| काव्य |
अपवाद |
पॅपिलॉन |
| काव्य |
चारवांतर |
परिकथेतील राजकुमार |
| काव्य |
वाटसरूच्या पाऊलखुणा (अनुवादित) |
धनंजय |
| काव्य |
(भासमान) |
चतुरंग |
| काव्य |
भासमान |
पॅपिलॉन |
| काव्य |
सहज भेट्ली---- |
पुष्कराज |
| काव्य |
माझा गाव |
लवंगी |
| काव्य |
खेळ दोन ओळींचा - ३ |
राघव |
| काव्य |
घायाळ हरिणी |
राजा |
| काव्य |
बुद्धी (उद्धव मात्रावृत्त प्रयत्न) |
ऋषिकेश |
| काव्य |
जागतिक मंदी |
राजा |
| काव्य |
एक रुबाई किंवा चारोळी |
दत्ता काळे |
| काव्य |
असचं वाटलं म्हणुन| |
केदार केसकर |
| काव्य |
`अण्णा'न्न दशा! |
आपला अभिजित |
| काव्य |
बापू.. |
उपटसुंभ |
| काव्य |
सांगून जा ... |
मनीषा |
| काव्य |
खेळ खुर्चिचा |
मनोज |
| काव्य |
पुन्हा पहिल्या सारखं |
rahulkransubhe |
| काव्य |
आई कसे म्हणु मी... |
rahulkransubhe |
| काव्य |
आसाराम बापु |
rahulkransubhe |
| काव्य |
प्राणिपात कोटि कोट |
सतिश |
| काव्य |
लव लेटर |
कशिद |
| काव्य |
पुढार्यांचे देशभक्ती गीत |
चन्द्रशेखर गोखले |
| काव्य |
(भणंग २) |
चतुरंग |
| काव्य |
अरे पुन्हा आयुष्याच्या.. |
बहुगुणी |
| काव्य |
सोनियाच्या तालावर महाराष्ट्र वारयावर |
कपिल काळे |
| काव्य |
झुंज त्याची व्यर्थ गेली |
पुष्कराज |
| काव्य |
पुरे झाले चंद्र सूर्य! |
केदार केसकर |
| काव्य |
हिची चाल |
भिडू |
| काव्य |
पुन्हा जिवंत परत आले तर |
सुवर्णमयी |