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चला अंताक्षरी खेळूया....

लेखक माम्लेदारचा पन्खा यांनी रविवार, 13/09/2015 15:59 या दिवशी प्रकाशित केले.
जुनाच पण सदाबहार खेळ !! इच्छुकांनी सहभागी व्हावे...... मेरे मेहबूब कयामत होगी.... आज रुसवा तेरी गलियोमे मोहब्बत होगी... मे री न ज रे तो गि ला क र ती है.... तेरे दिल को भी सनम तुझसे शिकायत होगी.... पुढचे अक्षर "ग"....
काव्यरस
लेखनविषय:

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प्रतिक्रिया 457

प्रतिक्रिया

ये हसीन वादियां, ये खुला आसमां आ गये हम कहाँ ऐ मेरे साजना इन बहारों में दिल की कली खिल गयी मुझ को तुम जो मिले हर खुशी मिल गयी तेरे होठों पे हैं, हुस्न की बिजलियाँ तेरे गालों पे हैं, जुल्फ की बदलियाँ तेरे दामन की खुशबू से महके चमन संगेमरमर के जैसा ये तेरा बदन मेरी जान-ए-जां, मैं तेरी चाँदनी छेड़ लो तुम आज कोई प्यार की रागिनी ये हसीन वादियां, ये खुला आसमां आ गये हम कहाँ, ऐ मेरे साजना ये बंधन है प्यार का, देखो टूटे ना सजनी ये जन्मों का साथ है, देखो छूटे ना सजना तेरे आँचल की छाँव के तले मेरी मंज़िल मुझे मिल गयी तेरी पलकों की छाँव के तले मोहब्बत मुझे मिल गयी जी करता है साजना, दिल में तुम को बिठा लूँ आ मस्ती की रात में, अपना तुम को बना लूँ उठने लगे हैं तूफान क्यो, मेरे सीने में ऐ सनम तुम्हे चाहूँगा दिल-ओ-जान से, मेरी जान-ए-जान तेरी कसम म

In reply to by नीलमोहर

ये कहॉ आ गये हम युही साथ चलते चलते तेरी बाहो मे है जानम मेरे जिस्म जा पिघलते त

In reply to by मारवा

तेरे दर पर सनम चले आये तू ना आया तो हम चले आये बीन तेरे कोई आस भी ना रही इतने तरसे के प्यास भी ना रही लडखडाये कदम, चले आये (अक्षरः य)

In reply to by नीलमोहर

ये जो थोडेसे है पैसे खर्च तुमपर करू कैसे अगर कही दुकान होती जहा पे मिलते गगन के तारे मै सारे तारे खरीद लेता तुम्हारे आंचल मै टांक देता मगर क्या करू की मै ये जानता हू तारे मिलते नही ऐसे ये जो थोडेसे है पैसे खर्च तुमपर करू कैसे अक्षरः (स)

In reply to by रातराणी

हम ने तुम को देखा, तुम ने हम को देखा, ऐसे हम तुम सनम, सातो जनम, मिलते रहे हो जैसे आँखों का रह रह के मिलना, मिल के झुक जाना कर देती हैं यही अदाए, दिल को दीवाना हुआ यूँ सामना, पडा दिल थामना अक्षर-- (न)

गरजत बरसत सावन आयो रे, गरजत बरसत सावन आयो रे लायो न संग में, हमरे बिछड़े बलमवा सखी का करूं हाय, गरजत बरसत सावन आयो रे गरजत बरसत सावन आयो रे सावन आयो, सावन आयो रे गरजत बरसत सावन

In reply to by Gayatri Muley

गोरी तेरा गाँव बड़ा प्यारा, मैं तो गया मारा, आ के यहा रे उस पर रूप तेरा सादा, चंद्रमा ज्यों आधा, आधा जवान रे जी करता हैं, मोर के पाँव में पायलियाँ पहना दूँ कूहू कूहू गाती कोयलियाँ को, फूलों का गहना दूँ यही घर अपना बनाने को, पंछी करे देखो, तिनकें जमा रे (अक्षर-- र)

In reply to by मारवा

न जाने क्यूं होता है ये जिंदगी के साथ अचानक ये मन किसी के जाने के बाद करे फिर उसकी याद छोटी छोटीसी बात न जाने क्यूं..

रात कली एक ख्वाब में आई और गले का हार हुई सुबह को जब हम नींद से जागे, आँख तुम ही से चार हुई चाहे कहो इसे मेरी मोहब्बत, चाहे हँसी में उड़ा दो ये क्या हुआ मुझे मुझको खबर नहीं, हो सके तुम ही बता दो तुम ने कदम तो रखा जमीन पर, सीने में क्यों झंकार हुई ई

In reply to by मारवा

इधर चला मै उधर चला जाने कहा मै किधर चला अरे फिसल गया ये तुने क्या किया य

गल मीठी मीठी बोल रस कानोमे तू घोल बजने दे ताशे ढोल मस्तीमे तूभी डोल मन के नैना तू खोल चाहत के मोती रोल दिल होता है अनमोल ये दौलतसे ना तोल ओ सोनी तेनू चांद की मैं चूड़ी पेहनावा. हुश्श खूप खेळले आज. मज्जा आली.

ये लम्हे, ये पल हम बरसों याद करेंगे ये मौसम चले गये तो हम फर्याद करेंगे इन सपनों की तस्वीरों से, इन यादों की जंजीरों से अपने दिल को कैसे हम आझाद करेंगे ये मौसम चले गये तो हम फर्याद करेंगे

मेरे नैना सावन भादो फिर भी मेरा मन प्यासा बात पुरानी है, एक कहानी है अब सोचूं तुम्हे याद नहीं है, अब सोचूं नहीं भूलें वो सावन के झूलें रुत आये रुत जाये दे के झूठा एक दिलासा बरसों बीत गये, हम को मिले बिछड़े बिजुरी बन के गगन पे चमकी बीते समय की रेखा मैंने तुमको देखा तड़प तड़प के इस बिरहन को आया चैन जरासा स

In reply to by गॅरी ट्रुमन

साथियाऽऽऽ हो...साथियाऽऽऽ हो... मद्धम मद्धम तेरी गीली हसी.... हस्ती रहे तू हस्ती रहे, हया की लाली खिलती रहे, जुल्फों के नीचे गरदन पे, स्बहोशाम खिलती रहे... सोणिसी हसी तेरी, मिलती रहे मिलती रहे... (थोड्याफार चूभूदेघे, तरी लिरिक्स बाकी अचूक आहे.) पुढील अक्षर ह.

In reply to by गॅरी ट्रुमन

साथिया ये तुने क्या कहा, बेलिया ये तुने क्या कहा यूँ ना कभी करना इंतज़ार मैंने किया है तुमसे प्यार मैंने किया है तुमसे प्यार र

In reply to by पद्मावति

न जाने मेरे... दिलको क्या... होगया.... अभी तो यहीं...था कहीं.... खोगया.... अरे होगया है तुझको तो प्यार सजना लाख करले तू इनकार सजना हय ये प्यार सजना.... न

मेला दिलों का आता है इक बार आके चला जाता है आते हैं मुसाफिर जाते हैं मुसाफिर जाना ही है उनको क्यों आते हैं मुसाफिर मेला दिलों का … क

In reply to by Gayatri Muley

कबसे आये हैं तेरे दुल्हे राजा... अब देर नाऽऽ कर तू जल्दी आजा... ऐ दिल..चलेगा अब ना कोई बहाना गोरी को होगा अब साजन के घर जाना माथेऽ की बिंदियां क्या बोले हैं सुन्सुन्सुन्सुन.... साजन्जी घर आये, साजन्जी घर आये, दुल्हन क्यूं शरमाये, साजन्जी घर आये... य.

रात के हमसफ़र, थक के घर को चले झूमती आ रही, हैं सुबह प्यार की देख कर सामने रूप की रौशनी फिर लूटी जा रही, हैं सुबह प्यार की क

रात के हमसफ़र, थक के घर को चले झूमती आ रही, हैं सुबह प्यार की देख कर सामने रूप की रौशनी फिर लूटी जा रही, हैं सुबह प्यार की क

कहीं दूर जब दिन ढल जाए साँझ की दुल्हन बदन चुराए, चुपके से आए मेरे ख़यालों के आँगन में, कोई सपनों के दीप जलाए कभी यूँ ही जब हुई बोझल साँसे भर आई बैठे बैठे जब यूँ ही आँखे तभी मचल के, प्यार से चल के छूए कोई मुझे पर नज़र ना आए, नज़र ना आए (ए) :)

In reply to by गॅरी ट्रुमन

ए मेरे, हमसफर, इक जरा इंतजार...(बाकी आठवत नाय)....मंझिल प्यार की... क.

In reply to by बॅटमॅन

कौन है जो सपनों में आया कौन है जो दिल में समाया लो झुक गया आसमान भी इश्क मेरा रंग लाया ओ पिया..... य

In reply to by गॅरी ट्रुमन

यायिरे...यायिरे... जोर्लगाके नाच्चे रे... चल मेरे संगं संगं, लेले दुनिया के रंग, होजा रंगीला रे....रंगनरंगीला रे... र.

In reply to by बॅटमॅन

http://geetmanjusha.com/ या साईटीवर देवनागरीतूनही लिरिक्स मिळतात. मी सगळे लिरिक्स तिथूनच भराभर चोप्य-पस्ते करत आहे :)

In reply to by प्यारे१

राहों में उनसे मुलाकात हो गयी... जिसे डरते थे...वही बात हो गयी.... आहाहाहाहाहा....आहाहा हाहा...(मोजलेत बरं का) ह =))

In reply to by प्यारे१

रात का नशा अभी आँख से गया नहीं तेरा नशिला बदन, बाहों ने छोडा नहीं आँखें तो खोली मगर, सपना वो तोडा नहीं साँसों पे रखा हुआ तेरे होठों का सपना अभी हैं वही तेरे बिना भी कभी तुझ से मचल लेती हूँ करवटें बदलती हूँ तो सपना बदल लेती हूँ तेरा खयाल आए तो, बल खाँके पल जाता है पानी की चादर तले तन मेरा जल जाता है साँसों पे रखा हुआ तेरे होठों का सपना अभी है वही तेरे गले मिलने के मौसम बडे होते हैं जन्मों का वादा कोई, ये गम बडे छोटे हैं लंबी सी एक रात हो, लंबा सा एक दिन मिले बस इतना सा जीना हो मिलन की घडी जब मिले साँसों पे रखा हुआ तेरे होठों का सपना अभी है वही ह

In reply to by मारवा

हमें तुम से प्यार कितना, ये हम नहीं जानते मगर जी नहीं सकते, तुम्हारे बिना सुना गम जुदाई का उठाते हैं लोग जाने जिन्दगी कैसे बिताते हैं लोग दिन भी यहाँ तो लगे बरस के समान हमें इंतज़ार कितना ये हम नहीं जानते मगर जी नहीं सकते, तुम्हारे बिना न

ए क्या बोलती तू?हाँ तुम्हें तुम्हें तुम्हें हम चाहते हैं देखो ना तुम से दूर जा कर तुम्हारे पास आते हैं कौन मैं हाँ तुम बस तुम ओफ़्फ़ो फ घ्या

In reply to by ज्ञानोबाचे पैजार

हाँ तुम्हें तुम्हें तुम्हें हम चाहते हैं देखो ना तुम से दूर जा कर तुम्हारे पास आते हैं कौन मैं हाँ तुम बस तुम ओफ़्फ़ो फ घ्या

In reply to by ज्ञानोबाचे पैजार

फज़ा भी है जवाँ, जवाँ, हवा भी है रवाँ, रवाँ सुना रहा है ये समा, सुनी सुनी सी दास्ताँ पुकारते हैं दूर से, वो काफिले बहार के बिखर गये हैं रंग से, किसी के इंतजार के लहर लहर के होंठोंपर, वफ़ा की हैं कहानियाँ बुझी मगर बुझी नहीं, न जाने कैसी प्यास है करार दिल से आज भी, ना दूर है ना पास है ये खेल धूंप-छाँव का, ये करवटें, ये दूरियाँ हर एक पल को ढूंढता, हर एक पल चला गया हर एक पल फिराक का, हर एक पल विसाल का हर एक पल गुजर गया, बना के दिल पे एक निशाँ निकाह चित्रपटातील गाणे मला फारच आवडते. म्हणून लिरिक्स सगळे दिले आहेत आणि व्हिडिओ पण एम्बेड करत आहे. पुढील अक्षर--- श

In reply to by नीलमोहर

मै निकला ओ गड्डी लेके ओ रास्ते पर ओ सडक मे एक मोड आया मै उत्थे दिल छोड आया य

In reply to by नीलमोहर

मायेनिमायेमुंदेरुपेतेरी बोलरहाहैकागा.... जोगनहोगै तेरिदुलारी, मन जोगीसंगलागा.... ग.

In reply to by बॅटमॅन

गीत गाता हूँ मैं, गुनगुनाता हूँ मैं मैने हँसने का वादा किया था कभी इसलिए अब सदा मुस्कुराता हूँ मैं ये मोहब्बत के पल कितने अनमोल हैं कितने फूलों से नाज़ूक मेरे बोल हैं सब को फूलों की माला पहनाता हूँ मैं मुस्कुराता हूँ मैं ... म

In reply to by गॅरी ट्रुमन

मुक्काला मुक्काबला लैला...ओहो लैला.. अपना काफिला...जब प्यार से चला..लोगोंका दिल मिला..(इथले विसरलो) मोहब्बत का यही सिलसिला..ओएओ... ल घ्या.

In reply to by बॅटमॅन

लिखे जो खत तुझे, वो तेरी याद में हज़ारो रंग के नज़ारे बन गये सवेरा जब हुआ, तो फूल बन गये जो रात आई तो सितारें बन गये कोई नग्मा कहीं गूंजा, कहा दिल ने ये तू आई कहीं चटकी कली कोई, मैं ये समझा तू शरमाई कोई खुशबू कहीं बिखरी, लगा ये जुल्फ लहराई परत एकदा ई :)

In reply to by प्यारे१

छूकर मेरे मन को किया तूने क्या इशारा बदला ये मौसम लगे प्यारा जग सारा तू जो कहे जीवनभर तेरे लिए मैं गाऊँ गीत तेरे बोलों पे लिखता चला जाऊँ मेरे गीतों में तुझे ढूंढ़े जग सारा र