| काव्य |
अर्धसत्य.. |
विसोबा खेचर |
| काव्य |
प्रयत्न |
निशान्त |
| काव्य |
मी बोर्ड बोलतोय... |
अत्रुप्त आत्मा |
| काव्य |
माझ्या शब्दांनी एवढे स्वस्त व्हायला नको होते! |
आर्या१२३ |
| काव्य |
नियतीचा क्रूर खेळ |
स्वर भायदे |
| काव्य |
संपत्या सुटीचे पूर्वरंग |
बहुगुणी |
| काव्य |
रंग कवितेचे - |
विदेश |
| काव्य |
अताशा मला हे असे काय होते |
अरुण मनोहर |
| काव्य |
लई दिसांची मी खाल्ली नाही शिरापुरी |
पाषाणभेद |
| काव्य |
दोन छोटे |
अरुण मनोहर |
| काव्य |
भेळ |
अत्रुप्त आत्मा |
| काव्य |
डाल ग कोंबडी डाल |
पाषाणभेद |
| काव्य |
नि:संशय |
अज्ञातकुल |
| काव्य |
दृष्टीआड |
अज्ञातकुल |
| काव्य |
नखरा नाही इतका बरा |
पाषाणभेद |
| काव्य |
"आदर्श " सुंदर हाच आमचा बंगला |
विदेश |
| काव्य |
आयुष्य पार सरलेले |
स्वानंद मारुलकर |
| काव्य |
हे 'असं' कसं? |
वेणू |
| काव्य |
मंत्रमुग्ध तळे |
अरुण मनोहर |
| काव्य |
वेडेपणा... (गझल) |
स्वानंद मारुलकर |
| काव्य |
दखल |
उपटसुंभ |
| काव्य |
वसंत काव्य मालेत पुष्प गुंफायला निमंत्रण.... |
शशिकांत ओक |
| काव्य |
गझल |
यशोधरा |
| काव्य |
गझल |
यशोधरा |
| काव्य |
प्रार्थना |
यशोधरा |
| काव्य |
विराणी |
यशोधरा |
| काव्य |
चारोळ्या |
यशोधरा |
| काव्य |
वाटले होते...! |
यशोधरा |
| काव्य |
विराणी |
यशोधरा |
| काव्य |
गातेस घरी तू जेव्हां |
विदेश |