| काव्य |
ड्रीमकॅचर |
चित्रा |
| काव्य |
ते दिवस आता कुठे |
अरूण म्हात्रे |
| काव्य |
हायकू - |
विदेश |
| काव्य |
संततधार |
अज्ञातकुल |
| काव्य |
( मावळे बुडाले कामी ) |
अर्धवट |
| काव्य |
अर्धवट राहिलेलं प्रेम |
प्रिया ब |
| काव्य |
बावळे बुडाले धामी |
शरदिनी |
| काव्य |
कान्हा माझ्या भुकेची वेळ आता झाली |
पाषाणभेद |
| काव्य |
लोकशाहि |
अजातशत्रु |
| काव्य |
घर पहावं बांधून |
प्रिया ब |
| काव्य |
आयुष्य कडेवर घेतो |
गंगाधर मुटे |
| काव्य |
हातामधी घे तू जरा |
पाषाणभेद |
| काव्य |
मैत्री |
प्रिया ब |
| काव्य |
आई बाबा |
प्रिया ब |
| काव्य |
गात येथे तू उगा का थांबलेला |
विदेश |
| काव्य |
आदाब अर्ज है !( २६-०७-११) हार जाने का हौसला है मुझे......... |
अश्फाक |
| काव्य |
उणीव... |
अभिषेक९ |
| काव्य |
थेट चित्रगुप्ताच्या मूळ नोंद वहीतून: द्रौपदीची पाचजणात वाटणी का आणि कशी झाली याची हकीगत आणि श्रीकृष्णाचा धावा |
चित्रगुप्त |
| काव्य |
दोन कविता |
अरूण म्हात्रे |
| काव्य |
लाचखोर लोकांनी - |
विदेश |
| काव्य |
(गाववाले आणि मुंबैकर) |
धन्या |
| काव्य |
आसूड |
चन्द्रशेखर गोखले |
| काव्य |
(आली माझ्या घरी ही गटारी ) |
अमोल केळकर |
| काव्य |
किती सजवू मी माझं मला |
पाषाणभेद |
| काव्य |
गुरूमंत्र |
मूकवाचक |
| काव्य |
शिल्लकेला जीव जर का आणखी |
धनंजय |
| काव्य |
सुख |
प्रिया ब |
| काव्य |
दोन चारोळ्या - |
विदेश |
| काव्य |
स्थलांतर |
अरुण मनोहर |
| काव्य |
पिंकी, परी आणि मोर - |
विदेश |