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| साहित्य प्रकार | शीर्षक | लेखक | प्रतिक्रिया |
|---|---|---|---|
| जनातलं, मनातलं | मिपा, पुणे कट्टा...अचानक!!! | धमाल मुलगा | 43 |
| जे न देखे रवी... | जीए | हेरंब | 6 |
| जनातलं, मनातलं | संवयी | हेरंब | 13 |
| काथ्याकूट | मित्राच्या मजेशीर गोष्टी | शितल | 10 |
| जनातलं, मनातलं | लास वेगास! | पिवळा डांबिस | 22 |
| जनातलं, मनातलं | माणुसकीचा झरा | शितल | 5 |
| जनातलं, मनातलं | भडकमकरांचे करीअर गायडंस वर्ग .....भाग ३ ... इव्हेंट मॆनेजर व्हा | भडकमकर मास्तर | 9 |
| जे न देखे रवी... | दंव | उदय सप्रे | 5 |
| जे न देखे रवी... | मानाचा मुजरा! | चतुरंग | 10 |
| जे न देखे रवी... | हे क्रांतिकारकांनो! | अजय जोशी | 8 |
| जे न देखे रवी... | येक सुविचार | शरुबाबा | 6 |
| जे न देखे रवी... | गिनिपिग | मिनासो | 1 |
| जे न देखे रवी... | (वाटले बरे किती) | केशवसुमार | 13 |
| जे न देखे रवी... | (केश्यांतिका... अर्थात् केश्याची शोकांतिका...(एक नवविडंबन)) | ब्रिटिश टिंग्या | 3 |
| जनातलं, मनातलं | एका उपक्रमाची ओळख | नीलकांत | 15 |
| कौल | मराठी माणसाचे मन ओळखून दोन-तीन दिवसात केसचा निकाल लावणा-या मुंडे साहेबांनी दूरदर्शन मालिका काढावी. | अजय जोशी | 2 |
| जे न देखे रवी... | घोडा आणि ओझे | विसुनाना | 12 |
| काथ्याकूट | त्रुटी.... | अभिज्ञ | 3 |
| जनातलं, मनातलं | उपकरणे घेताना | वरदा | 33 |
| जनातलं, मनातलं | सारे प्रवासी गाडीचे | भोचक | 8 |
| जे न देखे रवी... | गमतीदार ऊखाणे. | विवेकवि | 4 |
| काथ्याकूट | मला काय आवडले? | मनापासुन | 13 |
| जनातलं, मनातलं | दुरावा! | पिवळा डांबिस | 29 |
| काथ्याकूट | मैत्री म्हणजे कांय? | उदय सप्रे | 13 |
| जनातलं, मनातलं | मेक्सिकन गंबो | चित्रा | 7 |
| जे न देखे रवी... | (गजल) | चतुरंग | 1 |
| जनातलं, मनातलं | दडपे पोहे | सृष्टीलावण्या | 18 |
| जनातलं, मनातलं | संवादाची ऐशी तैशी | आपला अभिजित | 18 |
| जे न देखे रवी... | (कुजबुज) | केशवसुमार | 7 |
| जे न देखे रवी... | (भूक ही खरी किती) | चतुरंग | 4 |