आदाब अर्ज है !( २६-०७-११) हार जाने का हौसला है मुझे.........
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काव्यरस
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२६-०७-११
ज़िन्दगी से यही गिला है मुझे ! ( गिला = तक्रार )
तू बहुत देर से मिला है मुझे !!
हमसफ़र चाहिये हुजूम नहीं ! ( सहप्रवासी हवा गर्दी नको )
इक मुसाफ़िर भी काफ़िला है मुझे !!
तू मोहब्बत से कोई चाल तो चल !
हार जाने का हौसला है मुझे !!
लब कुशां हूं तो इस यकीन के साथ ! ( लब कुशां = तोंड उघडने )
कत्ल होने का हौसला है मुझे !!
दिल धडकता नहीं सुलगता है !
वो जो ख्वाहिश थी, आबला है मुझे!!