| काव्य |
युगलगीत: गार गार वारा अंगाला झोंबला |
पाषाणभेद |
| काव्य |
थापाच मारणारा - |
विदेश |
| काव्य |
कला बघा कलाकारांची |
पाषाणभेद |
| काव्य |
एका सागराची कथा |
अश्फाक |
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मैत्री |
navinavakhi |
| काव्य |
आठव |
navinavakhi |
| काव्य |
जीव माझा गुंतला आहे |
navinavakhi |
| काव्य |
सखा |
navinavakhi |
| काव्य |
तो क्षण |
navinavakhi |
| काव्य |
बालपणीचा गाव |
navinavakhi |
| काव्य |
चाहूल |
navinavakhi |
| काव्य |
बहरलेला वृक्ष होतो एकदा मी छानसा |
विदेश |
| काव्य |
अखेर |
अज्ञातकुल |
| काव्य |
माणूस |
विदेश |
| काव्य |
कसं जगायचं असतं ? |
महाबळ |
| काव्य |
तुझ्या बरमुडा त्रिकोणा चे आकर्षण.... |
अविनाशकुलकर्णी |
| काव्य |
अंगणात ही स्कुटी अशीच राहु दे - |
विदेश |
| काव्य |
मी कागदावर सांडत गेलो |
अविनाश खेडकर |
| काव्य |
झाडे वाट बघत बसतात ...!! |
प्रकाश१११ |
| काव्य |
(हल्ली मी घेतच नाही ...(؟)... ) |
गणपा |
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जीवन |
दि ग्रेट मराठा |
| काव्य |
चारोळी... ४ओळी |
दि ग्रेट मराठा |
| काव्य |
प्रेमाचा झुला |
यश पालकर |
| काव्य |
मिठीत कळी उमलली |
पाषाणभेद |
| काव्य |
बिगारी |
पाषाणभेद |
| काव्य |
तिचा नवरा -१ |
सन्जोप राव |
| काव्य |
मी माझ्या छंदातच रमतो - |
विदेश |
| काव्य |
मन |
गार्गी_नचिकेत |
| काव्य |
शब्द |
पाषाणभेद |
| काव्य |
आपली तर काय..... |
वपाडाव |