जुनाच पण सदाबहार खेळ !! इच्छुकांनी सहभागी व्हावे......
मेरे मेहबूब कयामत होगी....
आज रुसवा तेरी गलियोमे मोहब्बत होगी...
मे री न ज रे तो गि ला क र ती है....
तेरे दिल को भी सनम तुझसे शिकायत होगी....
पुढचे अक्षर "ग"....
या भवनातील गीत पुराणे ,
मवाळ हळवे सुर जाउ दया , आज येथुनी दूर .
भाव भक्तीची भाऊक गाथा
पराभुत हो , नमविल माथा
नवे सुर अनं नवे तराणे
हवा नवा तो नुर , जाउ दया , आज जुने ते दूर .
या भवनातील गीत पुराणे .
ग़म का फ़साना बन गया अच्छा
एक बहाना बन गया अच्छा
सरकार ने आके मेरा हाल तो पूछा
ग़म का...
तुम्हारे ख़यालों में खो जायें
ये जी चाहता है की सो जायें
देखो बातों-बातों में चाँदनी रातों में
ख़्वाब सुहाना बन गया अच्छा...
बतायें तुम्हें क्या कहाँ दर्द है
यहाँ हाथ रखना यहाँ दर्द है
देखो बातों बातों में दो ही मुलाकातों में
दिल ये निशाना बन गया अच्छा...
मुहब्बत की रंगीन महफ़िल में
जगह मिल गई आपके दिल में
देखो बातों-बातों में प्यार की बरातों में
अपना ठिकाना बन गया अच्छा...
पुढील अक्षर - छ
पैजारबुवा,
तमा तमा लोगे
तू प्रेमी आहा मैं प्रेमी आहा
तू रानी आहा मैं राजा आहा
फिर क्या daddyक्या अम्मा
इक बस तू ही प्यार के काबिल सारा जहां है निकम्मा
तमा तमा लोगे तमा
पुढचे अक्षर "त"
पैजारबुवा,
हैं सबसे मधुर वो गीत जिन्हें, हम दर्द के सुर में गाते हैं
जब हद से गुज़र जाती है खुशी, आँसू भी छलकते आते हैं
काँटों में खिले हैं फूल हमारे, रंग भरे अरमानों के
नादान हैं, जो इन काँटों से दामन को बचाये जाते हैं
जब ग़म का अन्धेरा घिर आये, समझो के सवेरा दूर नहीं
हर रात का हैं पैगाम यहीं, तारे भी यहीं दोहराते हैं
पहलू में पराये दर्द बसाके, तू हँसना हँसाना सीख ज़रा
तूफ़ान से कह दे घिर के उठे, हम प्यार के दीप जलाते हैं
काहीही हं
ह
कभी कभी मेरे दिल में ख़याल आता है
के जैसे तुझ को बनाया गया है मेरे लिए
तू अब से पहले सितारों में बस रही थी कही
तुझे जमीं पे बुलाया गया है मेरे लिए
कभी कभी मेरे दिल में ख़याल आता है
के ये बदन ये निगाहें, मेरी अमानत हैं
ये गेसुओं की घनी छाँव हैं मेरी खातिर
ये होंठ और ये बाहें मेरी अमानत हैं
कभी कभी मेरे दिल में ख़याल आता है
के जैसे बजती हैं शहनाईयां सी राहों में
सुहाग रात है घूंघट उठा रहा हूँ मैं
सीमट रही है, तू शरमा के अपनी बाहों में
कभी कभी मेरे दिल में ख़याल आता है
के जैसे तू मुझे चाहेगी उम्रभर यूही
उठेगी मेरी तरफ प्यार की नजर यूं ही
मैं जानता हूँ के तू गैर है मगर यूं ही
हा हा हा
ह
संपादक महोदय
हे डबल डबल का येत माहीत नाही कुठे चुक होते कळत नाही कृपया या विनंती प्रतिसादा सहीत सर्व डबल
आलेले प्रतिसाद काढुन टाका याने रसभंग होतो साखळी तुटतेय
होके मजबूर मुझे उसने भुलाया होगा
ज़हर चुपके से दवां जानके खाया होगा
दिल ने ऐसे भी कुछ अफ़साने सुनाये होंगे
अश्क़ आँखोंने पिये और ना बहाये होंगे
बंद कमरे में जो खत मेरे जलाये होंगे
एक एक हर्फ़ जबीन पर उभर आया होगा
उसने घबराके नज़र लाख बचाई होगी
दिल की लूटती हुयी दुनियाँ नज़र आयी होगी
मेज़ से जब मेरी तस्वीर हटाई होगी
हर तरफ मुझको तडपता हुआ पाया होगा
छेड़ की बात पे अरमां मचल आये होंगे
ग़म दिखावे की हँसी में उबल आये होंगे
नाम पर मेरे जब आँसू निकल आये होंगे
सर ना काँधे से सहेली के उठाया होगा
जुल्फ़ ज़िद करके किसी ने जो बनाई होगी
और भी ग़म की घटा मुखड़े पे छाई होगी
बिजली नजरों ने कई दिन ना गिराई होगी
रंग चेहरे पे कई रोज़ ना आया होगा
न तू ज़मीं के लिए
है न आसमां के लिए
तेरा वजूद है
अब दास्ताँ के लिए
पलट के सु-ए-चमन
देखने से क्या होगा
वो शाख ही ना रही
जो थी आशियाँ के लिए
ना तू ज़मीं...
गरज परस्त जहां में
वफ़ा तलाश न कर
ये शय बनी थी किसी
दूसरे जहां के लिए
तेरा वजूद है
अब दास्ताँ के लिए
ए
हे दलाल या मिथुन दांच्या चित्रपटातले गाणे आहे. कुमार सानुने गायलेले आणि संगीत अर्थातच द वन अंड ओन्ली वन बाप्पीदांचे
ऐकायला चांगले आहे. पण त्या "चढ गया उपर रे" मुळे हे कुठल्या कुठे वाहुन गेले.
पैजारबुवा
यम्मा यम्मा
हम तुम एक कमरे मे
ये जो मोहब्बत है
या भवनातील
मराठी गाणी चालणार नै
याद तेरी आयगी
हा हिन्दी , ईंग्लिश
गैरोंपे करम
बिरुटे सर हे घ्या.
अरे उशीर झाला
छन से जो तुटे कोई सपना
नदिया से दरिया,
मेरे सपनों को रानी जब आएगी तू
मस्त
तुझे देखा तो ये जाना सनम
तुम तो ठहरे परदेशी
माही वे..
हैं सबसे मधुर वो गीत जिन्हें, हम दर्द के सुर में गाते हैं
हम न समझे थे बात इतनीसी
कभी कभी मेरे दिल में ख़याल आता है
संपादक महोदय हे डबल डबल कृपया काढुन टाका
होके मजबूर मुझे उसने भुलाया
गोरे गोरे मुखड़े पे काला काला
माई नि माई मुन्डेर पे तेरी
गोरी तेरा गाव बड़ा प्यारा
ग़ज़ब का है दिन, सोचो ज़रा
अर्र, सॉरी, र पासून देते.
तुम्ही एकट्या आहात का दोघी?
हम लिखा है ना ग से एक गाना.
रंग भरे बादल पे तेरे नैनो के
नजर के सामने जिगर के पास
लागी तुमसे मन की लगन,
बहोत कनफूजन हो रहा हय.
कनफूजन
न तू ज़मीं के लिए
ना ना करते प्यार तुम्हिसे कर
ठहरे हुए पानी मे कंकर ना मार सावरे
ठ ला चांगला पर्याय सापडला...
मा. प.
अ न पे क्षित....
रज्ज कि आयेगि बारात, रंगीलि
हे असे वाचावे
राह में उनसे मुलाकात हो गई
इस्पाडर मॅन इस्पाडर मॅन ,
ना जाओ सैय्या छुड़ा के बईया ग
ग कसं काय?
अय्या
मधलं गाणं समजून घ्यायाचं....
क्या यारो,
आत्ता कळलं