| काव्य |
झाड झाडासवे बोले.. (अष्टाक्षरी) |
वेणू |
| काव्य |
" स्वप्नामधली जमाडीजंमत " |
विदेश |
| काव्य |
सांब भोळा |
अत्रुप्त आत्मा |
| काव्य |
सांजवात.. |
सांजसंध्या |
| काव्य |
....पुन्हा!! |
वेणू |
| काव्य |
मैफिल नववर्षाची |
जयवी |
| काव्य |
मालवणी गजाली बरो... |
निश |
| काव्य |
प्रतिशोध |
अज्ञातकुल |
| काव्य |
(रे मना ..) |
गणेशा |
| काव्य |
रे मना .. |
सांजसंध्या |
| काव्य |
बळी राजाच देण ह्याजन्मि तरी फीटणार नाही. |
निश |
| काव्य |
असाध्य स्वार्थ...! |
वेणू |
| काव्य |
उंच माझा झोका .. |
अरूण म्हात्रे |
| काव्य |
मिड्लाईफ क्रायसीस. |
शैलेन्द्र |
| काव्य |
शूरवीर |
निश |
| काव्य |
सामान्य ! |
चैतन्य दीक्षित |
| काव्य |
त्याला ती हवीये... |
पिलीयन रायडर |
| काव्य |
उबेची पाखर... |
वेणू |
| काव्य |
म्याबी कवि होनार |
दादा कोंडके |
| काव्य |
मी पप्पा |
पाषाणभेद |
| काव्य |
काशीबाई काशीबाई |
पाषाणभेद |
| काव्य |
ते एक घर... |
निश |
| काव्य |
स्वप्नचित्र... |
सांजसंध्या |
| काव्य |
तेव्हा येईल अर्थ खरा जगण्याला |
गोंधळी |
| काव्य |
एक हिंस्र कविता (?)... (१८+ only) |
अस्वस्थामा |
| काव्य |
खेळ नियतींचा |
अविनाशकुलकर्णी |
| काव्य |
ती वेळ निराळी होती . . . .. |
अरूण म्हात्रे |
| काव्य |
आमचीही दांडगाई ___दान |
चिंटु |
| काव्य |
नभांगण...!! |
वेणू |
| काव्य |
जगणे असेच का असते? |
निश |