| काव्य |
सजणूक दे फुलोर्याची |
माहितगार |
| काव्य |
(स्वप्ना, जागृती, सीमा) |
प्रसाद गोडबोले |
| काव्य |
किचनमधून ती सांगते |
श्रीगणेशा |
| काव्य |
कोळीगीतः समींदरा, जपून आण माझ्या घरधन्याला |
पाषाणभेद |
| काव्य |
स्वप्न जागृतीची सीमा |
अनन्त्_यात्री |
| काव्य |
पुरूष एक वाल्या कोळी. |
कर्नलतपस्वी |
| काव्य |
(ऐसे(ही) ऐकिले आकाशी) |
ज्ञानोबाचे पैजार |
| काव्य |
" समजूत " |
रश्मिन |
| काव्य |
तुझे गाणे |
अनुस्वार |
| काव्य |
ऐसे ऐकिले आकाशी |
अनन्त्_यात्री |
| काव्य |
(चकणा जरा) |
प्रसाद गोडबोले |
| काव्य |
चांदणचुरा |
Bhakti |
| काव्य |
मोकळ्या करा पखाली |
चांदणे संदीप |
| काव्य |
B.1.1.529 |
अनन्त्_यात्री |
| काव्य |
पद्याव्हान १ - लिमरिक् |
धष्टपुष्ट |
| काव्य |
पद्याव्हान - आकृतिबद्ध पद्य |
धष्टपुष्ट |
| काव्य |
राजवंशी |
राहत |
| काव्य |
हे डोंगरकड्या |
बिपीन सुरेश सांगळे |
| काव्य |
तिथे कोणी नि:शब्द |
अनन्त्_यात्री |
| काव्य |
उर्दू शायरीमधील "हर्फ गिराना" आणि हिन्दी चित्रपट संगीतावर त्याचा परिणाम |
धष्टपुष्ट |
| काव्य |
तुझ्या घरातले अनारसे |
चॅट्सवूड |
| काव्य |
अवचित गवसावे काही जे... |
अनन्त्_यात्री |
| काव्य |
कोकणी आणि मराठी कवितांचा आस्वाद |
चौकस२१२ |
| काव्य |
उतरत्या संध्याकाळी.... |
प्राची अश्विनी |
| काव्य |
खंत |
श्रीगणेशा |
| काव्य |
किनखापी आभाळाने |
अनन्त्_यात्री |
| काव्य |
जीव कोरा |
मायमराठी |
| काव्य |
(मेरा कुछ सामान... (भावा...(बघ)..अनुवाद.)) |
ज्ञानोबाचे पैजार |
| काव्य |
मेरा कुछ सामान... भावानुवाद. |
प्राची अश्विनी |
| काव्य |
तेजस्विनी दिवाळी |
निमिष सोनार |