| काव्य |
आई..मिटलेला श्वास - १ |
गणेशा |
| काव्य |
युगलगीतः तू माझी हो काठी, मी तुझी काठी |
पाषाणभेद |
| काव्य |
गोलात goल |
पाषाणभेद |
| काव्य |
राप्चिक र्राप्चिक कूल कूल |
चन्द्रशेखर गोखले |
| काव्य |
तो आणि त्याची स्वप्नं |
पुष्कर |
| काव्य |
क्षण.. |
अथांग |
| काव्य |
अजून काय... |
असुर |
| काव्य |
आज या कातरवेळी तिची आठवण का होतेय? |
स्वप्निल मन |
| काव्य |
नाते तुझे नि माझे ना सापडे अताशा |
स्वानंद मारुलकर |
| काव्य |
सरकारी योजना |
पाषाणभेद |
| काव्य |
युगलगीतः बाई इथंच ठोकू का हा खिळा? |
पाषाणभेद |
| काव्य |
एका सैनिकाने लिहिलेल्या हृदयद्रावक कवितेचे भाषांतर |
गणेशा |
| काव्य |
गहिवरल्या अधीर धारा ... |
गणेशा |
| काव्य |
चर्पटपंजरिका स्तोत्राचा भावानुवाद |
राघव |
| काव्य |
युगलगीत: रुसली ग रुसली, माझी बायको रुसली |
पाषाणभेद |
| काव्य |
टीन एज वारे वाहू लागलंय ! |
अथांग |
| काव्य |
(गावात प्लेग) |
अर्धवट |
| काव्य |
(शापीत मेघ ) ... |
गणेशा |
| काव्य |
(शापीत मेघ) |
अडगळ |
| काव्य |
झाडांच्या पानात |
गणेशा |
| काव्य |
पण बोलणार नाही... |
नगरीनिरंजन |
| काव्य |
(कापित केक) |
३_१४ विक्षिप्त अदिती |
| काव्य |
भरमाध्यान्हीच्या सान्ताक्लॉजचे प्रियाराधन |
शरदिनी |
| काव्य |
शापीत मेघ |
गणेशा |
| काव्य |
माझा नवरा पैसं खातो |
पाषाणभेद |
| काव्य |
प्रेम..जगावेगळे... |
अथांग |
| काव्य |
लग्नगीतः पतीची ग वाट पाही, मंडपी सजली नवरी |
पाषाणभेद |
| काव्य |
काम करी दाम येड्या |
केशवसुमार |
| काव्य |
कशी दिसते दिसते लाडाची लाडी तुमची |
पाषाणभेद |
| काव्य |
कुत्र्याचे शेपूट ... |
मनीषा |