जुनाच पण सदाबहार खेळ !! इच्छुकांनी सहभागी व्हावे......
मेरे मेहबूब कयामत होगी....
आज रुसवा तेरी गलियोमे मोहब्बत होगी...
मे री न ज रे तो गि ला क र ती है....
तेरे दिल को भी सनम तुझसे शिकायत होगी....
पुढचे अक्षर "ग"....
हम ने तुम को देखा, तुम ने हम को देखा, ऐसे
हम तुम सनम, सातो जनम, मिलते रहे हो जैसे
आँखों का रह रह के मिलना, मिल के झुक जाना
कर देती हैं यही अदाए, दिल को दीवाना
हुआ यूँ सामना, पडा दिल थामना
अक्षर-- (न)
गरजत बरसत सावन आयो रे,
गरजत बरसत सावन आयो रे
लायो न संग में, हमरे बिछड़े बलमवा
सखी का करूं हाय, गरजत बरसत सावन आयो रे
गरजत बरसत सावन
आयो रे सावन आयो, सावन आयो रे
गरजत बरसत सावन
गोरी तेरा गाँव बड़ा प्यारा, मैं तो गया मारा, आ के यहा रे
उस पर रूप तेरा सादा, चंद्रमा ज्यों आधा, आधा जवान रे
जी करता हैं, मोर के पाँव में पायलियाँ पहना दूँ
कूहू कूहू गाती कोयलियाँ को, फूलों का गहना दूँ
यही घर अपना बनाने को, पंछी करे देखो, तिनकें जमा रे
(अक्षर-- र)
रात कली एक ख्वाब में आई और गले का हार हुई
सुबह को जब हम नींद से जागे, आँख तुम ही से चार हुई
चाहे कहो इसे मेरी मोहब्बत, चाहे हँसी में उड़ा दो
ये क्या हुआ मुझे मुझको खबर नहीं, हो सके तुम ही बता दो
तुम ने कदम तो रखा जमीन पर, सीने में क्यों झंकार हुई
ई
गल मीठी मीठी बोल
रस कानोमे तू घोल
बजने दे ताशे ढोल
मस्तीमे तूभी डोल
मन के नैना तू खोल
चाहत के मोती रोल
दिल होता है अनमोल
ये दौलतसे ना तोल
ओ सोनी तेनू चांद की मैं चूड़ी पेहनावा.
हुश्श खूप खेळले आज. मज्जा आली.
ये लम्हे, ये पल हम बरसों याद करेंगे
ये मौसम चले गये तो हम फर्याद करेंगे
इन सपनों की तस्वीरों से, इन यादों की जंजीरों से
अपने दिल को कैसे हम आझाद करेंगे
ये मौसम चले गये तो हम फर्याद करेंगे
मेरे नैना सावन भादो फिर भी मेरा मन प्यासा
बात पुरानी है, एक कहानी है
अब सोचूं तुम्हे याद नहीं है, अब सोचूं नहीं भूलें
वो सावन के झूलें
रुत आये रुत जाये दे के झूठा एक दिलासा
बरसों बीत गये, हम को मिले बिछड़े
बिजुरी बन के गगन पे चमकी बीते समय की रेखा
मैंने तुमको देखा
तड़प तड़प के इस बिरहन को आया चैन जरासा
स
न जाने मेरे... दिलको क्या... होगया....
अभी तो यहीं...था कहीं.... खोगया....
अरे होगया है तुझको तो प्यार सजना
लाख करले तू इनकार सजना
हय ये प्यार सजना....
न
कबसे आये हैं तेरे दुल्हे राजा...
अब देर नाऽऽ कर तू जल्दी आजा...
ऐ दिल..चलेगा अब ना कोई बहाना
गोरी को होगा अब साजन के घर जाना
माथेऽ की बिंदियां क्या बोले हैं सुन्सुन्सुन्सुन....
साजन्जी घर आये, साजन्जी घर आये,
दुल्हन क्यूं शरमाये, साजन्जी घर आये...
य.
कहीं दूर जब दिन ढल जाए
साँझ की दुल्हन बदन चुराए, चुपके से आए
मेरे ख़यालों के आँगन में, कोई सपनों के दीप जलाए
कभी यूँ ही जब हुई बोझल साँसे
भर आई बैठे बैठे जब यूँ ही आँखे
तभी मचल के, प्यार से चल के
छूए कोई मुझे पर नज़र ना आए, नज़र ना आए
(ए) :)
रात का नशा अभी आँख से गया नहीं
तेरा नशिला बदन, बाहों ने छोडा नहीं
आँखें तो खोली मगर, सपना वो तोडा नहीं
साँसों पे रखा हुआ तेरे होठों का सपना अभी हैं वही
तेरे बिना भी कभी तुझ से मचल लेती हूँ
करवटें बदलती हूँ तो सपना बदल लेती हूँ
तेरा खयाल आए तो, बल खाँके पल जाता है
पानी की चादर तले तन मेरा जल जाता है
साँसों पे रखा हुआ तेरे होठों का सपना अभी है वही
तेरे गले मिलने के मौसम बडे होते हैं
जन्मों का वादा कोई, ये गम बडे छोटे हैं
लंबी सी एक रात हो, लंबा सा एक दिन मिले
बस इतना सा जीना हो मिलन की घडी जब मिले
साँसों पे रखा हुआ तेरे होठों का सपना अभी है वही
ह
हमें तुम से प्यार कितना, ये हम नहीं जानते
मगर जी नहीं सकते, तुम्हारे बिना
सुना गम जुदाई का उठाते हैं लोग
जाने जिन्दगी कैसे बिताते हैं लोग
दिन भी यहाँ तो लगे बरस के समान
हमें इंतज़ार कितना ये हम नहीं जानते
मगर जी नहीं सकते, तुम्हारे बिना
न
फज़ा भी है जवाँ, जवाँ, हवा भी है रवाँ, रवाँ
सुना रहा है ये समा, सुनी सुनी सी दास्ताँ
पुकारते हैं दूर से, वो काफिले बहार के
बिखर गये हैं रंग से, किसी के इंतजार के
लहर लहर के होंठोंपर, वफ़ा की हैं कहानियाँ
बुझी मगर बुझी नहीं, न जाने कैसी प्यास है
करार दिल से आज भी, ना दूर है ना पास है
ये खेल धूंप-छाँव का, ये करवटें, ये दूरियाँ
हर एक पल को ढूंढता, हर एक पल चला गया
हर एक पल फिराक का, हर एक पल विसाल का
हर एक पल गुजर गया, बना के दिल पे एक निशाँ
निकाह चित्रपटातील गाणे मला फारच आवडते. म्हणून लिरिक्स सगळे दिले आहेत आणि व्हिडिओ पण एम्बेड करत आहे.
पुढील अक्षर--- श
सागर किनारे दिल ये पुकारे
हमने तुमको देखा
नैनो की मत सुनियो रे
गाना मेरे बस की बात नहीं
गरजत बरसत सावन आयो रे,
नुरी... नुरी....
रैना बीती जाय,
रात के हमसफ़र थकके घरको चले,
ये दोस्ती हम नहीं तोड़ेंगे
गोरी तेरा गाव बडा प्यारा
गाता रहे मेरा दिल तु ही मेरी मंझील
गाता रहे मेरा दिल तु ही मेरी मंझील
न जाने क्यूं
न जाने क्यु अगोदर झालय
रात कली एक ख्वाब में आई और गले का हार हुई
इधर चला
गल मीठी मीठी बोल
रमैय्या वस्तावैय्या, रमैय्या
ये लम्हे, ये पल हम बरसों याद
गोरे गोरे मुखडे पे काला काला चश्मा
मेरे नैना सावन भादो
साथियाऽऽऽ हो...साथियाऽऽऽ हो..
साथिया ये तुने क्या कहा, बेलिया ये तुने क्या कहा
सो गया ये समा सो गया आसमान
किंवा आसमा चा म
न जाने मेरे... दिलको क्या...
निंदीया से जागी बहार
मेला दिलों का आता है इक बार
कबसे आये हैं तेरे दुल्हे राजा
अरे बापरे एक गॅरी और चार आन्सर बहोत नाइन्साफी है
रात के हमसफ़र, थक के घर को चली
रात के हमसफ़र, थक के घर को चले
मुकेशचे नितांतसुंदर गाणे
ए मेरे, हमसफर, इक जरा इंतजार.
कौन है जो सपनों में आया
यायिरे...यायिरे... जोर्लगाके
बाकी आठवत नाय
धन्यवाद!
गीतमंजुषा
यही है ख्वाहिश आज मेरी
राहों में उनसे मुलाकात हो गयी
रात का नशा अभी आँख से गया नहीं
हमें तुम से प्यार कितना, ये
बॅटमनराव आणि माझ एकच आलय काहीह श्री काहीही ह
हा हा हा, अगदी अगदी!!!!!
हा
गलतीसे मिक्ष्टेक हो गया. ... असे वाचावे,
निकाह चित्रपटातील एक छान गाणे
हम दिल दे चुके सनम
मै निकला ओ गड्डी लेके
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