| काव्य |
कविता कसली करू तुजवरती |
श्रीकृष्ण सामंत |
| काव्य |
दिल्लीच्या दरबारामधली राजा आणिक राणी. |
उपटसुंभ |
| काव्य |
(दूर आहे डेडलाईन अजूनि) |
संदीप चित्रे |
| काव्य |
(बेचैन) |
चतुरंग |
| काव्य |
ओळखा पाहूं! |
श्रीकृष्ण सामंत |
| काव्य |
(चैन) |
केशवटुकार |
| काव्य |
आमची 'चैन' आहे! |
मिसळपाव |
| काव्य |
चैन |
अनिरुद्ध अभ्यंकर |
| काव्य |
दूरदेशी... |
पद्मश्री चित्रे |
| काव्य |
माझी पाखरे |
पुष्कराज |
| काव्य |
"कवडसा" |
मनीषा |
| काव्य |
तुझे नि माझे मिटू दे अंतर |
पुष्कराज |
| काव्य |
तुझ्या गळा, माझ्या गळा..! |
उपटसुंभ |
| काव्य |
विडंबन - विश्वासदर्शक ठरावाच्या निमित्ताने |
उपटसुंभ |
| काव्य |
एक शून्य ...... |
अरुण मनोहर |
| काव्य |
बुश:काल होता होता, `लाल'रात्र झाली... |
अविनाश ओगले |
| काव्य |
पहाट |
पंचम |
| काव्य |
माझी सुंदर आई |
श्रीकृष्ण सामंत |
| काव्य |
ठपका! |
चतुरंग |
| काव्य |
घरात भरल्या घुसले उंदीर... |
अविनाश ओगले |
| काव्य |
कार्यालय |
विनोद इन्गळे |
| काव्य |
ठिपका |
अनिरुद्ध अभ्यंकर |
| काव्य |
कार्यालय |
विनोद इन्गळे |
| काव्य |
जराशी खिडकी उघडा राव..! |
उपटसुंभ |
| काव्य |
((माउस)) |
अमोल केळकर |
| काव्य |
(माउस) |
बेसनलाडू |
| काव्य |
सार्याच आठवणी आहेत अजून मनात ताज्या |
फटू |
| काव्य |
तहान !! |
निसर्ग |
| काव्य |
पाउस..! |
उपटसुंभ |
| काव्य |
शाळा |
अमोल केळकर |