मराठी साहित्य, संस्कृती आणि लेखनाचे व्यासपीठ

चला अंताक्षरी खेळूया....

माम्लेदारचा पन्खा · · जे न देखे रवी...
लेखनविषय:
काव्यरस
जुनाच पण सदाबहार खेळ !! इच्छुकांनी सहभागी व्हावे...... मेरे मेहबूब कयामत होगी.... आज रुसवा तेरी गलियोमे मोहब्बत होगी... मे री न ज रे तो गि ला क र ती है.... तेरे दिल को भी सनम तुझसे शिकायत होगी.... पुढचे अक्षर "ग"....

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एक एकटा एकटाच 13/09/2015 - 16:11
गाता रहे मेरा दिल तुही मेरी मंजिल कही बीते ना ये राते कही बीते ना ये दिन गाता रहे मेरा दिल पुढिल अक्षर "ल"

ज्ञानोबाचे पैजार 13/09/2015 - 16:27
लकडी की काठी काठी पे घोडा घोडे के दुम पर मारा हातोडा दौडा दौडा दौडा घोडा दुम उठा के दौडा पुढिल अक्षर ड पैजारबुवा,

हेमंत लाटकर 13/09/2015 - 16:51
डमडम डिगा डिगा मौसम भिगा भिगा यै अल्ला सुरत आपकी सुभानअल्ला पुढचे अक्षर ल

एक एकटा एकटाच 13/09/2015 - 16:53
लाल छड़ी मैदान खड़ी क्या खूब लड़ी क्या खूब लडी हम दिल से गए.....हाए हम जा से गए......हाए बस आख लड़ी और बात बढी लाल छड़ी मैदान खडी पुढिल अक्षर "ड"

प्रा.डॉ.दिलीप बिरुटे 13/09/2015 - 17:01
जिसके सपने हमे रोज आते रहे, दिल लुभाते रहे, ये बतादो, बतादो कही तुम वही तो नही. वही तो नही. जिसके रोज रोज हम गीत गाते रहे, गुणगुणाते रहे, ये बतादो बतादो कही तुम वही तो नही, वही तो नही. ह घे भो. -दिलीप बिरुटे

एक एकटा एकटाच 13/09/2015 - 17:17
हवा हवा इ हवा खुशबू लुटादे कहा खुली हां खुली जुल्फे बता दे अब उसका पता दे ज़रा हम को बता दे.... मै उससे मिलुंगा एकबार मिला दे यार मिला दे दिलदार मिला दे पुढिल अक्षर "द"

द-बाहुबली 13/09/2015 - 17:32
करता नहि कोइ मुझे सलाम.. लेता नही कोइ.. मेरा नाम... मै हु वो जिरो.. हा हा :D ZERO... दस को मै दस लाख करके दिखादुं.. दस लाख को हां करके दिखादु दिखादु.. मै हुं वो झिरो आ आ आ झीरोव.. बोलोजी हिरो... पुढील अक्षर "फ"

In reply to by द-बाहुबली

प्रा.डॉ.दिलीप बिरुटे 13/09/2015 - 17:42
फुल तुम्हे भेजा है ख़त में फुल नहीं मेरा दिल है प्रियतम मेरे मुझको लिखना क्या ये तुम्हारे काबील है ह घ्या.

एक एकटा एकटाच 13/09/2015 - 19:17
निले निले अंबर पर चांद जब आए प्यार बरसाए हमको तरसाए तो ऐसा कोई साथी हो...... ऐसा कोई प्रेमी हो...... प्यास दिल की बुझा जाए पुढिल अक्षर "ए"

द-बाहुबली 13/09/2015 - 19:27
एक दो तिन चार पाच चे सात आठ नवं दस ग्यारा बारा तेरा तेरा करु दिन गिन गिन के इंतजार आजा सनम आइ बहार. पुढिल अक्षर "" अवांतरः- माम्लेदार साहेब विद ऑल रिस्पेक्ट प्रश्न आहे नॉल्स्टेल्जीक झालात की नुकतच वयात आलात ? कसयं भेंड्या प्रकार नुसतं बोट जरी स्पर्श झालं तरी प्रचंड गुदुगुल्या होतात अशा वयात फार रोचक असतात नाही तर गेलेला काळ आठवताना आनंद देतात. आपले प्रयोजन कोणते ? वरील सोडून आणखी कोणते कारण असेल तरीही चालेल. जाणून घ्यायला आवडेल.

In reply to by द-बाहुबली

माम्लेदारचा पन्खा 13/09/2015 - 20:44
म्हणजे काही वय झालं नाहीये हो.....पण जुन्या आठवणी काही वेगळ्याच... बर्‍याच वर्षात मैफिलीचा योग काही आलेला नाही..... जुनी गाणी विशेष प्रिय.... हल्लीची निवडकच... म्हणून इथेच सुरू केली मैफल....!!

एक एकटा एकटाच 13/09/2015 - 19:43
रूप तेरा मस्ताना प्यार मेरा दीवाना भूल कोई हमसे ना हो जाए पुढिल अक्षर "ए"

काळा पहाड 13/09/2015 - 19:47
Ring-a-ring o' roses, A pocket full of posies, A-tishoo! A-tishoo! We all fall down. न.

द-बाहुबली 13/09/2015 - 19:59
नो नो, नो नो . नोन्नो, नोन्नो नो नो नो नो..... देर इज नो लिमीट! नो न्नो लिमीट वी रिच फॉर द स्काय नो वॅली टु डिप नो माउंटन टु हाय नोनो लिमीट्स वोन्ट गिवप दफाय्ट वि डु व्हाट वि वांट अनं वि डु इट विद प्राइड पुढील अक्षर न.

बोका-ए-आझम 13/09/2015 - 20:05
चेहरा ये बदल जायेगा मेरी आवाजही पहचान है गर याद रहे! पुढचं अक्षर ह.

एक एकटा एकटाच 13/09/2015 - 21:10
दिल तो है दिल दिल का ऐतबार क्या चीज है आगया जो किसी पे प्यार क्या किजीए अक्षर "ए"

In reply to by एक एकटा एकटाच

प्यारे१ 13/09/2015 - 21:48
>>>> आपलं आयडी नाव- एक एकटा एकटाच मजा आहे. बाकी हे 'आपलं' पण आवडतं गाणं आहे. ;)

In reply to by प्यारे१

एक एकटा एकटाच 13/09/2015 - 21:57
आत्ताच ज्योती अलवनि ह्यांचा सिझोफ्रेनिया वरची मस्त कथा वाचली त्याच्याच परिणाम झाला वाटते.

एक एकटा एकटाच 13/09/2015 - 21:47
हमने तुमको देखा तुमने हमको देखा ऐसे...... हम तुम सनम सातों जनम मिलते रहे हो जैसे.....

रातराणी 13/09/2015 - 21:53
साथीया तूने क्या किया बेलीया तूने क्या किया मैने किया तेरा इंतजार इतना करो ना मुझसे प्यार दोनच गडी राहिलेत काय. बाकीची बस झोपली का काय!

एक एकटा एकटाच 13/09/2015 - 22:01
रातकली एक ख्वाब में आई और गले का हार हुई सुबह को जब हम निंद से जागे आख उन्ही से चार हुई

रातराणी 13/09/2015 - 22:18
इशारो इशारोमे दिल लेनेवाले बता एस हुनर तूने सीखा कहाँसे निगाहों निगाहोँमे जादू चलाना मेरी जान सीखा है तुमने जहाँसे

एक एकटा एकटाच 13/09/2015 - 22:21
समा है सुहाना .....सुहाना नशे में जहा है किसीको किसीकी खबर ही कहा है ज़रा हमको देखो मोहोब्बत जवा है......

एक एकटा एकटाच 13/09/2015 - 22:30
गीत गाता हु मै गुनगुनाता हु मै मैंने हसने का वादा किया था कभी इसलिए अब सदा मुस्कुराता हु मै......

बोका-ए-आझम 13/09/2015 - 23:19
के देखा है कही मेरे यार सा हसीं चांद ने कहा चांदनी की कसम नही नही नही मैने पूछा चांद से! पुढचं अक्षर स.

काळा पहाड 13/09/2015 - 23:36
सरकाईलो खटिया जाडा लगे सरकाईलो खटिया जाडा लगे सरकाईलो खटिया जाडा लगे जाडे मे बलमा प्यारा लगे सरकाईलो खटिया जाडा लगे सरकाईलो खटिया जाडा लगे ग.

एक एकटा एकटाच 13/09/2015 - 23:45
मै शायर तो नही मगर ए हसी...... जब से देखा मैंने तुझको मुझको शायरी आ गई
ईचक दाना बीचक दाना दाने ऊपर दाना ईचक दाना छज्जे ऊपर लड़की नाचे लड़का है दीवाना ईचक दाना बोलो क्या? अनार ईचक... छोटी सी छोकरी, लालबाई नाम है पहने वो घाघरा, एक पैसा दाम है मुँह में सबके आग लगाये आता है रुलाना ईचक दाना बोलो क्या? मिर्ची !! हरी थी मन भरी थी, लाख मोती जड़ी थी राजा जी के बाग़ में दुशाला ओढ़े खड़ी थी कच्चे-पक्के बाल हैं उसके मुखड़ा है सुहाना ईचक दाना... बोलो क्या? बोलो बोलो बुड्ढी !! भुट्टा !! एक जानवर ऐसा जिसके दुम पर पैसा सर पे है ताज भी बादशाह के जैसा बादल देखे छम-छम नाचे अलबेला मस्ताना ईचक दाना बोलो क्या? बोलो ना मोर !! चालें वो चलकर दिल में समाया आ ही गया वो, किया है सफ़ाया तुम भी देखो बचकर रहना चक्कर में न आना ईचक दाना... बोलो क्या? ग़म? हम! पुढे घ्या म

काळा पहाड 13/09/2015 - 23:57
मै लड्की पो पो पो तु लडका पो पो पो हम दोनो मिले पो पो पो अब आगे होग क्या कुछ नहि होगा कुछ नही होगा हम दोनो मे बस ये होगा पो पो पा पो पो पा पो पो पा पो पो पा पो पो पा पो पो पा पो पो पा

एक एकटा एकटाच 14/09/2015 - 00:02
पि पि पि पी पीया जी जी जी जी जिया पीया तूने मेरा जिया ले लिया
गर खुदा मुझ से कहे, कुछ मांग ऐ बन्दे मेरे मैं ये माँगू महफिलों के दौर यूँ चलते रहे हमप्याला, हमनिवाला, हमसफ़र, हमराज हो ता क़यामत जो चिरागों की तरह जलते रहे यारी है ईमान मेरा, यार मेरी जिन्दगी प्यार हो बन्दों से ये सब से बड़ी है बंदगी साज-ए-दिल छेड़ो जहाँ में, प्यार की गूंजे सदा जिन दिलों में प्यार हैं, उन पे बहारें हो फ़िदा प्यार लेके नूर आया, प्यार लेके ताजगी जान भी जाए अगर यारी में यारो ग़म नहीं अपने होते यार हो ग़मग़ीन मतलब हम नहीं हम जहाँ है उस जगह झूमेगी नाचेगी खुशी गुल-ए-गुलज़ार क्यों बेजार नजर आता है चश्म-ए-बद का शिकार यार नजर आता है छूपा ना हमसे ज़रा हाल-ए-दिल सूना दे तू तेरी हँसी की कीमत क्या है, ये बता दे तू कहे तो आसमान से चाँद तारें ले आऊँ हसीन, जवान और दिलकश नज़ारे ले आऊँ तेरा ममनून हूँ तूने निभाया याराना तेरी हँसी है आज सब से बड़ा नजराना यार के हँसते ही, महफ़िल पे जवानी आ गई ह घ्या परत ई

ऋतुराज चित्रे 14/09/2015 - 00:22
इमलि क बूटा बेरि का पेड इमलि खट्टि मिठे बेर इस जंगल मे हम दो शेर चल घर जल्दी हो गयी देर घ्या र

पद्मावति 14/09/2015 - 00:28
राम करे ऐसा हो जाए मेरी निंदिया तोहे मिल जाए मैं जागूँ, तू सो जाए पुढील अक्षर ए.

प्यारे१ 14/09/2015 - 01:00
ए काय बोलते तू? ए काय मी बोलू ऐक ऐकव . . . . येतीस का खंडाळ्याला . . . . आणखी काय? य

एक एकटा एकटाच 14/09/2015 - 07:29
यम्मा यम्मा यम्मा यम्मा है खुबसूरत समा बस आज की रात है जिंदगी कल हम कहा तुम कहा

एक एकटा एकटाच 14/09/2015 - 08:12
ये जो मोहब्बत है ये उनका है काम मेहबूब का जो बस लेते हुए नाम मर जाए मिट जाए हो जाए बदनाम रहेने दो छोडो अब जाने दो यार हम ना करेंगे प्यार.........

सिरुसेरि 14/09/2015 - 08:15
या भवनातील गीत पुराणे , मवाळ हळवे सुर जाउ दया , आज येथुनी दूर . भाव भक्तीची भाऊक गाथा पराभुत हो , नमविल माथा नवे सुर अनं नवे तराणे हवा नवा तो नुर , जाउ दया , आज जुने ते दूर . या भवनातील गीत पुराणे .

In reply to by सिरुसेरि

प्रा.डॉ.दिलीप बिरुटे 14/09/2015 - 08:35
य वरुन तुमचा माझा प्रतिसाद लिही पर्यन्त दोन प्रतिसाद पडले होते. मराठी अंताक्षरीसाठी इथे http://www.misalpav.com/node/31 प्रतिसाद लिहा. -दिलीप बिरुटे

प्रा.डॉ.दिलीप बिरुटे 14/09/2015 - 08:24
याद तेरी आयगी मुझको बड़ा सतायेगी फिर ये झूटी तेरी मेरी जान लेके जायेगी -दिलीप बिरुटे

सिरुसेरि 14/09/2015 - 08:56
हा हिन्दी , ईंग्लिश गाण्यांच्या अंताक्षरीचा धागा दिसतो आहे . मराठी अंताक्षरीसाठीच्या धाग्याची लिंक दिल्याबद्दल धन्यवाद .

बोका-ए-आझम 14/09/2015 - 08:57
अपनोंपे सितम ऐ जाने वफा ये जुल्म ना कर रहने दे अभी थोडासा भरम ऐ जाने वफा ये जुल्म ना कर ये जुल्म ना कर! पुढचं अक्षर र

ज्ञानोबाचे पैजार 14/09/2015 - 09:05
ग़म का फ़साना बन गया अच्छा एक बहाना बन गया अच्छा सरकार ने आके मेरा हाल तो पूछा ग़म का... तुम्हारे ख़यालों में खो जायें ये जी चाहता है की सो जायें देखो बातों-बातों में चाँदनी रातों में ख़्वाब सुहाना बन गया अच्छा... बतायें तुम्हें क्या कहाँ दर्द है यहाँ हाथ रखना यहाँ दर्द है देखो बातों बातों में दो ही मुलाकातों में दिल ये निशाना बन गया अच्छा... मुहब्बत की रंगीन महफ़िल में जगह मिल गई आपके दिल में देखो बातों-बातों में प्यार की बरातों में अपना ठिकाना बन गया अच्छा... पुढील अक्षर - छ पैजारबुवा,

ज्ञानोबाचे पैजार 14/09/2015 - 09:10
जाउदे हे घ्या रा वरुन रात और दिन दिया जले मेरे मन में फिर भी अंधियारा है जाने कहाँ है वो साथी तू जो मिले जीवन उजियारा है रात और दिन... पुढील अक्षर न

अविनाश पांढरकर 14/09/2015 - 09:13
छन से जो तुटे कोई सपना जग सुना सुना लागे जग सुना सुना लागे कोई रहे ना जब अपना पुढील अक्षर - न

ऋतुराज चित्रे 14/09/2015 - 09:23
नदिया से दरिया, दरिया से सागर, सागर से गहरा जाम जाम में डूब गयी यारों मेरे जीवन की हर शाम म

ज्ञानोबाचे पैजार 14/09/2015 - 09:31
तमा तमा लोगे तू प्रेमी आहा मैं प्रेमी आहा तू रानी आहा मैं राजा आहा फिर क्या daddyक्या अम्मा इक बस तू ही प्यार के काबिल सारा जहां है निकम्मा तमा तमा लोगे तमा पुढचे अक्षर "त" पैजारबुवा,

नीलमोहर 14/09/2015 - 09:38
माही वे, मोहब्बतां सच्चियां वे मंगदा नसीबां कुछ और है..
हैं सबसे मधुर वो गीत जिन्हें, हम दर्द के सुर में गाते हैं जब हद से गुज़र जाती है खुशी, आँसू भी छलकते आते हैं काँटों में खिले हैं फूल हमारे, रंग भरे अरमानों के नादान हैं, जो इन काँटों से दामन को बचाये जाते हैं जब ग़म का अन्धेरा घिर आये, समझो के सवेरा दूर नहीं हर रात का हैं पैगाम यहीं, तारे भी यहीं दोहराते हैं पहलू में पराये दर्द बसाके, तू हँसना हँसाना सीख ज़रा तूफ़ान से कह दे घिर के उठे, हम प्यार के दीप जलाते हैं काहीही हं ह
कभी कभी मेरे दिल में ख़याल आता है के जैसे तुझ को बनाया गया है मेरे लिए तू अब से पहले सितारों में बस रही थी कही तुझे जमीं पे बुलाया गया है मेरे लिए कभी कभी मेरे दिल में ख़याल आता है के ये बदन ये निगाहें, मेरी अमानत हैं ये गेसुओं की घनी छाँव हैं मेरी खातिर ये होंठ और ये बाहें मेरी अमानत हैं कभी कभी मेरे दिल में ख़याल आता है के जैसे बजती हैं शहनाईयां सी राहों में सुहाग रात है घूंघट उठा रहा हूँ मैं सीमट रही है, तू शरमा के अपनी बाहों में कभी कभी मेरे दिल में ख़याल आता है के जैसे तू मुझे चाहेगी उम्रभर यूही उठेगी मेरी तरफ प्यार की नजर यूं ही मैं जानता हूँ के तू गैर है मगर यूं ही हा हा हा ह
संपादक महोदय हे डबल डबल का येत माहीत नाही कुठे चुक होते कळत नाही कृपया या विनंती प्रतिसादा सहीत सर्व डबल आलेले प्रतिसाद काढुन टाका याने रसभंग होतो साखळी तुटतेय

शामसुन्दर 14/09/2015 - 10:49
होके मजबूर मुझे उसने भुलाया होगा ज़हर चुपके से दवां जानके खाया होगा दिल ने ऐसे भी कुछ अफ़साने सुनाये होंगे अश्क़ आँखोंने पिये और ना बहाये होंगे बंद कमरे में जो खत मेरे जलाये होंगे एक एक हर्फ़ जबीन पर उभर आया होगा उसने घबराके नज़र लाख बचाई होगी दिल की लूटती हुयी दुनियाँ नज़र आयी होगी मेज़ से जब मेरी तस्वीर हटाई होगी हर तरफ मुझको तडपता हुआ पाया होगा छेड़ की बात पे अरमां मचल आये होंगे ग़म दिखावे की हँसी में उबल आये होंगे नाम पर मेरे जब आँसू निकल आये होंगे सर ना काँधे से सहेली के उठाया होगा जुल्फ़ ज़िद करके किसी ने जो बनाई होगी और भी ग़म की घटा मुखड़े पे छाई होगी बिजली नजरों ने कई दिन ना गिराई होगी रंग चेहरे पे कई रोज़ ना आया होगा

पद्मावति 14/09/2015 - 11:06
गोरे गोरे मुखड़े पे काला काला चश्मा तौबा खुदा खैर करे खूब है करिश्मा खूब है करिश्मा, गोरे गोरे मुखड़े पे काला काला चश्मा पुढिल अक्षर म

पद्मावति 14/09/2015 - 11:25
ग़ज़ब का है दिन, सोचो ज़रा ये दीवानापन, देखो ज़रा तुम हो अकेले, हम भी अकेले मज़ा आ रहा है, क़सम से, क़सम से नेक्स्ट--' स'

प्यारे१ 14/09/2015 - 11:29
हम लिखा है ना ग से एक गाना. काहे दुई दुई गाने लिख रहे हो? स से गाना.... सामने ये कौन आआ दिल में हुई हलचल देखकर एक झलक हो गए सब पागल

नीलमोहर 14/09/2015 - 11:46
प्रतिसाद लिहून प्रकाशित करेपर्यंत दुसरा प्रतिसाद येतोय त्यामुळे होतंय, असू द्या हो, येऊ द्या नेक्सट..

मारवा 14/09/2015 - 11:51
न तू ज़मीं के लिए है न आसमां के लिए तेरा वजूद है अब दास्ताँ के लिए पलट के सु-ए-चमन देखने से क्या होगा वो शाख ही ना रही जो थी आशियाँ के लिए ना तू ज़मीं... गरज परस्त जहां में वफ़ा तलाश न कर ये शय बनी थी किसी दूसरे जहां के लिए तेरा वजूद है अब दास्ताँ के लिए ए

In reply to by माम्लेदारचा पन्खा

ज्ञानोबाचे पैजार 14/09/2015 - 12:51
हे दलाल या मिथुन दांच्या चित्रपटातले गाणे आहे. कुमार सानुने गायलेले आणि संगीत अर्थातच द वन अंड ओन्ली वन बाप्पीदांचे ऐकायला चांगले आहे. पण त्या "चढ गया उपर रे" मुळे हे कुठल्या कुठे वाहुन गेले. पैजारबुवा

In reply to by ज्ञानोबाचे पैजार

माम्लेदारचा पन्खा 14/09/2015 - 13:04
शब्दांवरून तर जुनं वाटतंय.... कुमार शानू, बप्पीदा आवडायचे पण काही काही गाण्यात !