कविता
| साहित्य प्रकार | शीर्षक | लेखक | शेवटचे अद्यतन | प्रतिक्रिया | नवीन प्रतिक्रिया |
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| कविता | अस्फुट | अनन्त्_यात्री | 5 वर्षे 7 महिने ago | 7 | |
| कविता | अनुष्टुप छंद - सोपा करून सांगायचा प्रयत्न | धष्टपुष्ट | 5 वर्षे 7 महिने ago | 22 | |
| कविता | विराणी- गझल | मी-दिपाली | 5 वर्षे 7 महिने ago | 19 | |
| कविता | पाखरांचे बोल | चांदणशेला | 5 वर्षे 7 महिने ago | 3 | |
| कविता | झोका | मी-दिपाली | 5 वर्षे 7 महिने ago | 14 | |
| कविता | आषाढाच्या एक दिनी | नूतन | 5 वर्षे 7 महिने ago | 5 | |
| कविता | शेतकरी आमचा बाप कधी राहिल टिपटाप ? | अनिल चव्हाण रामपुरीकर | 5 वर्षे 7 महिने ago | 74 | |
| कविता | दडपे पोहे..... | माम्लेदारचा पन्खा | 5 वर्षे 7 महिने ago | 6 | |
| कविता | घाव.....गजलेमधून | तिरकीट | 5 वर्षे 8 महिने ago | 6 | |
| कविता | नजर.. | मन्या ऽ | 5 वर्षे 8 महिने ago | 8 | |
| कविता | तुझी वाट | चांदणशेला | 5 वर्षे 8 महिने ago | 3 | |
| कविता | सोहळा | मी-दिपाली | 5 वर्षे 8 महिने ago | 8 | |
| कविता | युग प्रवाहीणी | Pradip kale | 5 वर्षे 8 महिने ago | 10 | |
| कविता | येत नाही... | अजब | 5 वर्षे 8 महिने ago | 7 | |
| कविता | <<म्हण दादा दादा खोटे>> | कानडाऊ योगेशु | 5 वर्षे 8 महिने ago | 6 | |
| कविता | (मन भूत भूत ओरडते..) | ज्ञानोबाचे पैजार | 5 वर्षे 8 महिने ago | 8 | |
| कविता | तू | सुमित_सौन्देकर | 5 वर्षे 8 महिने ago | 1 | |
| कविता | मन राधा राधा होते... | प्राची अश्विनी | 5 वर्षे 8 महिने ago | 37 | |
| कविता | कोरोना अमिताभ बच्चनलाही का छळत असतो ? | माहितगार | 5 वर्षे 8 महिने ago | 1 | |
| कविता | त्या पोराने | मनोज | 5 वर्षे 8 महिने ago | 9 | |
| कविता | क्षमा प्रार्थना | ज्ञानोबाचे पैजार | 5 वर्षे 8 महिने ago | 19 | |
| कविता | रात्र - चारोळी | शब्दानुज | 5 वर्षे 8 महिने ago | 1 | |
| कविता | विठूचा रंग काळा, आगळा | शेखरमोघे | 5 वर्षे 8 महिने ago | 2 | |
| कविता | अन् मग | अनन्त्_यात्री | 5 वर्षे 8 महिने ago | 7 | |
| कविता | उपाशी पोटी केलेली कविता !! | Sumant Juvekar | 5 वर्षे 8 महिने ago | 0 |