| काव्य |
बहादुर शाह जफर के कुछ आखरी अशार... |
अश्फाक |
| काव्य |
घराच्या खाणाखुणा लक्षात ठेवाव्यात अशी घरे ..!! |
प्रकाश१११ |
| काव्य |
नमस्ते, सचिन... |
सुभाष् अक्कावार |
| काव्य |
लेवू दे निळाई.. |
स्वानंद मारुलकर |
| काव्य |
बंडूच्या स्वप्नातच येते - |
विदेश |
| काव्य |
आक्रोष |
चन्द्रशेखर गोखले |
| काव्य |
नवरत्नहार |
मूकवाचक |
| काव्य |
संजयदॄष्टी |
चन्द्रशेखर गोखले |
| काव्य |
मध्यरात्र..!! |
प्रकाश१११ |
| काव्य |
पुन्हा तुझीच वाट पहात आहे |
गणेशा |
| काव्य |
युगलगीतः मला वाजतीया थंडी |
पाषाणभेद |
| काव्य |
जख्ख अशी म्हातारी !! |
प्रकाश१११ |
| काव्य |
जख्ख अशी म्हातारी !! |
प्रकाश१११ |
| काव्य |
(गाडी सुटली , रुमाल हलले) |
अडगळ |
| काव्य |
प्रवास मी एकटीच करते... (गीत) |
गणेशा |
| काव्य |
जे प्रेम करून लग्न करतात ...!! |
प्रकाश१११ |
| काव्य |
काय करू मी बाई सांगा तरी काही |
पाषाणभेद |
| काव्य |
(एक बाई ठेवावी म्हणतोय!) |
पिवळा डांबिस |
| काव्य |
एक बायको करावी म्हणतोय |
गणेशा |
| काव्य |
गच्च मिठी शहारलेली |
गणेशा |
| काव्य |
कवितेचे झाड !! |
प्रकाश१११ |
| काव्य |
हळूच द्या मज झोका कान्हा |
पाषाणभेद |
| काव्य |
एक आठवण |
संजयशिवाजीरावगडगे |
| काव्य |
प्रेम |
संजयशिवाजीरावगडगे |
| काव्य |
भिजल्या डोळ्यासही ना काही वाटले |
गणेशा |
| काव्य |
आदाब अर्ज है ! |
अश्फाक |
| काव्य |
आम्ही काय म्हणूं धार्मीक |
पाषाणभेद |
| काव्य |
तार मनाचे दे झंकारून |
गंगाधर मुटे |
| काव्य |
पानगळ सुरु झाली आहे !! |
प्रकाश१११ |
| काव्य |
आसवे तो हुंदका टाळुन गेली.............. |
मयुरेश साने |