| काव्य |
ऋण मातीचे.. |
राघव |
| काव्य |
प्रवाह |
आर्यचाणक्य |
| काव्य |
मीही एक मृगजळ |
गिरीराज |
| काव्य |
आठवण.... |
सौरभ वैशंपायन |
| काव्य |
(करमणूक) |
चतुरंग |
| काव्य |
आत्मक्लेश |
नंदकिशोर साळ्वे |
| काव्य |
राख..... |
किरण मल्लाव |
| काव्य |
तूझे येणे....... |
नीता |
| काव्य |
कधी रे येशील तू... अनामिका.... |
मृगनयनी |
| काव्य |
श्यामसखा. |
सौरभ वैशंपायन |
| काव्य |
बाप्पा मोरया.. |
स्वाती फडणीस |
| काव्य |
(म्हातारचळ म्हातारचळ) |
चतुरंग |
| काव्य |
दूर पळ दूर पळ |
अनिरुद्ध अभ्यंकर |
| काव्य |
डाव वेळेने साधला |
श्रीकृष्ण सामंत |
| काव्य |
राधा |
पद्मश्री चित्रे |
| काव्य |
(...बोकडाचे खूर काही!) |
चतुरंग |
| काव्य |
एका (पेक्षा एक) कवीं चे मनोगत----! |
मनीषा |
| काव्य |
वाढदिवस म्हणजे |
दिप्ती |
| काव्य |
तेंव्हा एक कर! (विडंबन) |
दिप्ती |
| काव्य |
एक छोटी कविता (तक्रारवजा) |
पांथस्थ |
| काव्य |
एक सुरवात व शेवट नसलेली कविता |
दत्ता काळे |
| काव्य |
कळी संगे निर्दय भोंवरा मधूर गुंजन करतो कसे? |
श्रीकृष्ण सामंत |
| काव्य |
ओंडका |
स्वाती फडणीस |
| काव्य |
प्रेमे नादली पंढरी..! |
राघव |
| काव्य |
आमची ही-"मुंबई" |
पद्मश्री चित्रे |
| काव्य |
आमची मुंबई |
वृषाली |
| काव्य |
सप्तर्षि |
सौरभ वैशंपायन |
| काव्य |
फांसे |
हेरंब |
| काव्य |
भास |
अनिरुद्ध अभ्यंकर |
| काव्य |
मातृदिनाच्या निमित्ताने |
पद्मश्री चित्रे |