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मेहबूब मेरे...

लेखक विनायक पन्त यांनी मंगळवार, 16/02/2016 14:30 या दिवशी प्रकाशित केले.
ईद के दिन कही घर से बाहर ना निकलना, लोग चान्द समझके कही रोजा ना तोड दे, खफा हो कर खुदा कही... चान्द जैसे मुखडे बनाना ना छोड दे...
काव्यरस
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प्रतिक्रिया 18

प्रतिक्रिया

रक्षा बंधन के दिन गलतीसे घरके बाहर न निकलना लडकिया भैया भैया कहेके काही राखी न बांध दे फिर खफा होके खुदासे ये मत कहेना ए मालिक... प्लिज बता तेरी रज़ा क्या है... पैजारबुवा

=))=))

वो हमे मेहेबुब भले ही ना समझे हम तो उनके आशिक है अरे वो क्या, उनके बच्चे भी हमे मामा कहेके बुलाते है एक जमाना ऐसा था की वो आगे और हम उनके पिछे भागते थे उस जमाने मे हमारे हाथ मे गुलाब के बहोत सारे फुल हुवा करते थे अब जमाना ऐसा है की हम आगे और वो हमारे पिछे भागते है फर्क इतना ही हुवा है की उनके हाथ मे गुलाब की जगह बेलन रहेता है पैजारबुवा

वो मेरेकु बोल्या इद के दिन बाहर मत निकलना ,लोग रोजा तोड देन्गे वो मेरेकु बोल्या इद के दिन बाहर मत निकलना ,लोग रोजा तोड देन्गे मै उसकु बोल्या, खालीपिली डरता कायकु, हम फेविकॉल से वापिस जोड देन्गे

In reply to by प्राची अश्विनी

मै दुकानदार को बोला एक फेविकॉल देना उनका फोटो सीने पे चीपकाने के लिये दुकानदार बोला बडा लेना उसके साथ एका रिमुव्हर फ्री मे मिलता है पहेले वाली का फोटो सीने से हटाने के लिये Change is only permanent पैजारबुवा,