Skip to main content
मिसळपाव

Main navigation

  • मुख्य पान
  • पाककृती
  • कविता
  • भटकंती
  • नवीन लेखन
Submitted by माम्लेदारचा पन्खा on Sun, 09/13/2015 - 15:59
जुनाच पण सदाबहार खेळ !! इच्छुकांनी सहभागी व्हावे...... मेरे मेहबूब कयामत होगी.... आज रुसवा तेरी गलियोमे मोहब्बत होगी... मे री न ज रे तो गि ला क र ती है.... तेरे दिल को भी सनम तुझसे शिकायत होगी.... पुढचे अक्षर "ग"....

Submitted by रातराणी on Mon, 09/14/2015 - 15:01

Permalink

सागर किनारे दिल ये पुकारे

सागर किनारे दिल ये पुकारे तू जो नही तो मेरा कोई नही है
  • Log in or register to post comments

Submitted by गॅरी ट्रुमन on Mon, 09/14/2015 - 15:03

In reply to सागर किनारे दिल ये पुकारे by रातराणी

Permalink

हमने तुमको देखा

हम ने तुम को देखा, तुम ने हम को देखा, ऐसे हम तुम सनम, सातो जनम, मिलते रहे हो जैसे आँखों का रह रह के मिलना, मिल के झुक जाना कर देती हैं यही अदाए, दिल को दीवाना हुआ यूँ सामना, पडा दिल थामना अक्षर-- (न)
  • Log in or register to post comments

Submitted by रातराणी on Mon, 09/14/2015 - 15:12

Permalink

नैनो की मत सुनियो रे

नैनो की मत सुनियो रे नैना ठग लेंगे, नैना ठग लेंगे
  • Log in or register to post comments

Submitted by नीलमोहर on Mon, 09/14/2015 - 15:16

Permalink

गाना मेरे बस की बात नहीं

गाना मेरे बस की बात नहीं सुर और ताल का साथ नहीं..
  • Log in or register to post comments

Submitted by पद्मावति on Mon, 09/14/2015 - 15:17

Permalink

गरजत बरसत सावन आयो रे,

गरजत बरसत सावन आयो रे, गरजत बरसत सावन आयो रे लायो न संग में, हमरे बिछड़े बलमवा सखी का करूं हाय, गरजत बरसत सावन आयो रे गरजत बरसत सावन आयो रे सावन आयो, सावन आयो रे गरजत बरसत सावन
  • Log in or register to post comments

Submitted by केदार-मिसळपाव on Mon, 09/14/2015 - 15:18

Permalink

नुरी... नुरी....

आजा रे आजारे मेरे दिलबर आजा दिल की प्यास बुझाझा रे.. र घ्या..
  • Log in or register to post comments

Submitted by पद्मावति on Mon, 09/14/2015 - 15:22

In reply to नुरी... नुरी.... by केदार-मिसळपाव

Permalink

रैना बीती जाय,

रैना बीती जाय, श्याम न आए निंदिया ना आए रैना बीती जाय य घ्या
  • Log in or register to post comments

Submitted by रातराणी on Mon, 09/14/2015 - 15:23

Permalink

रात के हमसफ़र थकके घरको चले,

रात के हमसफ़र थकके घरको चले, झूमती आ रही है सुबह प्यार की,
  • Log in or register to post comments

Submitted by Gayatri Muley on Mon, 09/14/2015 - 15:32

Permalink

ये दोस्ती हम नहीं तोड़ेंगे

ये दोस्ती हम नहीं तोड़ेंगे तोड़ेंगे दम मगर तेरा साथ ना छोडेंगे ग
  • Log in or register to post comments

Submitted by गॅरी ट्रुमन on Mon, 09/14/2015 - 15:34

In reply to ये दोस्ती हम नहीं तोड़ेंगे by Gayatri Muley

Permalink

गोरी तेरा गाव बडा प्यारा

गोरी तेरा गाँव बड़ा प्यारा, मैं तो गया मारा, आ के यहा रे उस पर रूप तेरा सादा, चंद्रमा ज्यों आधा, आधा जवान रे जी करता हैं, मोर के पाँव में पायलियाँ पहना दूँ कूहू कूहू गाती कोयलियाँ को, फूलों का गहना दूँ यही घर अपना बनाने को, पंछी करे देखो, तिनकें जमा रे (अक्षर-- र)
  • Log in or register to post comments

Submitted by मारवा on Mon, 09/14/2015 - 15:34

Permalink

गाता रहे मेरा दिल तु ही मेरी मंझील

गाता रहे मेरा दिल तु ही मेरी मंझील कही बीते ना ये राते कही बीते ना ये दिन न
  • Log in or register to post comments

Submitted by मारवा on Mon, 09/14/2015 - 15:34

Permalink

गाता रहे मेरा दिल तु ही मेरी मंझील

गाता रहे मेरा दिल तु ही मेरी मंझील कही बीते ना ये राते कही बीते ना ये दिन न
  • Log in or register to post comments

Submitted by नीलमोहर on Mon, 09/14/2015 - 15:37

In reply to गाता रहे मेरा दिल तु ही मेरी मंझील by मारवा

Permalink

न जाने क्यूं

न जाने क्यूं होता है ये जिंदगी के साथ अचानक ये मन किसी के जाने के बाद करे फिर उसकी याद छोटी छोटीसी बात न जाने क्यूं..
  • Log in or register to post comments

Submitted by मारवा on Mon, 09/14/2015 - 15:40

In reply to न जाने क्यूं by नीलमोहर

Permalink

न जाने क्यु अगोदर झालय

झालय
  • Log in or register to post comments

Submitted by मारवा on Mon, 09/14/2015 - 15:37

Permalink

रात कली एक ख्वाब में आई और गले का हार हुई

रात कली एक ख्वाब में आई और गले का हार हुई सुबह को जब हम नींद से जागे, आँख तुम ही से चार हुई चाहे कहो इसे मेरी मोहब्बत, चाहे हँसी में उड़ा दो ये क्या हुआ मुझे मुझको खबर नहीं, हो सके तुम ही बता दो तुम ने कदम तो रखा जमीन पर, सीने में क्यों झंकार हुई ई
  • Log in or register to post comments

Submitted by गॅरी ट्रुमन on Mon, 09/14/2015 - 15:40

In reply to रात कली एक ख्वाब में आई और गले का हार हुई by मारवा

Permalink

इधर चला

इधर चला मै उधर चला जाने कहा मै किधर चला अरे फिसल गया ये तुने क्या किया य
  • Log in or register to post comments

Submitted by रातराणी on Mon, 09/14/2015 - 15:42

Permalink

गल मीठी मीठी बोल

गल मीठी मीठी बोल रस कानोमे तू घोल बजने दे ताशे ढोल मस्तीमे तूभी डोल मन के नैना तू खोल चाहत के मोती रोल दिल होता है अनमोल ये दौलतसे ना तोल ओ सोनी तेनू चांद की मैं चूड़ी पेहनावा. हुश्श खूप खेळले आज. मज्जा आली.
  • Log in or register to post comments

Submitted by Gayatri Muley on Mon, 09/14/2015 - 15:42

Permalink

रमैय्या वस्तावैय्या, रमैय्या

रमैय्या वस्तावैय्या, रमैय्या वस्तावैय्या मैंने दिल तुझको दिया मैंने दिल तुझको दिया य
  • Log in or register to post comments

Submitted by पद्मावति on Mon, 09/14/2015 - 15:43

Permalink

ये लम्हे, ये पल हम बरसों याद

ये लम्हे, ये पल हम बरसों याद करेंगे ये मौसम चले गये तो हम फर्याद करेंगे इन सपनों की तस्वीरों से, इन यादों की जंजीरों से अपने दिल को कैसे हम आझाद करेंगे ये मौसम चले गये तो हम फर्याद करेंगे
  • Log in or register to post comments

Submitted by मारवा on Mon, 09/14/2015 - 15:47

Permalink

गोरे गोरे मुखडे पे काला काला चश्मा

गोरे गोरे मुखडे पे काला काला चश्मा तौबा खुदा करे खुब है करीश्मा खुब है करीश्मा म
  • Log in or register to post comments

Submitted by गॅरी ट्रुमन on Mon, 09/14/2015 - 15:49

Permalink

मेरे नैना सावन भादो

मेरे नैना सावन भादो फिर भी मेरा मन प्यासा बात पुरानी है, एक कहानी है अब सोचूं तुम्हे याद नहीं है, अब सोचूं नहीं भूलें वो सावन के झूलें रुत आये रुत जाये दे के झूठा एक दिलासा बरसों बीत गये, हम को मिले बिछड़े बिजुरी बन के गगन पे चमकी बीते समय की रेखा मैंने तुमको देखा तड़प तड़प के इस बिरहन को आया चैन जरासा स
  • Log in or register to post comments

Submitted by बॅटमॅन on Mon, 09/14/2015 - 15:52

In reply to मेरे नैना सावन भादो by गॅरी ट्रुमन

Permalink

साथियाऽऽऽ हो...साथियाऽऽऽ हो..

साथियाऽऽऽ हो...साथियाऽऽऽ हो... मद्धम मद्धम तेरी गीली हसी.... हस्ती रहे तू हस्ती रहे, हया की लाली खिलती रहे, जुल्फों के नीचे गरदन पे, स्बहोशाम खिलती रहे... सोणिसी हसी तेरी, मिलती रहे मिलती रहे... (थोड्याफार चूभूदेघे, तरी लिरिक्स बाकी अचूक आहे.) पुढील अक्षर ह.
  • Log in or register to post comments

Submitted by मारवा on Mon, 09/14/2015 - 15:53

In reply to मेरे नैना सावन भादो by गॅरी ट्रुमन

Permalink

साथिया ये तुने क्या कहा, बेलिया ये तुने क्या कहा

साथिया ये तुने क्या कहा, बेलिया ये तुने क्या कहा यूँ ना कभी करना इंतज़ार मैंने किया है तुमसे प्यार मैंने किया है तुमसे प्यार र
  • Log in or register to post comments

Submitted by पद्मावति on Mon, 09/14/2015 - 15:52

Permalink

सो गया ये समा सो गया आसमान

सो गया ये समा सो गया आसमान सो गयी है सारी मंजिले, सो गया है रास्ता सो गया ये समा सो गया आसमान न
  • Log in or register to post comments

Submitted by पद्मावति on Mon, 09/14/2015 - 15:53

In reply to सो गया ये समा सो गया आसमान by पद्मावति

Permalink

किंवा आसमा चा म

किंवा आसमा चा म
  • Log in or register to post comments

Submitted by बॅटमॅन on Mon, 09/14/2015 - 15:54

In reply to सो गया ये समा सो गया आसमान by पद्मावति

Permalink

न जाने मेरे... दिलको क्या...

न जाने मेरे... दिलको क्या... होगया.... अभी तो यहीं...था कहीं.... खोगया.... अरे होगया है तुझको तो प्यार सजना लाख करले तू इनकार सजना हय ये प्यार सजना.... न
  • Log in or register to post comments

Submitted by नीलमोहर on Mon, 09/14/2015 - 15:54

Permalink

निंदीया से जागी बहार

निंदीया से जागी बहार ऐसा मौसम देखा पहली बार..
  • Log in or register to post comments

Submitted by Gayatri Muley on Mon, 09/14/2015 - 15:55

Permalink

मेला दिलों का आता है इक बार

मेला दिलों का आता है इक बार आके चला जाता है आते हैं मुसाफिर जाते हैं मुसाफिर जाना ही है उनको क्यों आते हैं मुसाफिर मेला दिलों का … क
  • Log in or register to post comments

Submitted by बॅटमॅन on Mon, 09/14/2015 - 15:59

In reply to मेला दिलों का आता है इक बार by Gayatri Muley

Permalink

कबसे आये हैं तेरे दुल्हे राजा

कबसे आये हैं तेरे दुल्हे राजा... अब देर नाऽऽ कर तू जल्दी आजा... ऐ दिल..चलेगा अब ना कोई बहाना गोरी को होगा अब साजन के घर जाना माथेऽ की बिंदियां क्या बोले हैं सुन्सुन्सुन्सुन.... साजन्जी घर आये, साजन्जी घर आये, दुल्हन क्यूं शरमाये, साजन्जी घर आये... य.
  • Log in or register to post comments

Submitted by मारवा on Mon, 09/14/2015 - 15:56

Permalink

अरे बापरे एक गॅरी और चार आन्सर बहोत नाइन्साफी है

बहोत नाइन्साफी है
  • Log in or register to post comments

Submitted by मारवा on Mon, 09/14/2015 - 15:57

Permalink

रात के हमसफ़र, थक के घर को चली

रात के हमसफ़र, थक के घर को चले झूमती आ रही, हैं सुबह प्यार की देख कर सामने रूप की रौशनी फिर लूटी जा रही, हैं सुबह प्यार की क
  • Log in or register to post comments

Submitted by मारवा on Mon, 09/14/2015 - 15:58

Permalink

रात के हमसफ़र, थक के घर को चले

रात के हमसफ़र, थक के घर को चले झूमती आ रही, हैं सुबह प्यार की देख कर सामने रूप की रौशनी फिर लूटी जा रही, हैं सुबह प्यार की क
  • Log in or register to post comments

Submitted by गॅरी ट्रुमन on Mon, 09/14/2015 - 16:11

Permalink

मुकेशचे नितांतसुंदर गाणे

कहीं दूर जब दिन ढल जाए साँझ की दुल्हन बदन चुराए, चुपके से आए मेरे ख़यालों के आँगन में, कोई सपनों के दीप जलाए कभी यूँ ही जब हुई बोझल साँसे भर आई बैठे बैठे जब यूँ ही आँखे तभी मचल के, प्यार से चल के छूए कोई मुझे पर नज़र ना आए, नज़र ना आए (ए) :)
  • Log in or register to post comments

Submitted by बॅटमॅन on Mon, 09/14/2015 - 16:22

In reply to मुकेशचे नितांतसुंदर गाणे by गॅरी ट्रुमन

Permalink

ए मेरे, हमसफर, इक जरा इंतजार.

ए मेरे, हमसफर, इक जरा इंतजार...(बाकी आठवत नाय)....मंझिल प्यार की... क.
  • Log in or register to post comments

Submitted by गॅरी ट्रुमन on Mon, 09/14/2015 - 16:30

In reply to ए मेरे, हमसफर, इक जरा इंतजार. by बॅटमॅन

Permalink

कौन है जो सपनों में आया

कौन है जो सपनों में आया कौन है जो दिल में समाया लो झुक गया आसमान भी इश्क मेरा रंग लाया ओ पिया..... य
  • Log in or register to post comments

Submitted by बॅटमॅन on Mon, 09/14/2015 - 16:34

In reply to कौन है जो सपनों में आया by गॅरी ट्रुमन

Permalink

यायिरे...यायिरे... जोर्लगाके

यायिरे...यायिरे... जोर्लगाके नाच्चे रे... चल मेरे संगं संगं, लेले दुनिया के रंग, होजा रंगीला रे....रंगनरंगीला रे... र.
  • Log in or register to post comments

Submitted by संजय पाटिल on Mon, 09/14/2015 - 16:44

In reply to ए मेरे, हमसफर, इक जरा इंतजार. by बॅटमॅन

Permalink

बाकी आठवत नाय

ए मेरे, हमसफर, इक जरा इंतजार सुन सदाए दे रही है.. मंझिल प्यार की..
  • Log in or register to post comments

Submitted by बॅटमॅन on Mon, 09/14/2015 - 16:48

In reply to बाकी आठवत नाय by संजय पाटिल

Permalink

धन्यवाद!

धन्यवाद!
  • Log in or register to post comments

Submitted by गॅरी ट्रुमन on Mon, 09/14/2015 - 16:51

In reply to धन्यवाद! by बॅटमॅन

Permalink

गीतमंजुषा

http://geetmanjusha.com/ या साईटीवर देवनागरीतूनही लिरिक्स मिळतात. मी सगळे लिरिक्स तिथूनच भराभर चोप्य-पस्ते करत आहे :)
  • Log in or register to post comments

Submitted by प्यारे१ on Mon, 09/14/2015 - 16:20

Permalink

यही है ख्वाहिश आज मेरी

यही है ख्वाहिश आज मेरी जान जाये बाहोंमे ही तेरी र
  • Log in or register to post comments

Submitted by बॅटमॅन on Mon, 09/14/2015 - 16:23

In reply to यही है ख्वाहिश आज मेरी by प्यारे१

Permalink

राहों में उनसे मुलाकात हो गयी

राहों में उनसे मुलाकात हो गयी... जिसे डरते थे...वही बात हो गयी.... आहाहाहाहाहा....आहाहा हाहा...(मोजलेत बरं का) ह =))
  • Log in or register to post comments

Submitted by मारवा on Mon, 09/14/2015 - 16:23

In reply to यही है ख्वाहिश आज मेरी by प्यारे१

Permalink

रात का नशा अभी आँख से गया नहीं

रात का नशा अभी आँख से गया नहीं तेरा नशिला बदन, बाहों ने छोडा नहीं आँखें तो खोली मगर, सपना वो तोडा नहीं साँसों पे रखा हुआ तेरे होठों का सपना अभी हैं वही तेरे बिना भी कभी तुझ से मचल लेती हूँ करवटें बदलती हूँ तो सपना बदल लेती हूँ तेरा खयाल आए तो, बल खाँके पल जाता है पानी की चादर तले तन मेरा जल जाता है साँसों पे रखा हुआ तेरे होठों का सपना अभी है वही तेरे गले मिलने के मौसम बडे होते हैं जन्मों का वादा कोई, ये गम बडे छोटे हैं लंबी सी एक रात हो, लंबा सा एक दिन मिले बस इतना सा जीना हो मिलन की घडी जब मिले साँसों पे रखा हुआ तेरे होठों का सपना अभी है वही ह
  • Log in or register to post comments

Submitted by गॅरी ट्रुमन on Mon, 09/14/2015 - 16:31

In reply to रात का नशा अभी आँख से गया नहीं by मारवा

Permalink

हमें तुम से प्यार कितना, ये

हमें तुम से प्यार कितना, ये हम नहीं जानते मगर जी नहीं सकते, तुम्हारे बिना सुना गम जुदाई का उठाते हैं लोग जाने जिन्दगी कैसे बिताते हैं लोग दिन भी यहाँ तो लगे बरस के समान हमें इंतज़ार कितना ये हम नहीं जानते मगर जी नहीं सकते, तुम्हारे बिना न
  • Log in or register to post comments

Submitted by मारवा on Mon, 09/14/2015 - 16:25

Permalink

बॅटमनराव आणि माझ एकच आलय काहीह श्री काहीही ह

ह ह ह
  • Log in or register to post comments

Submitted by बॅटमॅन on Mon, 09/14/2015 - 16:27

In reply to बॅटमनराव आणि माझ एकच आलय काहीह श्री काहीही ह by मारवा

Permalink

हा हा हा, अगदी अगदी!!!!!

हा हा हा, अगदी अगदी!!!!! ( द नाही बरं का =)) )
  • Log in or register to post comments

Submitted by ज्ञानोबाचे पैजार on Mon, 09/14/2015 - 16:29

Permalink

हा

ए क्या बोलती तू?हाँ तुम्हें तुम्हें तुम्हें हम चाहते हैं देखो ना तुम से दूर जा कर तुम्हारे पास आते हैं कौन मैं हाँ तुम बस तुम ओफ़्फ़ो फ घ्या
  • Log in or register to post comments

Submitted by ज्ञानोबाचे पैजार on Mon, 09/14/2015 - 16:29

In reply to हा by ज्ञानोबाचे पैजार

Permalink

गलतीसे मिक्ष्टेक हो गया. ... असे वाचावे,

हाँ तुम्हें तुम्हें तुम्हें हम चाहते हैं देखो ना तुम से दूर जा कर तुम्हारे पास आते हैं कौन मैं हाँ तुम बस तुम ओफ़्फ़ो फ घ्या
  • Log in or register to post comments

Submitted by गॅरी ट्रुमन on Mon, 09/14/2015 - 16:59

In reply to गलतीसे मिक्ष्टेक हो गया. ... असे वाचावे, by ज्ञानोबाचे पैजार

Permalink

निकाह चित्रपटातील एक छान गाणे

फज़ा भी है जवाँ, जवाँ, हवा भी है रवाँ, रवाँ सुना रहा है ये समा, सुनी सुनी सी दास्ताँ पुकारते हैं दूर से, वो काफिले बहार के बिखर गये हैं रंग से, किसी के इंतजार के लहर लहर के होंठोंपर, वफ़ा की हैं कहानियाँ बुझी मगर बुझी नहीं, न जाने कैसी प्यास है करार दिल से आज भी, ना दूर है ना पास है ये खेल धूंप-छाँव का, ये करवटें, ये दूरियाँ हर एक पल को ढूंढता, हर एक पल चला गया हर एक पल फिराक का, हर एक पल विसाल का हर एक पल गुजर गया, बना के दिल पे एक निशाँ निकाह चित्रपटातील गाणे मला फारच आवडते. म्हणून लिरिक्स सगळे दिले आहेत आणि व्हिडिओ पण एम्बेड करत आहे. पुढील अक्षर--- श
  • Log in or register to post comments

Submitted by नीलमोहर on Mon, 09/14/2015 - 16:29

Permalink

हम दिल दे चुके सनम

हम दिल दे चुके सनम तेरे हो गए हैं हम तेरी कसम
  • Log in or register to post comments

Submitted by मारवा on Mon, 09/14/2015 - 16:34

In reply to हम दिल दे चुके सनम by नीलमोहर

Permalink

मै निकला ओ गड्डी लेके

मै निकला ओ गड्डी लेके ओ रास्ते पर ओ सडक मे एक मोड आया मै उत्थे दिल छोड आया य
  • Log in or register to post comments

Pagination

  • First page « First
  • Previous page ‹ Previous
  • पान 1
  • पान 2
  • पान 3
  • पान 4
  • पान 5
  • पान 6
  • पान 7
  • पान 8
  • पान 9
  • …
  • Next page Next ›
  • Last page Last »
  • Log in or register to post comments
  • 110345 views

प्रवेश करा

  • नवीन खाते बनवा
  • Reset your password

© 2026 Misalpav.com