| काव्य |
विवाहाची पद्यातली आमंत्रण पत्रिका |
उदय सप्रे |
| काव्य |
सारखे शिंकीत जाशी ... |
केशवसुमार |
| काव्य |
TAROT भविष्याची चाहुल घेणे |
अमोल केळकर |
| काव्य |
आयुष्यावर प्रेम करावे-- |
पुष्कराज |
| काव्य |
अशी गुमसुम आवडतेस मला |
धनंजय |
| काव्य |
द्विधा मनाचि |
namdev narkar |
| काव्य |
पावसा! |
ऋषिकेश |
| काव्य |
सोने |
सुवर्णमयी |
| काव्य |
माझी कविता |
प्रा.डॉ.दिलीप बिरुटे |
| काव्य |
मैत्री |
अनंतसागर |
| काव्य |
kai aahe tuzya manat........???? |
स्नेहश्री |
| काव्य |
कुणास ठाऊक..? |
स्नेहश्री |
| काव्य |
पाहिले मी ! |
कौस्तुभ |
| काव्य |
इज्जत |
श्रीकृष्ण सामंत |
| काव्य |
घेतली मिठीत आम्ही--- |
पुष्कराज |
| काव्य |
(स्वप्न) |
केशवसुमार |
| काव्य |
स्वप्न |
धोंडोपंत |
| काव्य |
(छंदात छंद तो प्रवासछंद --) |
अमोल केळकर |
| काव्य |
मिपावर लिहीणं धोक्याचं! |
पिवळा डांबिस |
| काव्य |
उद्वेग विसरून कसं चालेल? |
श्रीकृष्ण सामंत |
| काव्य |
(...मी खरा की तू खरा?) |
चतुरंग |
| काव्य |
सांभाळा हो! मला कुणीतरी |
श्रीकृष्ण सामंत |
| काव्य |
श्रावण. |
रामदास |
| काव्य |
ही केशरी संध्याकाळ |
श्रीकृष्ण सामंत |
| काव्य |
मामाच्या गावाला |
अरुण मनोहर |
| काव्य |
पारिजात |
मृत्युन्जय |
| काव्य |
( जाता दुरदेशी सुख वाटे जीवा -) |
अमोल केळकर |
| काव्य |
खुषी न मिळता मिळते रुसणे |
श्रीकृष्ण सामंत |
| काव्य |
(आता कशाला उड्याची बात!) |
चतुरंग |
| काव्य |
पोचलो का आपण? |
धनंजय |