा र च !
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Submitted by दिवाकर कुलकर्णी on गुरुवार, 09/17/2015 - 03:56

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चुकलं वाटत !ल वरुन ओ पी घ्या.

लाखोंहे है मिगाहों में जिंदगीक् राहोंमें सनम हंसिन जवॉं होंठोंपो गुलाब है आँखओंमों शराब है लेकिन वो बत कहाँ ह
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Submitted by दिवाकर कुलकर्णी on गुरुवार, 09/17/2015 - 04:09

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ओपी बी - ओपीभक्त

थेट आसमान- पासून आरपार,अगदी आरपार!
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Submitted by दुर्गविहारी on गुरुवार, 09/17/2015 - 17:18

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हम बे़खुदीमे तुमको पुकारे चले गये

हम बे़खुदीमे तुमको पुकारे चले गये सागरमे जिन्द्गीको उतारे चले गये
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Submitted by द-बाहुबली on गुरुवार, 09/17/2015 - 17:32

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यारी हय विमान मेरा यार मेरी

यारी हय विमान मेरा यार मेरी जिंदगी.
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Submitted by मारवा on गुरुवार, 09/17/2015 - 17:42

In reply to यारी हय विमान मेरा यार मेरी by द-बाहुबली

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यारी है इमान मेरा झालय

हे गाण झालय
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Submitted by भैड्या on गुरुवार, 09/17/2015 - 17:45

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गाता रहे मेरा दिल....

गाता रहे मेरा दिल.... लाल लाल होटोपे गोरी किसका नाम है? हायहुक हायहुक हायहाय.. याराओ यारा मिलना हमारा जाने क्या रंग लायेगा? गाता रहे मेरा दिल....
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Submitted by नया है वह on गुरुवार, 09/17/2015 - 18:16

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यारो दोस्ती (के के)

यारो दोस्ती बडी ही हसीन है ये ना हो तो क्या फीर बोलो ये जिंदगी है.
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Submitted by दिवाकर कुलकर्णी on गुरुवार, 09/17/2015 - 20:37

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कश्मीरकि कली

है दुनिया उसिकी जमाना उसिका मोहोब्बतमें हो हो गया हो गया हो किसिका
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Submitted by पद्मावति on गुरुवार, 09/17/2015 - 21:28

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कितना प्यारा तुझे रब ने बनाया

कितना प्यारा तुझे रब ने बनाया दिल करे देखता रहूं ओ कितना सोना तुझे रब ने बनाया दिल करे देखता रहूं तू है पागल तू है जोकर तू है दिलबर जानी सबसे प्यारा मेरा यारा राजा हिन्दुस्तानी
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Submitted by प्यारे१ on गुरुवार, 09/17/2015 - 22:22

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नूरी नूरी

नूरी नूरी आ जा रे आ जा ओ मेरे दिलबर आ जा दिल की प्यास बुझा जा रे आ जा रे
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Submitted by पद्मावति on Fri, 09/18/2015 - 00:14

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रामजी की निकली सवारी, रामजी

रामजी की निकली सवारी, रामजी की लीला है न्यारी न्यारी एक तरफ लक्षमण एक तरफ सीता, बीच मे जगत के पालनहारी रामजी की निकली सवारी, रामजी की लीला है न्यारी न्यारी
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Submitted by भिंगरी on Fri, 09/18/2015 - 00:34

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रामा रामा गजब हुई गवा रे

रामा रामा गजब हुई गवा रे
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Submitted by पद्मावति on Fri, 09/18/2015 - 10:14

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रोना कभी नही रोना, चाहे टूट

रोना कभी नही रोना, चाहे टूट जाये कोई खिलोना सोना चुपके से सोना, चाहे टूट जाये सपना सलोना
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Submitted by भिंगरी on Fri, 09/18/2015 - 10:40

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ना ना ना ना

ना ना ना ना मेरी बेरी के बेर मत तोडो कोई काटा चुभ जायेगा.
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Submitted by नया है वह on Fri, 09/18/2015 - 14:33

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गुमसुम हो क्यूं (गायकः शान)

गुमसुम हो क्यूं पास आओ ना रुठे हो क्यूं मान जाओ ना
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Submitted by दुर्गविहारी on Fri, 09/18/2015 - 19:59

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नील गगनमे उडते बादल आ आ आ

नील गगनमे उडते बादल आ आ आ धुपमे जलता खेत हमारा करदे तु छाया छुपे हुए ओ चन्चल पन्छी जा जा जा देख अभी हॅ कच्चा दाना पक जाए तु खा
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Submitted by द-बाहुबली on Fri, 09/18/2015 - 20:28

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खुदा भी आसमाँ से जब ज़मीं पर

खुदा भी आसमाँ से जब ज़मीं पर देखता होगा मेरे महबूब को किसने बनाया सोचता होगा...
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Submitted by पीके on Fri, 09/18/2015 - 21:41

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संपादक महोदय

संपादक महोदय हे डबल डबल का येत माहीत नाही कुठे चुक होते कळत नाही कृपया या विनंती प्रतिसादा सहीत सर्व डबल आलेले प्रतिसाद काढुन टा
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Submitted by पीके on Fri, 09/18/2015 - 21:42

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संपादक महोदय

संपादक महोदय हे डबल डबल का येत माहीत नाही कुठे चुक होते कळत नाही कृपया या विनंती प्रतिसादा सहीत सर्व डबल आलेले प्रतिसाद काढुन टा
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Submitted by नीलमोहर on Fri, 09/18/2015 - 22:16

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गर तुम भुला न दोगे

गर तुम भुला न दोगे सपने ये सच ही होंगे हम तुम जुदा न होंगे..
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Submitted by दिवाकर कुलकर्णी on Fri, 09/18/2015 - 22:47

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छू मतर (ओपी )

गरीब जानके हमको न तुम मिटा देना गरीब जानके तुम्ही ने दरेद दिया है तुम्ही दवा देना , तुम्ही ने
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Submitted by नीलमोहर on Fri, 09/18/2015 - 22:53

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नैना बरसे रिमझिम रिमझिम

नैना बरसे रिमझिम रिमझिम नैना बरसे
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Submitted by दिवाकर कुलकर्णी on Fri, 09/18/2015 - 23:30

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नया दौर(१९५७ ओपी-फिल्म फेअर)

साथी हैथ बढाना साथी रे साथी हाथ बढाना साथी रे एक अकेला थक जायेगा मिल कर हाथ बढाना साथी हाथ बढाना साथी हाथ बढाना साथी रे
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Submitted by पद्मावति on Sat, 09/19/2015 - 01:00

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रोते रोते हसना सीखो, हसते

रोते रोते हसना सीखो, हसते हसते रोना जितनी चाबी भरी रामने, उतना चले खिलोना रोते रोते हसना सीखो, हसते हसते रोना
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Submitted by रातराणी on Sat, 09/19/2015 - 13:02

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झाले की नाही मोदक करून खाऊन ?

झाले की नाही मोदक करून खाऊन ? इकडं एवढी शांतता कशी काय? चला न चं नवीन नवीन गाणं आता :) नही सामने तू ये अलग बात है मेरे पास है तू मेरे साथ है तू
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Submitted by पद्मावति on Sat, 09/19/2015 - 13:17

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तू मेरा मै तेरी दुनिया जले तो

तू मेरा मै तेरी दुनिया जले तो जले तू मेरा मै तेरी दुनिया जले तो जले ना ना , ना ना दिल तेरा ये जान मेरी दुनिया जले तो जले
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Submitted by नीलमोहर on Sat, 09/19/2015 - 14:35

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लेले लेले लेले मजा ले

लेले लेले लेले मजा ले आजका जमके मजा ले
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Submitted by पद्मावति on Sat, 09/19/2015 - 14:46

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लारा लप्पा लारा लप्पा, लाई

लारा लप्पा लारा लप्पा, लाई रखदा आडिटप्पा, आडिटप्पा लाई रखदा हो..., देखर झुटे लारे लारा लप्पा लारा लप्पा, लाई रखदा आडिटप्पा, आडिटप्पा लाई रखदा
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Submitted by दिवाकर कुलकर्णी on Sat, 09/19/2015 - 22:31

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१२ बजे (ओपि)

देख इधर ओ हसिना जून का है महिना डाल जुल्फोका का साया आ रहा है पसिना
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Submitted by पद्मावति on Sun, 09/20/2015 - 18:17

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ना तो कारवा की तलाश है, ना तो

ना तो कारवा की तलाश है, ना तो हम सफ़र की तलाश है मेरे शौक-ए-खाना खराब को, तेरी रेहगूजर की तलाश है ना तो कारवा की तलाश है, ना तो हम सफ़र की तलाश है
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Submitted by दिवाकर कुलकर्णी on Sun, 09/20/2015 - 21:28

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एक मुसाफिर एक हसिना ओ.पि.

हमको तुम्हरे इष्कने क्या क्या बना दिया जब कुछ न बन सके तो तमाश ा बना दिया
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Submitted by नीलमोहर on Mon, 09/21/2015 - 11:05

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यारी है इमान मेरा यार मेरी

यारी है इमान मेरा यार मेरी जिंदगी
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Submitted by द-बाहुबली on Mon, 09/21/2015 - 14:34

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चला मी जिंकलो... खेळल्याबद्दल

चला मी जिंकलो... खेळल्याबद्दल सर्वांचे आभार्स. माझे यश सर्वस्वी तुमचेच आहे.
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Submitted by पद्मावति on Mon, 09/21/2015 - 15:11

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अरे वा, अस कसं?

आम्ही अजुन गिव अप नाही केलंय काही. हे घ्या पुढचं गाणं गा मेरे मन गा, गा मेरे मन गा तू गा मेरे मन गा, गा मेरे मन गा यूँ ही बिताये जा दिन जिंदगी के
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Submitted by गॅरी ट्रुमन on Mon, 09/21/2015 - 15:20

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कभी तू छलिया लगता है

कभी तू छलिया लगता है कभी दिवाना लगता है कभी अनाडी लगता है कभी आवारा लगता है तू जो अच्छा समझे ये तुझपे छोडा है तुझसे जीवनभरका मैने नाता जोडा है
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Submitted by नीलमोहर on Mon, 09/21/2015 - 15:25

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है अपना दिल तो आवारा

है अपना दिल तो आवारा न जाने किसपे आएगा
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Submitted by पद्मावति on Mon, 09/21/2015 - 15:31

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गा मेरे मन गा, गा मेरे मन गा

गा मेरे मन गा, गा मेरे मन गा तू गा मेरे मन गा, गा मेरे मन गा यूँ ही बिताये जा दिन जिंदगी के
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Submitted by पद्मावति on Mon, 09/21/2015 - 15:32

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ऊप्स.सॉरी.....

ऊप्स.सॉरी.....
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Submitted by पद्मावति on Mon, 09/21/2015 - 15:35

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हे घ्या

गरजत बरसत सावन आयो रे गरजत बरसत सावन आयो रे लायो ना संग मे हमारे बिछड़े बालमवा सखी क्या करू हाए
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Submitted by गॅरी ट्रुमन on Mon, 09/21/2015 - 15:37

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गुलाम अलींची एक अप्रतिम गझल

कभी किताबोंमे फूल रखना कभी दरख्खोंपे नाम लिखना हमे भी याद आज तक वो नझर से हर्फ-ए-सलाम लिखना वो चांद चेहरे वो बेहती बाते सुलगते दिन थे मेहकती राते वो छोटे छोटे कागजोंपर मोहोब्बतों के पयाम लिखना
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Submitted by नीलमोहर on Mon, 09/21/2015 - 15:38

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कहना ही क्या,

कहना ही क्या, ये नैन एक अंजान से जो मिले चलने लगे मोहब्बत के जैसे ये सिलसिलें
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