| काव्य |
पुण्याची मुंबई आता झाली की राव... |
निमिष सोनार |
| काव्य |
सोनरंग |
चांदणशेला |
| काव्य |
प्रपोज डे |
अविनाशकुलकर्णी |
| काव्य |
मी माझा |
दिपोटी |
| काव्य |
माणूस प्रगत झालाय? |
फुंटी |
| काव्य |
मुक्तपीठ |
चुकार |
| काव्य |
सर्वसामान्य आणि राजकारणी! |
ज्योति अळवणी |
| काव्य |
तुझी आठवण, साठवणींच्या कोंदणात अशीच पडून राहिली |
खिलजि |
| काव्य |
जसे छाटले मी मला येत गेले,धुमारे पुन्हा! |
सत्यजित... |
| काव्य |
माझे जगणे होते गाणे ( विडंबन ) |
गोगट्यांचा समीर |
| काव्य |
(हे कोहल्यांच्या विराटा) |
दमामि |
| काव्य |
डू-आयडीज् खूप दिसतात इथे, परतुनी येती "नाना"विध रूपे |
चामुंडराय |
| काव्य |
हे चैतन्याच्या विराटा |
फुंटी |
| काव्य |
चारोळी |
Swapnaa |
| काव्य |
सैल नसू दे मिठी जराही! |
सत्यजित... |
| काव्य |
सैल असावी मिठी जराशी... |
प्राची अश्विनी |
| काव्य |
चल उठ रे बेवड्या झाली सांज झाली... बाहेर दारू गुत्त्यांना हलकेच जाग आली |
चामुंडराय |
| काव्य |
या देशात नेमक चाललयं काय? |
परशुराम सोंडगे |
| काव्य |
तू |
चुकार |
| काव्य |
(खमकेच टगे बसतात इथे) |
दमामि |
| काव्य |
नवखेच सखे फसतात इथे |
विशाल कुलकर्णी |
| काव्य |
मनाचं प्लॉटिंग |
फुंटी |
| काव्य |
(जरही) या दिशेला एकदाही यायचे नव्हते मला |
ज्ञानोबाचे पैजार |
| काव्य |
शब्दविता |
फुंटी |
| काव्य |
(तरही) या दिशेला एकदाही यायचे नव्हते मला! |
सत्यजित... |
| काव्य |
या दिशेला एकदाही यायचे नव्हते मला.. वेगळे सुचलेले-- |
राघव |
| काव्य |
(भिती तुझ्याउरी पण) |
नाखु |
| काव्य |
तरही गज़ल : या दिशेला एकदाही यायचे नव्हते मला |
विशाल कुलकर्णी |
| काव्य |
प्रश्न साधासाच होता... |
प्राची अश्विनी |
| काव्य |
अभिजात(चारोळी) |
पराग देशमुख |