आज गुरुपोर्णिमा....
गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णु:
गुरुर्देवो महेश्वरा :
गुरु: साक्षात परब्रह्म
तस्मै श्रीगुरुवे नम: ॥
हे प्रार्थना गुरुदेव से यह स्वर्गसम संसार हो, अति उच्चतम जिवन बने, परमार्थमय व्यवहार हो, ना हम रहे, अपने लिये, हम को सभी से गर्ज है, गुरुदेव यह आशिष दे, जो सोचनेका फर्ज है ll हम हो पुजारी तत्व के,गुरुदेव के आदेशके सच प्रेम के नित नेम के , सद्धर्म के , सत्कर्म केहो चिढ झुठी शहकी, अन्यायकी अभिमानकी,सेवा कर्म को दासी की, परवाह नही हो जानक
हे प्रार्थना गुरुदेव से यह स्वर्गसम संसार हो, अति उच्चतम जिवन बने, परमार्थमय व्यवहार हो, ना हम रहे, अपने लिये, हम को सभी से गर्ज है, गुरुदेव यह आशिष दे, जो सोचनेका फर्ज है ll हम हो पुजारी तत्व के,गुरुदेव के आदेशके सच प्रेम के नित नेम के , सद्धर्म के , सत्कर्म केहो चिढ झुठी शहकी, अन्यायकी अभिमानकी,सेवा कर्म को दासी की, परवाह नही हो जानक
याद्या
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मिसळपाव
एक लहान मुलगी वय वर्षे कदाचित पाच. शाळेत अत्यंत अस्थीर . वर्गात येणार्या चिमण्याशीच बोलणे, वारंवार डेस्क उघडणे, वर्गाच्या खीडकीतून रस्त्यावरून जाणार्या बॅन्डवाल्यांशी बोलणे वगैरे वगैरे.... हे तिचे सततचे उद्योग. तिच्या या उद्योगाना कंटाळून शाळेतून मुलीचे नाव काढून टाकले.