| काव्य |
झोपेत वर्गात येणे, अन येऊन पुन्हा झोपणे (विडंबन) |
पल्लवी मिंड |
| काव्य |
तू …. ! |
BONGALE SANTOS… |
| काव्य |
आजकाल हे असे आहे... |
निमिष सोनार |
| काव्य |
आज 'तो' राहिला नाही |
आनंदमयी |
| काव्य |
मी.... |
घन निल |
| काव्य |
अजून आहे मी वनवासी |
आनंदमयी |
| काव्य |
प्रसाद शेरणीचा |
BONGALE SANTOS… |
| काव्य |
पुन्हा नव्याने.. |
आनंदमयी |
| काव्य |
अर्थ |
माम्लेदारचा पन्खा |
| काव्य |
शब्द चिमुकले सांडत होते ... |
जेनी... |
| काव्य |
सल अंतरीचा.. |
फुंटी |
| काव्य |
वानोळा |
अज्ञातकुल |
| काव्य |
रेडा कायें (म्हणोन) लपविता... ??? |
बॅटमॅन |
| काव्य |
तुझिया डोळ्यांत तेंव्हा पाऊस दाटला होता … |
घन निल |
| काव्य |
( चला नांगरूया शेत सारे ) |
मोदक |
| काव्य |
(चल परत नव्याने सुरू करू सारे) |
धन्या |
| काव्य |
रागावणे – समजावणे |
मिसळलेला काव्यप्रेमी |
| काव्य |
फोल |
आतिवास |
| काव्य |
गुंता |
सार्थबोध |
| काव्य |
चल परत नव्याने सुरू करू सारे |
पल्लवी मिंड |
| काव्य |
चारोळ्या - २ |
धन्या |
| काव्य |
पुरावा |
सार्थबोध |
| काव्य |
तिन कविता तिन ठिगळे |
ज्ञानोबाचे पैजार |
| काव्य |
गुन्हा |
चाणक्य |
| काव्य |
लागले वेड मज | |
प्रमोद देर्देकर |
| काव्य |
मिसळपाव |
सार्थबोध |
| काव्य |
अविचल |
अज्ञातकुल |
| काव्य |
आज पुन्हा उडावेसे वाटले |
पल्लवी मिंड |
| काव्य |
अभय |
सार्थबोध |
| काव्य |
शिळी जिलेबी - १ |
धन्या |