फासले ऐसेभी होंगे - भावानुवाद - असेल अंतर असेही...
मूळ गझल
फासले ऐसे भी होंगे.......ये कभी सोचा ना था .....
सामने बैठा था मेरे.....और वो मेरा ना था!!!!!!
वो की खुश्बू की तरह.....फैला था मेरे चार सू......
मैं उसे महसूस कर सकता था......छू सकता ना था.....
रात भर उस ही की आहट कान में आती रही......
....झाँक कर देखा गली में....कोई भी आया ना था......
अक्स तो मौजूद थे पर .....
मिसळपाव