| काव्य |
बायको ही सायको असते..डरकाळ्या आणि म्यांव..म्यांव |
कानडाऊ योगेशु |
| काव्य |
(रिमोट) |
कौतुक शिरोडकर |
| काव्य |
<पचन> |
विजुभाऊ |
| काव्य |
वाचन |
कौतुक शिरोडकर |
| काव्य |
(बहुधा) |
चेतन |
| काव्य |
आभास तू.. |
प्राजु |
| काव्य |
बहुधा |
क्रान्ति |
| काव्य |
गणित!-२ |
केशवसुमार |
| काव्य |
<?!#^&* भरीत *&^#!?> |
प्रभो |
| काव्य |
[वळीत] |
अमृतांजन |
| काव्य |
झणझणीत |
टारझन |
| काव्य |
[गणित!] |
केशवसुमार |
| काव्य |
(झिरो) |
३_१४ विक्षिप्त अदिती |
| काव्य |
<अगणीत> |
विजुभाऊ |
| काव्य |
((गणित)) |
चतुरंग |
| काव्य |
दहाजणीत! |
सन्जोप राव |
| काव्य |
गणित! |
श्रावण मोडक |
| काव्य |
आयटीवर बोलू काही..! |
उपटसुंभ |
| काव्य |
(फराळ) |
कौतुक शिरोडकर |
| काव्य |
स्वप्न |
पाषाणभेद |
| काव्य |
(चॅनेल खूप आले, आता बघेन म्हणतो) |
अमृतांजन |
| काव्य |
'खोका' वदून गेल्या, आता नडेन म्हणतो |
llपुण्याचे पेशवेll |
| काव्य |
निरोप |
कौतुक शिरोडकर |
| काव्य |
(पाहून खुप झाले, आता खाईन म्हणतो) |
चेतन |
| काव्य |
आता काही लिहीन म्हणतो. |
उग्रसेन |
| काव्य |
(सुज रंग) |
अमृतांजन |
| काव्य |
'काका' वदून गेल्या, आता बघेन म्हणतो |
चतुरंग |
| काव्य |
'गिरी' वाद |
कौतुक शिरोडकर |
| काव्य |
दीप रंग.. |
प्राजु |
| काव्य |
पाळणाघरात |
मनोज |