| काव्य |
रात्ररंग.. |
प्राजु |
| काव्य |
समस्यापूर्ती |
सागरलहरी |
| काव्य |
""कालचक्र"" |
मृगनयनी |
| काव्य |
सासुरवाशीण |
अनंत छंदी |
| काव्य |
कधीच नाही |
जयवी |
| काव्य |
एक कविता |
दत्ता काळे |
| काव्य |
भुक |
जयेश माधव |
| काव्य |
संक्रांतीच्या शुभेच्छा |
नंदन |
| काव्य |
खळाळत्या नदीतीरी सांज घेते ठाव |
श्रीकृष्ण सामंत |
| काव्य |
शाक्त पंथीय साधक साधिकांची शक्ति उपासना |
अविनाशकुलकर्णी |
| काव्य |
डोरियन ग्रे |
सुवर्णमयी |
| काव्य |
हिशोब |
उपटसुंभ |
| काव्य |
माझ्यातल्या कवीला सूचना.... (माझ्या पुरत्याच इतरांनी राग मानू नये ) |
सागरलहरी |
| काव्य |
प्रयोजनाविण दिवा एकटा . .......... मरण न येण्याची स्थिती |
सागरलहरी |
| काव्य |
पाठीराखा (ही नवीन कविता आहे) |
द्विज |
| काव्य |
यमकाचा खेळ |
सागरलहरी |
| काव्य |
<पुन्हा पुन्हा मी!!!!> |
पिवळा डांबिस |
| काव्य |
पसंत अपनी अपनी |
श्रीकृष्ण सामंत |
| काव्य |
खपली |
भास्कर केन्डे |
| काव्य |
खेळ दोन ओळींचा - २ |
राघव |
| काव्य |
गारवा कृपेचा..! |
राघव |
| काव्य |
रितेपण |
जयवी |
| काव्य |
अमुची चिमुकली गादी |
श्रीकृष्ण सामंत |
| काव्य |
अज्जे अज्जे ऐक जरा.. |
स्वाती फडणीस |
| काव्य |
येऊ तशी कशी मी फारीनला? |
पिवळा डांबिस |
| काव्य |
पहिली रात (धुवांधार द्वंद्व) |
केशवटुकार |
| काव्य |
पहिली रात (देवद्वार) |
रामजी |
| काव्य |
मी परत एकदा |
द्विज |
| काव्य |
कडुलींब (देवद्वार छंद) |
दत्ता काळे |
| काव्य |
गारवा (देवद्वार छंद) |
चन्द्रशेखर गोखले |