मराठी साहित्य, संस्कृती आणि लेखनाचे व्यासपीठ

चला अंताक्षरी खेळूया....

माम्लेदारचा पन्खा · · जे न देखे रवी...
लेखनविषय:
काव्यरस
जुनाच पण सदाबहार खेळ !! इच्छुकांनी सहभागी व्हावे...... मेरे मेहबूब कयामत होगी.... आज रुसवा तेरी गलियोमे मोहब्बत होगी... मे री न ज रे तो गि ला क र ती है.... तेरे दिल को भी सनम तुझसे शिकायत होगी.... पुढचे अक्षर "ग"....

वाचने 110781 वाचनखूण प्रतिक्रिया 457

मारवा 14/09/2015 - 15:57
रात के हमसफ़र, थक के घर को चले झूमती आ रही, हैं सुबह प्यार की देख कर सामने रूप की रौशनी फिर लूटी जा रही, हैं सुबह प्यार की क

मारवा 14/09/2015 - 15:58
रात के हमसफ़र, थक के घर को चले झूमती आ रही, हैं सुबह प्यार की देख कर सामने रूप की रौशनी फिर लूटी जा रही, हैं सुबह प्यार की क

गॅरी ट्रुमन 14/09/2015 - 16:11
कहीं दूर जब दिन ढल जाए साँझ की दुल्हन बदन चुराए, चुपके से आए मेरे ख़यालों के आँगन में, कोई सपनों के दीप जलाए कभी यूँ ही जब हुई बोझल साँसे भर आई बैठे बैठे जब यूँ ही आँखे तभी मचल के, प्यार से चल के छूए कोई मुझे पर नज़र ना आए, नज़र ना आए (ए) :)

In reply to by गॅरी ट्रुमन

बॅटमॅन 14/09/2015 - 16:34
यायिरे...यायिरे... जोर्लगाके नाच्चे रे... चल मेरे संगं संगं, लेले दुनिया के रंग, होजा रंगीला रे....रंगनरंगीला रे... र.

In reply to by बॅटमॅन

गॅरी ट्रुमन 14/09/2015 - 16:51
http://geetmanjusha.com/ या साईटीवर देवनागरीतूनही लिरिक्स मिळतात. मी सगळे लिरिक्स तिथूनच भराभर चोप्य-पस्ते करत आहे :)

In reply to by प्यारे१

बॅटमॅन 14/09/2015 - 16:23
राहों में उनसे मुलाकात हो गयी... जिसे डरते थे...वही बात हो गयी.... आहाहाहाहाहा....आहाहा हाहा...(मोजलेत बरं का) ह =))

In reply to by प्यारे१

रात का नशा अभी आँख से गया नहीं तेरा नशिला बदन, बाहों ने छोडा नहीं आँखें तो खोली मगर, सपना वो तोडा नहीं साँसों पे रखा हुआ तेरे होठों का सपना अभी हैं वही तेरे बिना भी कभी तुझ से मचल लेती हूँ करवटें बदलती हूँ तो सपना बदल लेती हूँ तेरा खयाल आए तो, बल खाँके पल जाता है पानी की चादर तले तन मेरा जल जाता है साँसों पे रखा हुआ तेरे होठों का सपना अभी है वही तेरे गले मिलने के मौसम बडे होते हैं जन्मों का वादा कोई, ये गम बडे छोटे हैं लंबी सी एक रात हो, लंबा सा एक दिन मिले बस इतना सा जीना हो मिलन की घडी जब मिले साँसों पे रखा हुआ तेरे होठों का सपना अभी है वही ह

In reply to by मारवा

गॅरी ट्रुमन 14/09/2015 - 16:31
हमें तुम से प्यार कितना, ये हम नहीं जानते मगर जी नहीं सकते, तुम्हारे बिना सुना गम जुदाई का उठाते हैं लोग जाने जिन्दगी कैसे बिताते हैं लोग दिन भी यहाँ तो लगे बरस के समान हमें इंतज़ार कितना ये हम नहीं जानते मगर जी नहीं सकते, तुम्हारे बिना न

ज्ञानोबाचे पैजार 14/09/2015 - 16:29
ए क्या बोलती तू?हाँ तुम्हें तुम्हें तुम्हें हम चाहते हैं देखो ना तुम से दूर जा कर तुम्हारे पास आते हैं कौन मैं हाँ तुम बस तुम ओफ़्फ़ो फ घ्या

In reply to by ज्ञानोबाचे पैजार

ज्ञानोबाचे पैजार 14/09/2015 - 16:29
हाँ तुम्हें तुम्हें तुम्हें हम चाहते हैं देखो ना तुम से दूर जा कर तुम्हारे पास आते हैं कौन मैं हाँ तुम बस तुम ओफ़्फ़ो फ घ्या

In reply to by ज्ञानोबाचे पैजार

गॅरी ट्रुमन 14/09/2015 - 16:59
फज़ा भी है जवाँ, जवाँ, हवा भी है रवाँ, रवाँ सुना रहा है ये समा, सुनी सुनी सी दास्ताँ पुकारते हैं दूर से, वो काफिले बहार के बिखर गये हैं रंग से, किसी के इंतजार के लहर लहर के होंठोंपर, वफ़ा की हैं कहानियाँ बुझी मगर बुझी नहीं, न जाने कैसी प्यास है करार दिल से आज भी, ना दूर है ना पास है ये खेल धूंप-छाँव का, ये करवटें, ये दूरियाँ हर एक पल को ढूंढता, हर एक पल चला गया हर एक पल फिराक का, हर एक पल विसाल का हर एक पल गुजर गया, बना के दिल पे एक निशाँ निकाह चित्रपटातील गाणे मला फारच आवडते. म्हणून लिरिक्स सगळे दिले आहेत आणि व्हिडिओ पण एम्बेड करत आहे. पुढील अक्षर--- श

In reply to by बॅटमॅन

गॅरी ट्रुमन 14/09/2015 - 16:37
गीत गाता हूँ मैं, गुनगुनाता हूँ मैं मैने हँसने का वादा किया था कभी इसलिए अब सदा मुस्कुराता हूँ मैं ये मोहब्बत के पल कितने अनमोल हैं कितने फूलों से नाज़ूक मेरे बोल हैं सब को फूलों की माला पहनाता हूँ मैं मुस्कुराता हूँ मैं ... म

In reply to by गॅरी ट्रुमन

बॅटमॅन 14/09/2015 - 16:41
मुक्काला मुक्काबला लैला...ओहो लैला.. अपना काफिला...जब प्यार से चला..लोगोंका दिल मिला..(इथले विसरलो) मोहब्बत का यही सिलसिला..ओएओ... ल घ्या.

In reply to by बॅटमॅन

गॅरी ट्रुमन 14/09/2015 - 16:45
लिखे जो खत तुझे, वो तेरी याद में हज़ारो रंग के नज़ारे बन गये सवेरा जब हुआ, तो फूल बन गये जो रात आई तो सितारें बन गये कोई नग्मा कहीं गूंजा, कहा दिल ने ये तू आई कहीं चटकी कली कोई, मैं ये समझा तू शरमाई कोई खुशबू कहीं बिखरी, लगा ये जुल्फ लहराई परत एकदा ई :)

In reply to by प्यारे१

गॅरी ट्रुमन 14/09/2015 - 16:41
छूकर मेरे मन को किया तूने क्या इशारा बदला ये मौसम लगे प्यारा जग सारा तू जो कहे जीवनभर तेरे लिए मैं गाऊँ गीत तेरे बोलों पे लिखता चला जाऊँ मेरे गीतों में तुझे ढूंढ़े जग सारा र

शामसुन्दर 14/09/2015 - 19:14
रुख़ से ज़रा नकाब उठा दो, मेरे हुजूर जलवा फिर एक बार दिखा दो, मेरे हुजूर वो मर्मरी से हाथ, वो महका हुआ बदन टकराया मेरे दिल से, मोहब्बत का एक चमन मेरे भी दिल का फूल खिला दो, मेरे हुजूर

In reply to by दुर्गविहारी

द-बाहुबली 14/09/2015 - 20:38
मुक्काला मुकाबला होगा... ओलैला जालिम हसिना बदी मन चली है पर क्या करु तेरी मस्ती चढीं है निंद चुराके चैन चुरायेगा तेरा... मुक्काला मुकाबला होगा... ओलैला

पद्मावति 14/09/2015 - 20:44
लेकर हम दीवाना दिल, फिरते है मंज़िल मंज़िल कही तो प्यारे, किसी किनारे, मिल जाओ तुम अंधेरे उजाले..तराम पम.. लेकर हम दीवाना दिल, फिरते है मंज़िल मंज़िल

एक एकटा एकटाच 14/09/2015 - 20:55
लेकर हम दीवाना दिल फिरते है मंजिल मंजिल कही तो प्यारे किसी किनारे मिल जाए दो अंधेरे उजाले

एक एकटा एकटाच 14/09/2015 - 20:59
मै दुनिया भुला दुंगा तेरी चाहत में है दुश्मन जमाना मुझेना भुलाना मई सबको मिटा दुंगा तेरी चाहत में

द-बाहुबली 14/09/2015 - 21:01
मुथुकोडी कव्वाडी हडा ए मुथ्थुकोडी कव्वाडी हडा प्यार मे जो ना करना चाहा वो भी मुझे करना पडा...

पद्मावति 14/09/2015 - 21:07
गर तुम भुला न दोगे सपने ये सच ही होंगे हम-तुम जुदा न होंगे हम-तुम जुदा न होंगे

एक एकटा एकटाच 14/09/2015 - 21:16
ना जाने कहा से आई है ना जाने कहा को जाएगी दीवाना किसे बनाएगी इ लडकी

पद्मावति 14/09/2015 - 21:16
नशा ये प्यार का नशा है ये मेरी बात यारों मानो नशे में यार डूब जाओ रहो न होश में दीवानों के जबसे मैने तुमको दिल ये दे दिया मीठा मीठा सा दर्द ले लिया सुनो ओ प्रिया मैने तुमको दिल दिया नशा ये प्यार का ...

द-बाहुबली 14/09/2015 - 21:21
कुक्कुक् कुक्कुक् कुक्कुक् कुक्कुक् कुक्कुक् कुक्कुक् कुक्कुक् कुक्कुक् चोली के पिचे क्या है चोली के पिचे ? चुनरी के निचे क्या है ? चुनरी के निचे ? चोली मे दिल है मेरा चुनरी मे दिल है मेरा.. ये दिल मै दुंगी मेरे यार को.. प्यार को...

In reply to by पद्मावति

द-बाहुबली 14/09/2015 - 21:27
जुम्मा, जुम्मा, जुम्मा, जुम्मा, जुम्मा जुम्मा, जुम्मा जुम्मा जुम्मा जुम्मा जुम्मा जुम्मा अरे ओ जुम्मा, मेरी जानेमन, बाहर निकल आज जुम्मा है, आज का वादा है देख मैं आ गया, तू भी जल्दि आ मुझे मत और तड़पा अरे तू बोली थी पिछले जुम्मे को चुम्मा दूंगी अगले जुम्मे को आज जुम्मा है तो आजा आजा जुम्मा चुम्मा दे दे, जुम्मा चुम्मा दे दे चुम्मा जुम्मे के दिन किया चुम्मे का वादा जुम्मे को तोड़ दिया चुम्मे का वादा ले आ गया रे फिर जुम्मा-चुम्मा ...

In reply to by द-बाहुबली

पद्मावति 14/09/2015 - 21:34
मन क्यों बहका री बहका, आधी रात को बेला महका री महका, आधी रात को किस ने बन्सी बजाई, आधी रात को जिस ने पलकी चुराई, आधी रात को

In reply to by पद्मावति

द-बाहुबली 14/09/2015 - 21:38
क्या तुम मुझसे प्यार कर्ती हो ? क्या तुम मुझपे दिलसे मरती हो.. हां कसम से, कसम से हां कसम से, कसम की कसम कसम से सनम हम जनम जनसे तुमपे मरते है...

एक एकटा एकटाच 14/09/2015 - 21:24
कहेना है कहेना है आज तुमसे ये पहली बार तुम ही तो लाइ हो जीवन में मेरे प्यार प्यार प्यार

In reply to by द-बाहुबली

प्यारे१ 14/09/2015 - 21:39
रुक रुक रुक अरे बाबा रुक ओ माय डार्लिंग गिव मी अ लुक दिल मेरा धडके तेरे लिये असं सगळं झालं की लव हुआ लव हुआ -आलिशा चिनाय आजारी असणार तेव्हा अक्षर अ

In reply to by प्यारे१

द-बाहुबली 14/09/2015 - 21:45
आजा मेरी गाडी मे बैठ जा आजा मेरी गाडी मे बैठ जा लौंग ड्राइव जायेंगे फुल स्पिड जायेंगे कही रुकेंगेना हम गाना बजाना खाना पिना गाडीमे होगा सनम आजा मेरी गाडी मे बैठ जा आजा मेरी गाडी मे बैठ जा

एक एकटा एकटाच 14/09/2015 - 21:57
जा ने जा ढुंडता फिर रहा हु तुम्हे रात दिन मै यहाँ से वहा

एक एकटा एकटाच 14/09/2015 - 21:57
जा ने जा ढुंडता फिर रहा हु तुम्हे रात दिन मै यहाँ से वहा

In reply to by अभ्या..

एक एकटा एकटाच 14/09/2015 - 22:08
हो पण मी रिप्लाय ज वरुन दिला होता... पण नेट स्लो झालेल तोवर तुम्ही नी पर्यंत पोहचलात I My Sorry बर का?

In reply to by नीलमोहर

अभ्या.. 14/09/2015 - 22:14
रुक जा ओ जानेवाली रुक जा मै तो राही तेरी मंजिल का नजरोमे त्री मै बुरा सही आदमी बुरा नही मेऐ दिलका (अभ्या कसाही असला तरी नीच नाहीये रे, असे कोण नीच म्हणायचा बे)

एक एकटा एकटाच 14/09/2015 - 22:13
रात अकेली है बुझ गए दिये आके मेरे पास कानो में मेरे हो भी चाहे कहिए जो भी चाहे कहिए

एक एकटा एकटाच 14/09/2015 - 22:25
लंबी जुदाई चार दिनों दा इश्क ओ रब्बा बड़ी लंबी जुदाई

In reply to by एक एकटा एकटाच

अभ्या.. 14/09/2015 - 22:28
ते आळवून म्हणायची जुदाई हाय व्हय. मला वाटले ते चार दिनोंदा प्यार ओ रब्बा लंबी जुदाई, तेरे बिना दिल मेरा लागे कहीना, तेरे बिना जां मेरी जाये कहीना, हाश्म्याचे गाणे.