| काव्य |
पडक्या घरास माझ्या |
suralesandip |
| काव्य |
भुंगा |
आनंदयात्री |
| काव्य |
दोष होता केला मी तो चुकून |
श्रीकृष्ण सामंत |
| काव्य |
मोनालीसा |
कौस्तुभ |
| काव्य |
चिंब पावसात तू न्हात असशील... |
फटू |
| काव्य |
परतुनी येईन मी.... |
अजिंक्य |
| काव्य |
लळा जिव्हाळा शब्दच मोठे |
श्रीकृष्ण सामंत |
| काव्य |
खणले रे पथ |
हेरंब |
| काव्य |
रासलीला |
पुष्कराज |
| काव्य |
अळकुळी तनु |
श्रीकृष्ण सामंत |
| काव्य |
नको म्हणू रे मनुजा! |
श्रीकृष्ण सामंत |
| काव्य |
संता आणी बंता |
अमोल केळकर |
| काव्य |
जखम मनाची ताजी असता |
श्रीकृष्ण सामंत |
| काव्य |
तुझी याद.. |
पद्मश्री चित्रे |
| काव्य |
नभी चांदणे...(गझल) |
पद्मश्री चित्रे |
| काव्य |
तत्व माझे सोडणार नाही |
श्रीकृष्ण सामंत |
| काव्य |
तारीफ करू का त्याची |
श्रीकृष्ण सामंत |
| काव्य |
तो आणि त्याचा 'मी' |
काळा_पहाड |
| काव्य |
धमुचे केळवण (जेव्हा पुरी नि भाजी - ) |
अमोल केळकर |
| काव्य |
लग्नाआधी नि लग्नानंतर ! |
संदीप चित्रे |
| काव्य |
आता कशाला उद्दयाची बात |
श्रीकृष्ण सामंत |
| काव्य |
काय करावे कळत नव्हते |
कौस्तुभ |
| काव्य |
शादी से पहले और शादी के बाद ! |
संदीप चित्रे |
| काव्य |
परि तुज सम आहेस तूच |
श्रीकृष्ण सामंत |
| काव्य |
(सख्या रे, घामट मी तरुणी!) |
चतुरंग |
| काव्य |
उघड्या खांद्यावरती सखये-- |
पुष्कराज |
| काव्य |
अरे संस्कार,संस्कार |
श्रीकृष्ण सामंत |
| काव्य |
जिवलगा... |
फटू |
| काव्य |
उद्धवा! अजब तुझे सरकार |
श्रीकृष्ण सामंत |
| काव्य |
दाखविली मातेची व्यथा कौतुके |
श्रीकृष्ण सामंत |