सावध ऐका (मागल्या) हाका! भ भोचक यांनी Mon, 03/22/2010 - 20:02 · लेख लेख वर्गीकरण प्रतिक्रिया द्या 3573 वाचन 💬 प्रतिसाद (6) प्रतिक्रिया लेख शुचि Mon, 03/22/2010 - 20:23 नवीन लेख आवडला ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ जितनी दिल की गहराई हो उतना गहरा है प्याला, जितनी मन की मादकता हो उतनी मादक है हाला, जितनी उर की भावुकता हो उतना सुन्दर साकी है,जितना ही जो रसिक, उसे है उतनी रसमय मधुशाला।। मस्त लेख चिरोटा Mon, 03/22/2010 - 21:27 नवीन मस्त लेख. आवडला. भेंडी P = NP सावध ऐका भियाव.... चित्रगुप्त Mon, 03/22/2010 - 21:49 नवीन ओ भियाव क्या केरियाहे यार, कमाल कर दी अपन भी तो इन्दौर वाले है भिया. --चित्रगुप्त " पडे रहो " कशाला फुकटची दगदग...... वा भिया... बिपिन कार्यकर्ते Mon, 03/22/2010 - 21:58 नवीन वा भिया... क्या बोल रिया तू... !!! बिपिन कार्यकर्ते, लोकमान्य नगर, इंदौर पण टारझन Mon, 03/22/2010 - 22:14 नवीन पण भय्यासारखा सर्वव्यापी शब्द मात्र आपल्याकडे नाही. हे वाक्य काळजाला भिडले .. :) बाकी लेख खुपच छाण !!! -(सर्वव्यापी) भय्या सही तुकाम्हणे Tue, 03/23/2010 - 03:40 नवीन अजुन एक आमच्या गावचे... इतकी वर्ष इंदोरला जाउनही ही व्हेरायटी नोटीस केली नव्हती. मस्त ऑब्झर्वेशन तुषार विश्व जालावरील मराठी जग
लेख शुचि Mon, 03/22/2010 - 20:23 नवीन लेख आवडला ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ जितनी दिल की गहराई हो उतना गहरा है प्याला, जितनी मन की मादकता हो उतनी मादक है हाला, जितनी उर की भावुकता हो उतना सुन्दर साकी है,जितना ही जो रसिक, उसे है उतनी रसमय मधुशाला।।
सावध ऐका भियाव.... चित्रगुप्त Mon, 03/22/2010 - 21:49 नवीन ओ भियाव क्या केरियाहे यार, कमाल कर दी अपन भी तो इन्दौर वाले है भिया. --चित्रगुप्त " पडे रहो " कशाला फुकटची दगदग......
वा भिया... बिपिन कार्यकर्ते Mon, 03/22/2010 - 21:58 नवीन वा भिया... क्या बोल रिया तू... !!! बिपिन कार्यकर्ते, लोकमान्य नगर, इंदौर
पण टारझन Mon, 03/22/2010 - 22:14 नवीन पण भय्यासारखा सर्वव्यापी शब्द मात्र आपल्याकडे नाही. हे वाक्य काळजाला भिडले .. :) बाकी लेख खुपच छाण !!! -(सर्वव्यापी) भय्या
सही तुकाम्हणे Tue, 03/23/2010 - 03:40 नवीन अजुन एक आमच्या गावचे... इतकी वर्ष इंदोरला जाउनही ही व्हेरायटी नोटीस केली नव्हती. मस्त ऑब्झर्वेशन तुषार विश्व जालावरील मराठी जग
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