या जन्मावर, या जगण्यावर, शतदा प्रेम करावे
- यशवंत देव यांच्या गीताचे स्वैर रुपांतर
- बहुगुणी, ऑगस्ट ८, २००८
शक्य झाल्यास चालीतही गाता यावं असा प्रयत्न आहे.
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इस जीवनपर, इस जीनेपर, दिल सौ बार लुटाएं
दिल सौ बार लुटाएं
इस जीवनपर, इस जीनेपर, दिल सौ बार लुटाएं
चंचल झोंके, जलकी धारा, भीगी काली मिट्टी
जैसे प्राण हो हरे भरे, निकल पडी तृणपत्ती
फूल शर्मिले देखके किसकी, होठोंकी याद आए
इस जीवनपर, इस जीनेपर, दिल सौ बार लुटाएं
रंगोंका फैलाकर पंखा, सांझ ये किसने बना ली
रैनाके दरवाजेपर जैसी, तारोंकी रंगोली
छे ऋतुओंकी हो छे मेहेफ़िलें, यहींपर दर्द हटाएं
इस जीवनपर, इस जीनेपर, दिल स