| जे न देखे रवी... |
काल धरण बांधिले |
अनन्त्_यात्री |
| जे न देखे रवी... |
कधीकधी मी हळवा होतो , बघुनी देव दानवांत |
खिलजि |
| जे न देखे रवी... |
सुखाच्या सीमेवर दुःखांची घरे वसतात |
खिलजि |
| जे न देखे रवी... |
प्रेम कोडगे घेऊन फिरलो |
खिलजि |
| जे न देखे रवी... |
पूर्वी आपण जिथे भेटायचो , तिथे आता एक टपरी झालीय |
खिलजि |
| जे न देखे रवी... |
पावसाविषयी असूया |
पाषाणभेद |
| जे न देखे रवी... |
तर्काच्या सीमेवर तेव्हा |
अनन्त्_यात्री |
| जे न देखे रवी... |
सर्पणाला एकदा पालवी फुटली |
खिलजि |
| जे न देखे रवी... |
पृथ्वी उवाच |
श्रेयासन्जय |
| जे न देखे रवी... |
पावसा पावसा पड रे |
बिपीन सुरेश सांगळे |
| जे न देखे रवी... |
पावसा पावसा पडू नकोस |
बिपीन सुरेश सांगळे |
| जे न देखे रवी... |
कोडगं व्हायचं... |
निओ |
| जे न देखे रवी... |
ऑफिसात जाऊन आलो |
महासंग्राम |
| जे न देखे रवी... |
तुझे शहर |
शिव कन्या |
| जे न देखे रवी... |
कविता पिंपळपान |
अत्रुप्त आत्मा |
| जे न देखे रवी... |
बिल देऊन आलो.. |
गवि |
| जे न देखे रवी... |
असा पाऊस |
पाषाणभेद |
| जे न देखे रवी... |
कुरळ्या बटावर माझ्या |
अविनाशकुलकर्णी |
| जे न देखे रवी... |
(व्हिस्की पिऊन आलो...) |
गड्डा झब्बू |
| जे न देखे रवी... |
(काय करून आलो) |
नाखु |
| जे न देखे रवी... |
(चहा पिऊन आलो..) |
ज्ञानोबाचे पैजार |
| जे न देखे रवी... |
काॅफी पिऊन आले... |
प्राची अश्विनी |
| जे न देखे रवी... |
वजनदार! |
चलत मुसाफिर |
| जे न देखे रवी... |
(मिपा हे, दर्जेदार, लेखनाचे, म्हणे व्यासपीठ आहे) |
ज्ञानोबाचे पैजार |
| जे न देखे रवी... |
डोह-१ |
सागरलहरी |
| जे न देखे रवी... |
डोह |
सागरलहरी |
| जे न देखे रवी... |
कुरबुर झाली |
पाषाणभेद |
| जे न देखे रवी... |
धागा चालेना, धागा पळेना... धागा संथ चाली, काही केल्या पेटेना |
चामुंडराय |
| जे न देखे रवी... |
मळभ..! |
जेनी... |
| जे न देखे रवी... |
दे दे दे दे दे दे |
पाषाणभेद |