| काव्य |
शब्दांचे पारतंत्र्य |
निनाव |
| काव्य |
मी पुरुष बिच्चारा |
गणेशा |
| काव्य |
ह्या परदेशात.....!! |
प्रकाश१११ |
| काव्य |
धिक्कार हो! |
दैत्य |
| काव्य |
विचारवंत! |
राजेश घासकडवी |
| काव्य |
पुरुष! |
अभिजीत राजवाडे |
| काव्य |
उहापोह |
निनाव |
| काव्य |
आमचा फाटक्यात अडकला पाय , या अण्णांचं करायचं काय? |
सुधीर काळे |
| काव्य |
(थंड झाले खाकरे गं) |
३_१४ विक्षिप्त अदिती |
| काव्य |
हे गणराज्य की धनराज्य? |
गंगाधर मुटे |
| काव्य |
पंख मोकळे नभात.. |
प्राजु |
| काव्य |
अण्णा हजारे |
अभिजीत राजवाडे |
| काव्य |
"संभवामि युगे युगे" असे वचन देऊन गेलेले भगवान श्रीकृष्ण अण्णांच्या रूपात आले आहेत! |
सुधीर काळे |
| काव्य |
आरसा |
निनाव |
| काव्य |
दोर |
निनाव |
| काव्य |
मिसळपाव |
अभिजीत राजवाडे |
| काव्य |
गगनावरी तिरंगा ....!! |
गंगाधर मुटे |
| काव्य |
बहरणारा ऋतू संपत आलाय ...!! |
प्रकाश१११ |
| काव्य |
माझी ललाटरेषा |
गंगाधर मुटे |
| काव्य |
आजी |
अभिजीत राजवाडे |
| काव्य |
तळतेस भजी तू जेव्हां - |
विदेश |
| काव्य |
आयुष्य-पुष्प |
अभिजीत राजवाडे |
| काव्य |
(महावीर पांडू) |
पॅपिलॉन |
| काव्य |
महावीर बंडू - |
विदेश |
| काव्य |
मुंबैच्या दर्यामंदी जहाज बुडू जातं - |
अमोल केळकर |
| काव्य |
बदल्ला आहे काळ.. |
प्रिया ब |
| काव्य |
अंधार |
अभिजीत राजवाडे |
| काव्य |
चांदणपक्षी |
विजुभाऊ |
| काव्य |
हाण त्याच्या टाळक्यात : नागपुरी तडका |
गंगाधर मुटे |
| काव्य |
<कायकू> |
विजुभाऊ |