| काव्य |
orkuting हा माझा छ॑द आहे |
स्वप्निल मन |
| काव्य |
जवाबः शहरातला आणि खेड्यातला मुलगा |
३_१४ विक्षिप्त अदिती |
| काव्य |
क्षितिज |
स्वप्नयोगी |
| काव्य |
खेड्यातला आणि शहरी मुलगा |
पाषाणभेद |
| काव्य |
असा फिरे |
क्रान्ति |
| काव्य |
नयनी तुझ्या |
ऋषिकेश |
| काव्य |
यावा अशात साजण |
जयवी |
| काव्य |
गजरा..... |
उदय सप्रे |
| काव्य |
वेगळाच आहे पाऊस आज |
ओंकार देशमुख |
| काव्य |
यातना |
स्वप्नयोगी |
| काव्य |
कविता |
स्वप्नयोगी |
| काव्य |
कोण म्हणाले |
विजुभाऊ |
| काव्य |
अंत |
क्रान्ति |
| काव्य |
बेणारे |
शरदिनी |
| काव्य |
कळ्या |
स्वप्नयोगी |
| काव्य |
पाऊलखुणा |
स्वप्नयोगी |
| काव्य |
जेवणा..शा |
विजुभाऊ |
| काव्य |
सांगता..... |
उदय सप्रे |
| काव्य |
वडील |
बहुगुणी |
| काव्य |
चालुकेश्या |
केशवसुमार |
| काव्य |
एका आय सी यू तली आठवण |
शरदिनी |
| काव्य |
दुर का रे असतो |
पाषाणभेद |
| काव्य |
निरिक्षणाशा ... |
३_१४ विक्षिप्त अदिती |
| काव्य |
कसाब काल म्हणाला अजुन मी बाल रे ' |
ग्रीष्म |
| काव्य |
खेळ मनाचा |
जयवी |
| काव्य |
श्रेय |
स्वप्नयोगी |
| काव्य |
कारुण्याशा |
शरदिनी |
| काव्य |
ओझं |
स्वप्नयोगी |
| काव्य |
झाला तो सत्वर, मॅनेजर! |
चतुरंग |
| काव्य |
संसदेच्या शाळेत... |
अविनाश ओगले |