दिल जलता है तो जलने दे
दिल जलता है तो जलने दे
आँसू ना बहा फ़रियाद ना कर
तू परदानशीं का आशिक़ है
यूँ नाम-ए-वफ़ा बरबाद ना कर
मासूम नजर के तीर चला
बिस्मिल को बिस्मिल और बना
अब शर्म-ओ-हया के परदे में
यूँ छुप छुप के बे-दाद ना कर
हम आस लगाये बैठे है
तुम वादा करके भूल गये
या सूरत आ के दिखा जाओ
या कह दो हमको याद ना कर
मुकेश
परदानशि--पडद्यातील स्त्री, शालीन, आशिक-- प्रियकर, वफा ---प्रेम, भक्ती, एकनिष्ठा मासुम ---निष्पाप, बिस्मिल ---घायाळ, प्रियकर, हया --- शरम, लाज बेदाद --- अत्याचार, जुलूम, ऑंस ---दर्द, संवेदना
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