मराठी साहित्य, संस्कृती आणि लेखनाचे व्यासपीठ

चला अंताक्षरी खेळूया....

माम्लेदारचा पन्खा · · जे न देखे रवी...
लेखनविषय:
काव्यरस
जुनाच पण सदाबहार खेळ !! इच्छुकांनी सहभागी व्हावे...... मेरे मेहबूब कयामत होगी.... आज रुसवा तेरी गलियोमे मोहब्बत होगी... मे री न ज रे तो गि ला क र ती है.... तेरे दिल को भी सनम तुझसे शिकायत होगी.... पुढचे अक्षर "ग"....

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In reply to by संजय पाटिल

प्यारे१ 14/09/2015 - 12:12
क्या यारो, ना जाओ सैय्या म्हणा मनातल्या मनात कसम तुम्हारी मैं रो पडूँगी रो पडूँगी म्हणले ना? आलं का ग?

संजय पाटिल 14/09/2015 - 12:11
ना जाओ सैय्या छुड़ा के बईया, कसम तुम्हारी, मै रो पडुंगी.. रो पडुंगी. ग
गीत गाता हूँ मैं, गुनगुनाता हूँ मैं मैने हँसने का वादा किया था कभी इसलिए अब सदा मुस्कुराता हूँ मैं ये मोहब्बत के पल कितने अनमोल हैं कितने फूलों से नाज़ूक मेरे बोल हैं सब को फूलों की माला पहनाता हूँ मैं मुस्कुराता हूँ मैं ... रोशनी होगी इतनी किसे थी खबर मेरे मन का ये दर्पण गया है निखर साफ़ है अब ये दर्पण दिखाता हूँ मैं मुस्कुराता हूँ मैं ... म

In reply to by द-बाहुबली

गज़ब का है दिन सोचो ज़रा, ये दीवानापन देखो ज़रा तुम हो अकेले, हम भी अकेले, मज़ा आ रहा है, कसम से देख लो हमको करीब से, आज हम मिले हैं नसीब से ये पल फिर कहाँ और ये मंज़िल फिर कहाँ क्या कहूँ मेरा जो हाल है, रात दिन तुम्हारा ख़याल है फिर भी जान-ए-जां, मैं कहाँ और तुम कहाँ काहीही ह श्री ह

द-बाहुबली 14/09/2015 - 12:47
लाल छड़ी मैदान खड़ी क्या खूब लड़ी क्या खूब लड़ी हम दिल से गये, होय्य्य्य्य्य्य्य्य्य्य्य... हम दिल से गये, हम जान से गये बस आँख मिली और बात बढ़ी. लाल छड़ी मैदान खड़ी क्या खूब लड़ी क्या खूब लड़ी

In reply to by द-बाहुबली

डम डम डिगा डिगा, मौसम भीगा भीगा बिन पिये मैं तो गिरा, मैं तो गिरा, मैं तो गिरा, हाए अल्ला सूरत आप की सुभान अल्ला तेरी अदा वाह वाह क्या बात है अखियाँ झुकी झुकी, बातें रुकी रुकी देखो कोई रे आज लूट गया, हाए अल्ला ... सनम हम माना गरीब है नसीबा खोटा सही, बंदा छोटा सही दिल ये खज़ाना है प्यार का, हाए अल्ला ... तेरी कसम तू मेरी जान है मुखड़ा भोलाभाला, छूपके डाका डाला जाने तू कैसी मेहमान है, हाए अल्ला ... फिरसे ले ल

In reply to by मारवा

द-बाहुबली 14/09/2015 - 13:03
लडकी है क्या रे बाबा उसकी अदा रे बाबा उसका नशा रे बाबा रेबाबा रेबाबा रेबाबा बाबा बाबा बाबा (जी की जय)

In reply to by द-बाहुबली

बाहों के दरमियाँ, दो प्यार मिल रहे है जाने क्या बोले मन, डोले सुन के बदन, धड़कन बनी ज़ुबां खुलते बंद होते, लबो की ये अनकही मुझ से कह रही है के बढ़ने दे बेखुदी मिल यूँ के दौड़ जाए, नस नस में बिजलियाँ आसमान को भी ये हसीं राज है पसंद उलझी उलझी साँसों की आवाज है पसंद मोती लूटा रही है सावन की बदलियाँ य

In reply to by मारवा

द-बाहुबली 14/09/2015 - 13:11
ये रातें, ये मौसम, नदी का किनारा, ये चंचल हवा कहा दो दिलों ने, के मिलकर कभी हम ना होंगे जुदा... ये क्या बात है, आज की चाँदनी में के हम खो गये, प्यार की रागनी में ये बाहों में बाहें, ये बहकी निगाहें लो आने लगा जिंदगी का मज़ा ये रातें, ये मौसम, नदी का किनारा, ये चंचल हवा कहा दो दिलों ने, के मिलकर कभी हम ना होंगे जुदा.

रातराणी 14/09/2015 - 13:11
बड़ी मुश्कील है खोया मेरा दिल है कोई उसे ढूँढके लाये ना जाके कहाँ मैं रपट लिखाउ कोई बतलाये ना मैं रोउ यां हसू करू मैं क्या करू र

In reply to by रातराणी

हमें तुम से प्यार कितना, ये हम नहीं जानते मगर जी नहीं सकते, तुम्हारे बिना सुना गम जुदाई का उठाते हैं लोग जाने जिन्दगी कैसे बिताते हैं लोग दिन भी यहाँ तो लगे बरस के समान हमें इंतज़ार कितना ये हम नहीं जानते मगर जी नहीं सकते, तुम्हारे बिना तुम्हें कोई और देखे तो जलता है दिल बड़ी मुश्किलों से फिर संभलता है दिल क्या, क्या जतन करते हैं तुम्हे क्या पता ये दिल बेकरार कितना ये हम नहीं जानते मगर जी नहीं सकते, तुम्हारे बिना न

रातराणी 14/09/2015 - 13:25
न जाने क्यूं होता है ये जिंदगीके साथ अचानक ये मन किसीके जाने के बाद करे फिर उसकी याद छोटी छोटी सी बात न जाने क्यूं य घ्या

In reply to by मारवा

द-बाहुबली 14/09/2015 - 13:34
रुक जाना नही.. तु कही हारके कांटोसे चलके मिलेंगे सायें बहार के.. ओ राही ओराही. ओ राही ओराही. ह

In reply to by द-बाहुबली

हमें तोह लुट लिया मिल के हुस्नवालो ने काले काले बालो ने, गोरे गोरे गालो ने नजर में शोकिया और बचपना शरारत में अदाए देखके हम फँस गए मोहब्बत में हम अपनी जान से जायेंगे जिनकी उल्फत में यकीन है की ना आएंगे वोह ही मैयत में तोह हम भी कह देंगे, हम लुट गए शराफत में वही वही पे क़यामत हो वोह जिधर जाये झुकी झुकी हुयी नजरो से कम कर जाये तडपता छोड़ दे रस्ते में और गुजर जाये सितम तोह यह है की दिल ले ले और मुकर जाये समझ में कुछ नहीं आता की हम किधर जाये यही इरादा है यह कहके हम तोह मर जाये वफ़ा के नाम पे मारा है बेवफाओ ने की दम भी हमको ना लेने दिया जफ़ाओ ने खुदा भुला दिया इन हुस्न के खुदाओ ने मिटा के छोड़ दिया इश्क की खताओ ने उडाये होश कभी जुल्फ की हवा ने हयाए नाज़ ने लुटा कभी अदाओ ने हजार लुट गए नजरो के इक इशारे पर हजारो बह गए तूफान बनके धारे पर ना इनके वादों का कुछ ठीक है ना बातो का फ़साना होता है इनका हजार रातो का बहुत हसीन है वैसे तोह भोलापन इनका भरा हुवा है मगर ज़हर से बदन इनका यह जिसको काट ले पानी वोह पी नहीं सकता दावा तोह क्या है दुआ से भी जी नहीं सकता इन्हीं के मारे हुए हम भी हैं ज़माने में है चार लफ्ज़ मोहब्बत के इस फ़साने में जमाना इनको समझता है नेक और मासूम मगर यह कहते हैं क्या है किसीको क्या मालूम इन्हें ना तीर ना तलवार की जरुरत है शिकार करने को काफी निगाहे उल्फत हैं हसीन चाल से दिल पायमाल करते हैं नजर से करते हैं बातें कमाल करते हैं हर एक बात में मतलब हजार होते हैं यह सीधे सादे बड़े होशियार होते हैं खुदा बचाए हसीनो की तेज चलो से पड़े किसी का भी पाला ना हुस्न वालो से हुस्नवालो में मोहब्बत की कमी होती है चाहनेवालो की तक़दीर बुरी होती है इनकी बातो में बनावट ही बनावट देखी शर्म आँखों में निगाहों में लगावट देखी आग पहले तोह मोहब्बत की लगा देते हैं अपनी रुकसार का दीवाना बना देते हैं दोस्ती कर के फिर अंजन नजर आते हैं सच तोह यह है की बेईमान नजर आते हैं मौत से कम नहीं दुनिया में मुहब्बत इनकी जिन्दगी होती बरबाद बदौलत इनकी दिन बहारो के गुजरते हैं मगर मर मरके लुट गए हम तोह हसीनो पे भरोसा कर के क घ्या क

In reply to by रातराणी

गुनगुना रहे हैं भँवरें, खिल रही हैं कली कली गली गली, कली कली ज़रा देखो सजन बेईमान भँवरा कैसे मुस्काये हाए, कली यूँ शरमाये, घूघंट में गोरी जैसे छुप जाये रुत ऐसी हाय कैसी, ये पवन चली गली गली किसी को क्या कहे, हम दोनो भी हैं देखो कुछ खोये ओये, हुआ क्या ओये ओये, जागे जिया में अरमान सोये रुत ऐसी हाय कैसी, ये पवन चली गली गली सुनो, पास ना आओ, कली के बहाने प्यार ना जताओ जाओ, चलो बात ना बनाओ, भँवरें के बहाने आँख ना लड़ाओ रुत ऐसी हाय कैसी, ये पवन चली गली गली ल घ्या ल

रातराणी 14/09/2015 - 13:52
लड़की बड़ी अनजानी है सपना है सच है कहानी है देखो ये पगली बिल्कुल ना बदली ये तो वही दीवानी है

रातराणी 14/09/2015 - 14:02
गलीमे मारे फेरे पास आनेको मेरे कभी परख्ता नैन मेरे तो कभी परख्ता तोल अंबरसरीया मुन्डेया वे कच्ची कलियाँ ना तोड़ तेरी माँने बोले है मुझे तिखेसे बोल

In reply to by ज्ञानोबाचे पैजार

मारवा 14/09/2015 - 14:38
गली में मारे फीरे पास आने को मेरे कभी फड़कता नैन मेरे तो कभी फड़कता तोरे कभी फड़कता नैन मेरे तो कभी फड़कता तोरे अम्बरसरिया..मुंडयावे कचिया कलियाँ ना तोड़ अम्बरसरिया..मुंडयावे कचिया कलियाँ ना तोड़ तेरे माँ ने बोले हैं मुझे तीखे से बोल तेरे माँ ने बोले हैं मुझे तीखे से बोल अम्बरसरिया.. हो अम्बरसरिया.. गोर गोर मेरे कलाई गोर गोर मेरे कलाई चूड़ियाँ काली काली मैं शर्माती रोज़ लगाती काजल सुरमा लाली नहीं मैं सुरमा पाडा रूप ना मैं चमकाना नहीं मैं सुरमा पाडा रूप ना मैं चमकाना नैन नशीली हूँ अगर तो सुरमे दी की लोड अम्बरसरिया..मुंडयावे कचिया कलियाँ ना तोड़ अम्बरसरिया..मुंडयावे कचिया कलियाँ ना तोड़ तेरे मान ने बोले हैं मुझे तीखे से बोल तेरे मान ने बोले हैं मुझे तीखे से बोल अम्बरसरिया.. अम्बरसरिया
ये हसीन वादियां, ये खुला आसमां आ गये हम कहाँ ऐ मेरे साजना इन बहारों में दिल की कली खिल गयी मुझ को तुम जो मिले हर खुशी मिल गयी तेरे होठों पे हैं, हुस्न की बिजलियाँ तेरे गालों पे हैं, जुल्फ की बदलियाँ तेरे दामन की खुशबू से महके चमन संगेमरमर के जैसा ये तेरा बदन मेरी जान-ए-जां, मैं तेरी चाँदनी छेड़ लो तुम आज कोई प्यार की रागिनी ये हसीन वादियां, ये खुला आसमां आ गये हम कहाँ, ऐ मेरे साजना ये बंधन है प्यार का, देखो टूटे ना सजनी ये जन्मों का साथ है, देखो छूटे ना सजना तेरे आँचल की छाँव के तले मेरी मंज़िल मुझे मिल गयी तेरी पलकों की छाँव के तले मोहब्बत मुझे मिल गयी जी करता है साजना, दिल में तुम को बिठा लूँ आ मस्ती की रात में, अपना तुम को बना लूँ उठने लगे हैं तूफान क्यो, मेरे सीने में ऐ सनम तुम्हे चाहूँगा दिल-ओ-जान से, मेरी जान-ए-जान तेरी कसम म

नीलमोहर 14/09/2015 - 14:46
साजना 'न' येतोय न तुम हमें जानो न हम तुम्हे जाने मगर लगता है कुछ ऐसा मेरा हमदम मिल गया

नीलमोहर 14/09/2015 - 14:52
साजना 'न' येतोय न तुम हमें जानो न हम तुम्हे जाने मगर लगता है कुछ ऐसा मेरा हमदम मिल गया

In reply to by मारवा

गॅरी ट्रुमन 14/09/2015 - 14:58
तेरे दर पर सनम चले आये तू ना आया तो हम चले आये बीन तेरे कोई आस भी ना रही इतने तरसे के प्यास भी ना रही लडखडाये कदम, चले आये (अक्षरः य)

In reply to by नीलमोहर

गॅरी ट्रुमन 14/09/2015 - 14:57
ये जो थोडेसे है पैसे खर्च तुमपर करू कैसे अगर कही दुकान होती जहा पे मिलते गगन के तारे मै सारे तारे खरीद लेता तुम्हारे आंचल मै टांक देता मगर क्या करू की मै ये जानता हू तारे मिलते नही ऐसे ये जो थोडेसे है पैसे खर्च तुमपर करू कैसे अक्षरः (स)

In reply to by रातराणी

गॅरी ट्रुमन 14/09/2015 - 15:03
हम ने तुम को देखा, तुम ने हम को देखा, ऐसे हम तुम सनम, सातो जनम, मिलते रहे हो जैसे आँखों का रह रह के मिलना, मिल के झुक जाना कर देती हैं यही अदाए, दिल को दीवाना हुआ यूँ सामना, पडा दिल थामना अक्षर-- (न)

पद्मावति 14/09/2015 - 15:17
गरजत बरसत सावन आयो रे, गरजत बरसत सावन आयो रे लायो न संग में, हमरे बिछड़े बलमवा सखी का करूं हाय, गरजत बरसत सावन आयो रे गरजत बरसत सावन आयो रे सावन आयो, सावन आयो रे गरजत बरसत सावन

केदार-मिसळपाव 14/09/2015 - 15:18
आजा रे आजारे मेरे दिलबर आजा दिल की प्यास बुझाझा रे.. र घ्या..

In reply to by Gayatri Muley

गॅरी ट्रुमन 14/09/2015 - 15:34
गोरी तेरा गाँव बड़ा प्यारा, मैं तो गया मारा, आ के यहा रे उस पर रूप तेरा सादा, चंद्रमा ज्यों आधा, आधा जवान रे जी करता हैं, मोर के पाँव में पायलियाँ पहना दूँ कूहू कूहू गाती कोयलियाँ को, फूलों का गहना दूँ यही घर अपना बनाने को, पंछी करे देखो, तिनकें जमा रे (अक्षर-- र)

In reply to by मारवा

नीलमोहर 14/09/2015 - 15:37
न जाने क्यूं होता है ये जिंदगी के साथ अचानक ये मन किसी के जाने के बाद करे फिर उसकी याद छोटी छोटीसी बात न जाने क्यूं..
रात कली एक ख्वाब में आई और गले का हार हुई सुबह को जब हम नींद से जागे, आँख तुम ही से चार हुई चाहे कहो इसे मेरी मोहब्बत, चाहे हँसी में उड़ा दो ये क्या हुआ मुझे मुझको खबर नहीं, हो सके तुम ही बता दो तुम ने कदम तो रखा जमीन पर, सीने में क्यों झंकार हुई ई

रातराणी 14/09/2015 - 15:42
गल मीठी मीठी बोल रस कानोमे तू घोल बजने दे ताशे ढोल मस्तीमे तूभी डोल मन के नैना तू खोल चाहत के मोती रोल दिल होता है अनमोल ये दौलतसे ना तोल ओ सोनी तेनू चांद की मैं चूड़ी पेहनावा. हुश्श खूप खेळले आज. मज्जा आली.

पद्मावति 14/09/2015 - 15:43
ये लम्हे, ये पल हम बरसों याद करेंगे ये मौसम चले गये तो हम फर्याद करेंगे इन सपनों की तस्वीरों से, इन यादों की जंजीरों से अपने दिल को कैसे हम आझाद करेंगे ये मौसम चले गये तो हम फर्याद करेंगे

गॅरी ट्रुमन 14/09/2015 - 15:49
मेरे नैना सावन भादो फिर भी मेरा मन प्यासा बात पुरानी है, एक कहानी है अब सोचूं तुम्हे याद नहीं है, अब सोचूं नहीं भूलें वो सावन के झूलें रुत आये रुत जाये दे के झूठा एक दिलासा बरसों बीत गये, हम को मिले बिछड़े बिजुरी बन के गगन पे चमकी बीते समय की रेखा मैंने तुमको देखा तड़प तड़प के इस बिरहन को आया चैन जरासा स

In reply to by गॅरी ट्रुमन

बॅटमॅन 14/09/2015 - 15:52
साथियाऽऽऽ हो...साथियाऽऽऽ हो... मद्धम मद्धम तेरी गीली हसी.... हस्ती रहे तू हस्ती रहे, हया की लाली खिलती रहे, जुल्फों के नीचे गरदन पे, स्बहोशाम खिलती रहे... सोणिसी हसी तेरी, मिलती रहे मिलती रहे... (थोड्याफार चूभूदेघे, तरी लिरिक्स बाकी अचूक आहे.) पुढील अक्षर ह.

In reply to by गॅरी ट्रुमन

साथिया ये तुने क्या कहा, बेलिया ये तुने क्या कहा यूँ ना कभी करना इंतज़ार मैंने किया है तुमसे प्यार मैंने किया है तुमसे प्यार र

In reply to by पद्मावति

बॅटमॅन 14/09/2015 - 15:54
न जाने मेरे... दिलको क्या... होगया.... अभी तो यहीं...था कहीं.... खोगया.... अरे होगया है तुझको तो प्यार सजना लाख करले तू इनकार सजना हय ये प्यार सजना.... न

Gayatri Muley 14/09/2015 - 15:55
मेला दिलों का आता है इक बार आके चला जाता है आते हैं मुसाफिर जाते हैं मुसाफिर जाना ही है उनको क्यों आते हैं मुसाफिर मेला दिलों का … क

In reply to by Gayatri Muley

बॅटमॅन 14/09/2015 - 15:59
कबसे आये हैं तेरे दुल्हे राजा... अब देर नाऽऽ कर तू जल्दी आजा... ऐ दिल..चलेगा अब ना कोई बहाना गोरी को होगा अब साजन के घर जाना माथेऽ की बिंदियां क्या बोले हैं सुन्सुन्सुन्सुन.... साजन्जी घर आये, साजन्जी घर आये, दुल्हन क्यूं शरमाये, साजन्जी घर आये... य.