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चला अंताक्षरी खेळूया....

लेखक माम्लेदारचा पन्खा यांनी रविवार, 13/09/2015 15:59 या दिवशी प्रकाशित केले.
जुनाच पण सदाबहार खेळ !! इच्छुकांनी सहभागी व्हावे...... मेरे मेहबूब कयामत होगी.... आज रुसवा तेरी गलियोमे मोहब्बत होगी... मे री न ज रे तो गि ला क र ती है.... तेरे दिल को भी सनम तुझसे शिकायत होगी.... पुढचे अक्षर "ग"....
काव्यरस
लेखनविषय:

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प्रतिक्रिया 457

प्रतिक्रिया

संपादक महोदय हे डबल डबल का येत माहीत नाही कुठे चुक होते कळत नाही कृपया या विनंती प्रतिसादा सहीत सर्व डबल आलेले प्रतिसाद काढुन टाका याने रसभंग होतो साखळी तुटतेय

होके मजबूर मुझे उसने भुलाया होगा ज़हर चुपके से दवां जानके खाया होगा दिल ने ऐसे भी कुछ अफ़साने सुनाये होंगे अश्क़ आँखोंने पिये और ना बहाये होंगे बंद कमरे में जो खत मेरे जलाये होंगे एक एक हर्फ़ जबीन पर उभर आया होगा उसने घबराके नज़र लाख बचाई होगी दिल की लूटती हुयी दुनियाँ नज़र आयी होगी मेज़ से जब मेरी तस्वीर हटाई होगी हर तरफ मुझको तडपता हुआ पाया होगा छेड़ की बात पे अरमां मचल आये होंगे ग़म दिखावे की हँसी में उबल आये होंगे नाम पर मेरे जब आँसू निकल आये होंगे सर ना काँधे से सहेली के उठाया होगा जुल्फ़ ज़िद करके किसी ने जो बनाई होगी और भी ग़म की घटा मुखड़े पे छाई होगी बिजली नजरों ने कई दिन ना गिराई होगी रंग चेहरे पे कई रोज़ ना आया होगा

गोरे गोरे मुखड़े पे काला काला चश्मा तौबा खुदा खैर करे खूब है करिश्मा खूब है करिश्मा, गोरे गोरे मुखड़े पे काला काला चश्मा पुढिल अक्षर म

ग़ज़ब का है दिन, सोचो ज़रा ये दीवानापन, देखो ज़रा तुम हो अकेले, हम भी अकेले मज़ा आ रहा है, क़सम से, क़सम से नेक्स्ट--' स'

हम लिखा है ना ग से एक गाना. काहे दुई दुई गाने लिख रहे हो? स से गाना.... सामने ये कौन आआ दिल में हुई हलचल देखकर एक झलक हो गए सब पागल

रंग भरे बादल पे तेरे नैनो के काजल से मैने इस दिल पे लिख दिया तेरा नाम......चाँदनी, ओ मेरी चाँदनी. नेक्स्ट- न

प्रतिसाद लिहून प्रकाशित करेपर्यंत दुसरा प्रतिसाद येतोय त्यामुळे होतंय, असू द्या हो, येऊ द्या नेक्सट..

न तू ज़मीं के लिए है न आसमां के लिए तेरा वजूद है अब दास्ताँ के लिए पलट के सु-ए-चमन देखने से क्या होगा वो शाख ही ना रही जो थी आशियाँ के लिए ना तू ज़मीं... गरज परस्त जहां में वफ़ा तलाश न कर ये शय बनी थी किसी दूसरे जहां के लिए तेरा वजूद है अब दास्ताँ के लिए ए

In reply to by माम्लेदारचा पन्खा

हे दलाल या मिथुन दांच्या चित्रपटातले गाणे आहे. कुमार सानुने गायलेले आणि संगीत अर्थातच द वन अंड ओन्ली वन बाप्पीदांचे ऐकायला चांगले आहे. पण त्या "चढ गया उपर रे" मुळे हे कुठल्या कुठे वाहुन गेले. पैजारबुवा

In reply to by ज्ञानोबाचे पैजार

शब्दांवरून तर जुनं वाटतंय.... कुमार शानू, बप्पीदा आवडायचे पण काही काही गाण्यात !

In reply to by संजय पाटिल

क्या यारो, ना जाओ सैय्या म्हणा मनातल्या मनात कसम तुम्हारी मैं रो पडूँगी रो पडूँगी म्हणले ना? आलं का ग?

ना जाओ सैय्या छुड़ा के बईया, कसम तुम्हारी, मै रो पडुंगी.. रो पडुंगी. ग

गीत गाता हूँ मैं, गुनगुनाता हूँ मैं मैने हँसने का वादा किया था कभी इसलिए अब सदा मुस्कुराता हूँ मैं ये मोहब्बत के पल कितने अनमोल हैं कितने फूलों से नाज़ूक मेरे बोल हैं सब को फूलों की माला पहनाता हूँ मैं मुस्कुराता हूँ मैं ... रोशनी होगी इतनी किसे थी खबर मेरे मन का ये दर्पण गया है निखर साफ़ है अब ये दर्पण दिखाता हूँ मैं मुस्कुराता हूँ मैं ... म

In reply to by द-बाहुबली

गज़ब का है दिन सोचो ज़रा, ये दीवानापन देखो ज़रा तुम हो अकेले, हम भी अकेले, मज़ा आ रहा है, कसम से देख लो हमको करीब से, आज हम मिले हैं नसीब से ये पल फिर कहाँ और ये मंज़िल फिर कहाँ क्या कहूँ मेरा जो हाल है, रात दिन तुम्हारा ख़याल है फिर भी जान-ए-जां, मैं कहाँ और तुम कहाँ काहीही ह श्री ह

लाल छड़ी मैदान खड़ी क्या खूब लड़ी क्या खूब लड़ी हम दिल से गये, होय्य्य्य्य्य्य्य्य्य्य्य... हम दिल से गये, हम जान से गये बस आँख मिली और बात बढ़ी. लाल छड़ी मैदान खड़ी क्या खूब लड़ी क्या खूब लड़ी

In reply to by द-बाहुबली

डम डम डिगा डिगा, मौसम भीगा भीगा बिन पिये मैं तो गिरा, मैं तो गिरा, मैं तो गिरा, हाए अल्ला सूरत आप की सुभान अल्ला तेरी अदा वाह वाह क्या बात है अखियाँ झुकी झुकी, बातें रुकी रुकी देखो कोई रे आज लूट गया, हाए अल्ला ... सनम हम माना गरीब है नसीबा खोटा सही, बंदा छोटा सही दिल ये खज़ाना है प्यार का, हाए अल्ला ... तेरी कसम तू मेरी जान है मुखड़ा भोलाभाला, छूपके डाका डाला जाने तू कैसी मेहमान है, हाए अल्ला ... फिरसे ले ल

In reply to by मारवा

लडकी है क्या रे बाबा उसकी अदा रे बाबा उसका नशा रे बाबा रेबाबा रेबाबा रेबाबा बाबा बाबा बाबा (जी की जय)

In reply to by द-बाहुबली

बाहों के दरमियाँ, दो प्यार मिल रहे है जाने क्या बोले मन, डोले सुन के बदन, धड़कन बनी ज़ुबां खुलते बंद होते, लबो की ये अनकही मुझ से कह रही है के बढ़ने दे बेखुदी मिल यूँ के दौड़ जाए, नस नस में बिजलियाँ आसमान को भी ये हसीं राज है पसंद उलझी उलझी साँसों की आवाज है पसंद मोती लूटा रही है सावन की बदलियाँ य

In reply to by मारवा

ये रातें, ये मौसम, नदी का किनारा, ये चंचल हवा कहा दो दिलों ने, के मिलकर कभी हम ना होंगे जुदा... ये क्या बात है, आज की चाँदनी में के हम खो गये, प्यार की रागनी में ये बाहों में बाहें, ये बहकी निगाहें लो आने लगा जिंदगी का मज़ा ये रातें, ये मौसम, नदी का किनारा, ये चंचल हवा कहा दो दिलों ने, के मिलकर कभी हम ना होंगे जुदा.

बड़ी मुश्कील है खोया मेरा दिल है कोई उसे ढूँढके लाये ना जाके कहाँ मैं रपट लिखाउ कोई बतलाये ना मैं रोउ यां हसू करू मैं क्या करू र

In reply to by रातराणी

हमें तुम से प्यार कितना, ये हम नहीं जानते मगर जी नहीं सकते, तुम्हारे बिना सुना गम जुदाई का उठाते हैं लोग जाने जिन्दगी कैसे बिताते हैं लोग दिन भी यहाँ तो लगे बरस के समान हमें इंतज़ार कितना ये हम नहीं जानते मगर जी नहीं सकते, तुम्हारे बिना तुम्हें कोई और देखे तो जलता है दिल बड़ी मुश्किलों से फिर संभलता है दिल क्या, क्या जतन करते हैं तुम्हे क्या पता ये दिल बेकरार कितना ये हम नहीं जानते मगर जी नहीं सकते, तुम्हारे बिना न

न जाने क्यूं होता है ये जिंदगीके साथ अचानक ये मन किसीके जाने के बाद करे फिर उसकी याद छोटी छोटी सी बात न जाने क्यूं य घ्या

In reply to by रातराणी

यादो की बारात निकली है आज दिलके द्वारे सपनो की शहनाई बीते दिनो को पुकारे दिल के द्वारे र

In reply to by मारवा

रुक जाना नही.. तु कही हारके कांटोसे चलके मिलेंगे सायें बहार के.. ओ राही ओराही. ओ राही ओराही. ह

In reply to by द-बाहुबली

हमें तोह लुट लिया मिल के हुस्नवालो ने काले काले बालो ने, गोरे गोरे गालो ने नजर में शोकिया और बचपना शरारत में अदाए देखके हम फँस गए मोहब्बत में हम अपनी जान से जायेंगे जिनकी उल्फत में यकीन है की ना आएंगे वोह ही मैयत में तोह हम भी कह देंगे, हम लुट गए शराफत में वही वही पे क़यामत हो वोह जिधर जाये झुकी झुकी हुयी नजरो से कम कर जाये तडपता छोड़ दे रस्ते में और गुजर जाये सितम तोह यह है की दिल ले ले और मुकर जाये समझ में कुछ नहीं आता की हम किधर जाये यही इरादा है यह कहके हम तोह मर जाये वफ़ा के नाम पे मारा है बेवफाओ ने की दम भी हमको ना लेने दिया जफ़ाओ ने खुदा भुला दिया इन हुस्न के खुदाओ ने मिटा के छोड़ दिया इश्क की खताओ ने उडाये होश कभी जुल्फ की हवा ने हयाए नाज़ ने लुटा कभी अदाओ ने हजार लुट गए नजरो के इक इशारे पर हजारो बह गए तूफान बनके धारे पर ना इनके वादों का कुछ ठीक है ना बातो का फ़साना होता है इनका हजार रातो का बहुत हसीन है वैसे तोह भोलापन इनका भरा हुवा है मगर ज़हर से बदन इनका यह जिसको काट ले पानी वोह पी नहीं सकता दावा तोह क्या है दुआ से भी जी नहीं सकता इन्हीं के मारे हुए हम भी हैं ज़माने में है चार लफ्ज़ मोहब्बत के इस फ़साने में जमाना इनको समझता है नेक और मासूम मगर यह कहते हैं क्या है किसीको क्या मालूम इन्हें ना तीर ना तलवार की जरुरत है शिकार करने को काफी निगाहे उल्फत हैं हसीन चाल से दिल पायमाल करते हैं नजर से करते हैं बातें कमाल करते हैं हर एक बात में मतलब हजार होते हैं यह सीधे सादे बड़े होशियार होते हैं खुदा बचाए हसीनो की तेज चलो से पड़े किसी का भी पाला ना हुस्न वालो से हुस्नवालो में मोहब्बत की कमी होती है चाहनेवालो की तक़दीर बुरी होती है इनकी बातो में बनावट ही बनावट देखी शर्म आँखों में निगाहों में लगावट देखी आग पहले तोह मोहब्बत की लगा देते हैं अपनी रुकसार का दीवाना बना देते हैं दोस्ती कर के फिर अंजन नजर आते हैं सच तोह यह है की बेईमान नजर आते हैं मौत से कम नहीं दुनिया में मुहब्बत इनकी जिन्दगी होती बरबाद बदौलत इनकी दिन बहारो के गुजरते हैं मगर मर मरके लुट गए हम तोह हसीनो पे भरोसा कर के क घ्या क

In reply to by रातराणी

गुनगुना रहे हैं भँवरें, खिल रही हैं कली कली गली गली, कली कली ज़रा देखो सजन बेईमान भँवरा कैसे मुस्काये हाए, कली यूँ शरमाये, घूघंट में गोरी जैसे छुप जाये रुत ऐसी हाय कैसी, ये पवन चली गली गली किसी को क्या कहे, हम दोनो भी हैं देखो कुछ खोये ओये, हुआ क्या ओये ओये, जागे जिया में अरमान सोये रुत ऐसी हाय कैसी, ये पवन चली गली गली सुनो, पास ना आओ, कली के बहाने प्यार ना जताओ जाओ, चलो बात ना बनाओ, भँवरें के बहाने आँख ना लड़ाओ रुत ऐसी हाय कैसी, ये पवन चली गली गली ल घ्या ल

लड़की बड़ी अनजानी है सपना है सच है कहानी है देखो ये पगली बिल्कुल ना बदली ये तो वही दीवानी है

गलीमे मारे फेरे पास आनेको मेरे कभी परख्ता नैन मेरे तो कभी परख्ता तोल अंबरसरीया मुन्डेया वे कच्ची कलियाँ ना तोड़ तेरी माँने बोले है मुझे तिखेसे बोल

In reply to by ज्ञानोबाचे पैजार

गली में मारे फीरे पास आने को मेरे कभी फड़कता नैन मेरे तो कभी फड़कता तोरे कभी फड़कता नैन मेरे तो कभी फड़कता तोरे अम्बरसरिया..मुंडयावे कचिया कलियाँ ना तोड़ अम्बरसरिया..मुंडयावे कचिया कलियाँ ना तोड़ तेरे माँ ने बोले हैं मुझे तीखे से बोल तेरे माँ ने बोले हैं मुझे तीखे से बोल अम्बरसरिया.. हो अम्बरसरिया.. गोर गोर मेरे कलाई गोर गोर मेरे कलाई चूड़ियाँ काली काली मैं शर्माती रोज़ लगाती काजल सुरमा लाली नहीं मैं सुरमा पाडा रूप ना मैं चमकाना नहीं मैं सुरमा पाडा रूप ना मैं चमकाना नैन नशीली हूँ अगर तो सुरमे दी की लोड अम्बरसरिया..मुंडयावे कचिया कलियाँ ना तोड़ अम्बरसरिया..मुंडयावे कचिया कलियाँ ना तोड़ तेरे मान ने बोले हैं मुझे तीखे से बोल तेरे मान ने बोले हैं मुझे तीखे से बोल अम्बरसरिया.. अम्बरसरिया