| काव्य |
रक्तरंग |
संदीप-लेले |
| काव्य |
हे फक्त माणसातच ! |
शिव कन्या |
| काव्य |
कविता |
संदीप-लेले |
| काव्य |
रिक्त प्याल्याच्या तळाशी... |
सत्यजित... |
| काव्य |
फुलपाखरु मनाचे हळुवार होत आहे! |
सत्यजित... |
| काव्य |
अडवाटेवरच देऊळ |
ओ |
| काव्य |
स्पेशल महापुरूष |
परशु सोंडगे |
| काव्य |
हळव्या खुणा |
चांदणशेला |
| काव्य |
" ळ " च्या करामती |
ऋतु हिरवा |
| काव्य |
एक बेवारस प्रेत - माझा बाप |
परशु सोंडगे |
| काव्य |
मध्यरात्री |
अनन्त्_यात्री |
| काव्य |
चेटकीण |
ओ |
| काव्य |
जीवात्मा |
संदीप-लेले |
| काव्य |
( वरपरीक्षा ) |
रातराणी |
| काव्य |
वधूपरीक्षा |
अविनाशकुलकर्णी |
| काव्य |
निळाई ... |
विशाल कुलकर्णी |
| काव्य |
अस्पृश्य |
ओ |
| काव्य |
निशीगंधाचे उखाणे |
परशु सोंडगे |
| काव्य |
?? नाव सुचले नाही ?? |
इना |
| काव्य |
वायाच एमबी चालली |
फुंटी |
| काव्य |
बोललो नाही कधी पण... |
सत्यजित... |
| काव्य |
'नाते' म्हणून आहे! |
सत्यजित... |
| काव्य |
निघाला (गजल) |
संदीप-लेले |
| काव्य |
पुन्हा भोन्डला (भोन्डल्याची गाणी ) |
मूखदूर्बळ |
| काव्य |
छळ |
संदीप-लेले |
| काव्य |
इंद्रजाल |
चांदणशेला |
| काव्य |
राधा |
शैलेन्द्र |
| काव्य |
तो खुला बाजार होता! |
सत्यजित... |
| काव्य |
मन... जीवन... |
ज्योति अळवणी |
| काव्य |
पात्रामध्ये नदीच्या प्रेते सडूनी गेली ... |
विशाल कुलकर्णी |